Nov 18, 2016

गले पड़ी नोटबंदी , भारी विरोध के बीच उठे कई सवाल

गले पड़ी नोटबंदी , भारी विरोध के बीच उठे कई सवाल
देश का नेशनल मीडिया मोदी सरकार के नोटबंदी के फ़ैसले का लगातार गुणगान करते हुए जन समस्याओं पर भी फोकस कर रहा है , फिर भी मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं , जबकि कई दिनों से बैकों और एटीएम से पैसे निकालने के लिए जिद्दोजहद कर रही जनता की लंबी कतारों और उनको हो रही परेशानी की गूंज पिछले दिनों संसद से सड़क तक गूंजी । संसद में यह मुद्दा बार - बार उठा | 8 नवंबर 2016 को पीएम मोदी की 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा के बाद से ही देशभर में हलचल मची हुई है। देश की जनता की परेशानी बढ़ी हुई है | नोट बंदी के विरोध में जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया , टीएमसी के अलावा शिवसेना, नेशनल कॉन्फ्रेंस और आम आदमी पार्टी के सांसद भी शामिल हुए I इन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और अपना विरोध जताया | ममता बनर्जी शुरू से ही मोदी सरकार द्वारा बड़े नोट बंद किए जाने का विरोध कर रही हैं और बढ़ - चढ़ कर बयान दे रही हैं I वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने नोटबंदी के फैसले की जेपीसी से जांच कराने की मांग की है। मार्च से पहले संसद परिसर में गांधी मूर्ति के पास टीएमसी नेताओं ने काले शॉल ओढ़कर सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया I सरकार के लिए उसके सहयोगी शिवसेना ने भी मुश्किलें खड़ी कर दी है I शिवसेना ने यूं तो विगत 14 नवंबर को एनडीए की बैठक में एकजुटता का भरोसा दिया था, लेकिन उद्धव ठाकरे को ममता बनर्जी के फोन के बाद शिवसेना ने ऐलान कर दिया कि नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी मार्च में वह भी शामिल होगा | राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि हम कालाधन और आतंकवाद के खिलाफ हैं। सरकार ने नोटबंदी का निर्णय गलत समय लिया इससे किसानों को और आम आदमी को बहुत दिक्कत हो रही है। नोटबंदी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा यूनियनों को फैसला लीक किया गया। बैंक से कैश निकासी पर रोक क्यों है? नोटबंदी से बेटियों की शादियां तक रुकी हैं। गरीब की लाश अस्पतालों में फंसी है। भाजपा ने घाव दिए और घाव पर नमक भी लगाया। मजदूर, किसान नोटबंदी से बेकार हुए, क्या गाजीपुर की रैली का भुगतान क्रेडिट कार्ड से हुआ? स्टेट बैंक आफ इंडिया को मार्च से नोट बंद होने की जानकारी थी। आनंद शर्मा के सवालों पर भाजपा सांसद पीयूष गोयल ने कहा कि पूरा देश पीएम के फैसले का स्वागत कर रहा है। आनंद शर्मा का अर्थशास्त्र कमजोर है। पहली बार ईमानदारी को सम्मान और बेईमान को नुकसान हुआ है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में आपात सत्र के दौरान बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला था और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे एवं नोटबंदी वापस लेने की केंद्र से मांग करते हुए तीन दिनों का अल्टीमेटम दिया। केजरीवाल ने कहा था कि आदित्य बिरला ग्रुप के एक्‍जीक्‍यूटिव प्र‍ेसिडेंट के पास से बराबद 2012 के मैसेज से पता चला कि उसने गुजरात के मुख्यमंत्री को पैसे
दिए थे। केजरीवाल ने कहा, ‘आदित्य बिरला ग्रुप पर अक्टूबर 2013 में छापा पड़ा था। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सभी कागजात ले लिए थे। ग्रुप के एक्‍जीक्‍यूटिव प्र‍ेसिडेंट शुभेंन्दु अमिताभ के लेपटॉप, ब्लैकबेरी को भी लिया गया था। उसमें एक एंट्री में लिखा था गुजरात सीएम 25 करोड़। गुजरात के मुख्यमंत्री के आगे 25 करोड़ और ब्रेकिट में 12 दिए और बाकी ? लिखा था। गुजरात के मुख्यमंत्री कौन थे उस वक्त….नरेंद्र मोदी जी 2012 में। केजरीवाल ने विधान सभा में आगे कहा था कि पहली बार कुर्सी पर बैठे किसी प्रधानमंत्री का नाम काले धन के किसी घोटाले में आया है। केजरीवाल ने यह भी कहा था कि पनामा घोटाले में मोदी जी के कितने दोस्‍तों के नाम थे, मगर कोई एक्‍शन नहीं लिया गया। 648 लोगों के स्विस बैंक अकाउंट नंबर तक लिखे हुए थे | मगर कार्रवाई इसलिए नहीं हुई क्‍योंकि इस लिस्‍ट के अंदर प्रधानमंत्री मोदी जी के दोस्‍त हैं।दस्‍तावेज सामने रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘आज मैं सबूत लेकर आया हूं। आयकर विभाग ने 15 अक्‍टूबर 2013 को आदित्‍य बिरला ग्रुप पर छापेमारी हुई। वापस आने के बाद इनकम टैक्‍स की अप्रेजल रिपोर्ट में बिरला ग्रुप के अकाउंटेंट ने कहा कि मैं हवाला का पैसा लेकर आता हूं। मेरे बॉस का नाम शुभेन्‍दु अमिताभ हैं। वे बिरला ग्रुप के एक्‍जीक्‍यूटिव प्र‍ेसिडेंट थे।कई विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार पर इस फैसले को लेकर निशाना साधा | संसद से बाहर भी समर्थन और विरोध का दौर चल रहा है , जिसमें कुछ सनसनीखेज ख़ुलासे भी हो रहे हैं | राजस्थान के कोटा जिले के भाजपा विधायक भवानी सिंह राजावत ने कथित तौर पर कहा है कि अंबानी और अडानीको 500 और 1000 के नोट बंद किए जाने के बारे में पहले से पता था। गत16 नवंबर को इंटरनेट पर रिलीज किए गए एक वीडियो में भाजपा विधायक कथित तौर पर ऐसा कहते दिख रहे हैं। कथित वीडियो में कहा गया है, “अडानी, अंबानी अतराम-सतराम इन सब को पहले ही पता था। इनको हिंट दे दिया गया। उन्होंने अपना कर लिया।जब 'इंडियन एक्सप्रेस' ने भवानी सिंह से इस वीडियो की सत्यता के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ये वीडियो कुछ पत्रकारों के संग उनकी अनौपचारिक बातचीतका है जिसे हेरफेर के साथपेश किया जा रहा है। भवानी सिंह ने कहा, “वीडियो में जैसा दिखाया जा रहा है | मैंने वैसा कुछ नहीं कहा।नोटबंदी के बाद जारी किए गए 2000 के नए नोट के बारे में इस वीडियो में कहा जा रहा है, “नए नोट थर्ड क्लास हैं। जाली जैसे लगते हैं।वीडियो में कथित तौर पर विधायक नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले की आलोचना करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में कहा जा रहा है, “पूरी करेंसी आप प्रिंट करते। देश की आबादी और उसके अनुपात में करेंसी प्रिंट करते, उसके बाद में आप एक साथ। अब पेट्रोल पंप की कीमतों की तरह आज 12 बजे 500 और 1000 के नोट बंद हो जाएगा।भवानी सिंह ने ' इंडियन एक्सप्रेस ' से बातचीत में ऐसा कुछ कहने से इन्कार करते हुए कहा, “कुछ पत्रकार मेरे कोटा स्थित आवास पर आए थे, क्योंकि मैं कुछ समय पहले अपने क्षेत्र के गाँवों में दौरे पर गया था। लेकिन उन्होंने अनैतिक रूप से मेरी अनौपचारिक बातचीत रिकॉर्ड कर ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और 1000 के नोटों को उसी दिन रात 12 बजे से बंद करने की घोषणा की थी। पुराने नोट 30 दिसंबर तक बैंकों में बदले या जमा कराए जा सकते हैं। बड़े नोटों के बंद होने से आम जनता को नकद पैसे की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में बैंकों और एटीएम के सामने लोगों की लंबी कतारे देखी जा रही हैं। आम लोगों को पैसे पाने के लिए को कई घंटों तक लाइन में लगना पड़ रहा है। उधर सरकार ने साफ़ कर दिया है कि नोटबंदी का फ़ैसला वापस नहीं लिया जायेगा और न ही जेपीसी गठित की जाएगी , लेकिन सरकार को यह ज़रूर करना चाहिए कि नोटबंदी के दुष्परिणामों से जनता को बचाए और एक हज़ार रूपये के नोटों को फिर चलन में लाने के साथ ही अन्य विकल्पों पर विचार करे |


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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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