Dec 30, 2016

संकीर्णता छोड़े , मानवता अपनाएं


 अभी कुछ दिन पहले ही सुप्रीमकोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में भारतीय वायु सेना के एक मुस्लिम जवान के दाढ़ी रखने को नियम - सम्मत मानने से इन्कार कर दिया था | अब मध्य प्रदेश के बढ़वानी ज़िले के अरिहंत होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के छात्र असअद ख़ान को दाढ़ी रखने की वजह से कॉलेज से निकलना पड़ा है | कालेज पर आरोप है कि दाढ़ी के कारण छात्र पर दबाव बनाया गया , जिसके चलते उसे कालेज छोड़ना पड़ा | जबकि कॉलेज के प्राचार्य एम. के. जैन ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि छात्र ने कॉलेज से ट्रांसफर लेने का आवेदन दिया था और उसे ट्रांसफर सर्टिफ़िकेट दे दिया गया है |
बढ़वानी के ज़िलाधिकारी तेजस्वी एस. नायक के अनुसार , छात्र ने शिकायत दी थी कि दाढ़ी रखने के कारण उसके साथ भेदभाव हुआ और इस मामले की जांच की जा रही है | उन्होंने कहा कि संबंधित कॉलेज में स्कॉलरशिप से जुड़े एक मामले की जांच भी चल रही है जिसके साथ इस जांच को भी जोड़ दिया गया है | असअद ख़ान ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2013 में प्रवेश परीक्षा के ज़रिए इस कॉलेज में दाख़िला लिया था | उस समय उन्होंने दाढ़ी नहीं रखी थी |.असअद का आरोप है कि कॉलेज के प्राचार्य एमके जैन ने उन पर बार-बार दाढ़ी कटवाने का दबाव बनाया , जो किसी भी तरह से उचित नहीं | मैंने तीन महीनों तक इसे नज़रअंदाज़ किया | वे दबाव बनाते रहे | मुझे क्लास से बाहर भी निकाल दिया जाता था | जब मैंने कहा कि दाढ़ी रखना मेरा अधिकार है और मैं नहीं कटवा सकता , तो मेरे कॉलेज में आने पर ही रोक लगा दी गई | असअद ने अपनी शिकायत के साथ ज़िला प्रशासन को फ़ोन कॉल का रिकार्ड और प्राचार्य के साथ बातचीत की र्ऑडियो सीडी सबूत के तौर पर पेश की हैं | वहीं कालेज के प्राचार्य एम. के. जैन का कहना है कि हमने कभी दाढ़ी कटवाने के लिए दबाव नहीं बनाया | हमारे कॉलेज में और छात्र भी दाढ़ी रखते हैं | अगस्त 2016 में कॉलेज ने असअद को ट्रांसफर सर्टिफ़िकेट दे दिया लेकिन असद ने आरोप लगाया है कि "कॉलेज ने दूसरे वर्ष की मेरी उपस्थिति ज़ीरो दिखा दी है जिसकी वजह से मैं कहीं दाख़िला नहीं ले सकता हूँ | ये सरासर ग़लत है | इसकी जांच होनी चाहिए और मुझे न्याय मिलना चाहिए | दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता नदीम ख़ान का कहना है कि वे इस मामले को लेकर इंदौर हाई कोर्ट में जाएंगे | जबकि ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विगत 15 दिसंबर को वायुसेना में मुस्लिम अफसर आफताब अहमद अंसारी की याचिका खारिज कर दी | उन्हें दाढ़ी रखने को लेकर 2008 में वायुसेना से हटा दिया किया गया था | अंसारी ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी |
सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि भारतीय वायुसेना में धार्मिक आधार पर अफसर दाढ़ी नहीं बढ़ा सकते | नियम अलग हैं और धर्म अलग | दोनों एक-दूसरे में दखल नहीं दे सकते |वायुसेना के अफसर आफताब अहमद अंसारी ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्होंने धर्म के आधार दाढ़ी रखी थी और वायुसेना ने उन्हें हटाकर उनके साथ भेदभाव किया है | आफताब ने अपनी याचिका में कहा था कि संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत दाढ़ी रखना उनका मौलिक अधिकार है | उन्होंने दलील दी थी कि जिस तरह वायुसेना में शामिल सिखों को दाढ़ी और पगड़ी रखने की इजाजत है उसी तरह उन्हें भी इसकी अनुमति मिलनी चाहिए | हालांकि तत्कालीन यूपीए सरकार ने किसी तरह के सख्त कदम से बचते हुए यह निर्देश दिया था कि सेना में यदि मुस्लिम व्यक्ति दाढ़ी रखते हैं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए, लेकिन बाद में सरकार ने विचार की बात कही थी | दाढ़ी रखने के कारण जुलाई 16 में ही मसरूर अहमद को उत्तराखंड की रुद्रपुर इंस्टिट्यूट अफ़ टेक्नालाजी में दाख़िला नहीं मिला था | वर्तमान में सुप्रीमकोर्ट के आदेश को अपवाद मान लें तो केवल इसराईल को छोड़कर किसी अन्य देश में इस प्रकार का कठोर प्रतिबन्ध नहीं है | अमेरिकी सेना में भर्ती के लिए भी दाढ़ी न रखने का नियम है , लेकिन कठोर नहीं है | कुछ ही समय पहले अमेरिका में भारत के दिल्ली निवासी सिख युवक 26 वर्षीय सिमरन लांबा की सेना में भर्ती की गयी और उन्हें दाढ़ी और पगड़ी रखने की अनुमति दी गई | हमारे देश में भी इस प्रकार की अनुमति मिलनी चाहिए |

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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