Jul 19, 2016

जमाअत इस्लामी हिन्द ने सभी राज्यों से सूचनाएं मांगीं



ताकि देश में जवाहर बाग न दोहराया जाए
जवाहरबाग कांड क़ानून व्यवस्था का निहायत ही संगीन मामला है | प्रशासन और पुलिस की साक्षात् मौजूदगी में एक बड़े आपराधिक गिरोह का पनपना और उसका समानांतर सरकार की शक्ल में आना भारतीय लोकतंत्र का बहुत दुखद , आश्चर्यजनक और चौंकानेवाला अध्याय है | फिर भी राजनेताओं द्वारा जिस हल्के अंदाज़ से इसे लिया जा रहा है , वह अत्यंत असन्तोषजनक और क्षोभकारी है | उत्तर प्रदेश सरकार इसकी सी . बी . आई . जाँच से इन्कार कर चुकी है | उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश इम्तियाज़ मुर्तज़ा की अगुआई में एक सदस्यीय जाँच करा रही है , जो मामले की सही ढंग से जाँच न कराने के आरोप की संवाहक है | यह एकल जाँच आयोग तीस दिन में अपनी रिपोर्ट देगा , जिसमें ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने से संबंधित मशविरे भी शामिल होंगे | उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव ने इस कांड से सबक़ लेते हुए मथुरा ज़िले के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सभी सरकारी ज़मीनों पर अवैध क़ब्ज़े या अतिक्रमण की रिपोर्ट मांगी है | मुख्य सचिव ने यह भी जानना चाहा है कि किन - किन सरकारी ज़मीनों पर अवैध क़ब्ज़े हो रहे हैं , अभी वे हटाए गए या नहीं , क़ब्ज़ा कब से है या वर्तमान में क्या कार्रवाई चल रही है ? यह क़दम भी गंभीरता न प्रकट करनेवाला है | होना यह चाहिए था कि प्रदेश के सभी ज़िलों से ऐसी रिपोर्ट तलब की जाती और तदनुरूप कार्रवाई होती | उल्लेखनीय है कि जवाहरबाग कांड में राम वृक्ष यादव गिरोह ने 260 एकड़ जमीन पर क़ब्ज़ा कर रखा था और वहीं से अपनी आपराधिक गतिविधियाँ चला रहा था | पिछले तीन जून को पुलिस से उसकी हुई मुठभेड़ में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी और बड़ी मात्रा में विस्फोटक और हथियार बरामद किए गए थे | यह भी सच है कि बिना राजनीतिक प्रश्रय के यह संभव भी नहीं था , जैसा कि बताया जाता है कि उक्त गिरोह का सरगना राम वृक्ष यादव बड़ी आसानी से भाग गया , जबकि मीडिया में यह रिपोर्ट छपी थी कि सुरक्षा बलों के हाथों वह मारा जा चुका है | जवाहर बाग कहने के लिए जंगल था, लेकिन अंदर बसा था पूरा शहर। ऐसा शहर जिसमें आटा चक्की, राशन डिपो, सब्जी मंडी, सैलून, ब्यूटी पार्लर समेत तमाम सुविधाएं थीं।
अपने आपको गरीब-मजदूर बताने वाले कब्जाधारियों के पास बाइक, स्कूटर और लग्जरी गाड़ियां भी थीं।सरकार ने बिजली काटी, तो पूरा सोलर सिस्टम लगा लिया। उद्यान विभाग के कुओं और ट्यूबवेलों पर कब्जा कर लिया। जवाहरबाग खाली हुआ तो वहां राख के ढेर ही ढेर नजर आए। इनके बीच ही कहीं फुंका हुआ टीवी पड़ा था, कहीं कूलर के अवशेष थे। रसोई गैस के सिलेंडर भी थे और बाइक के पुर्जे थे। मिट्टी के कच्चे घर थे। छतों की जगह छप्पर थे। लेकिन सुविधाएं तमाम थीं। ट्रकों में सामान आता था। सोलर सिस्टम से टीवी चलाए जाते थे। लाउडस्पीकर गूंजते थे। उद्यान विभाग के ट्यूबवेल से पाइप लाइन डाली गई , जो घरों तक जाती थी। 280 एकड़ का जवाहर बाग एक छोटी रियासत बन गया था और इसका मालिक था गाजीपुर का रहनेवाला रामवृक्ष यादव। उसने दो दिन के लिए प्रशासन से बाग में प्रवास की अनुमति मांगी थी , लेकिन इसे खाली नहीं किया। यह खाली हुआ ढाई साल बाद। वह भी तब जब मामला बहुत संगीन हो गया | पुलिस ने जवाहर बाग खाली कराने केबाद सर्च आपरेशन चलाया। यहां हथियारों का जखीरा मिला। अधबने हथियार भी मिले। तमंचों की नाले थीं, पाइप थे। माना जा रहा है कि अंदर ही हथियारों का कारखाना चल रहा था।बाग के अंदर सिर्फ रिहायश नहीं थी बल्कि कब्जाधारियों ने ट्रेनिंग सेंटर भी बना रखा था। आसपास के लोग बताते हैं कि यहां पर कुछ युवकों को हथियारों की ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें पेड़ पर चढ़ना और हमला करने के साथ-साथ बचाव के भी गुर सिखाए जाते थे। लोगों का कहना है कि डंडों और फरसों का प्रदर्शन तो अक्सर होता रहता था , लेकिन हथियार कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। ट्रेनिंग लेने वाले अधिकांश युवक ही होते थे। वास्तव में जवाहरबाग कांड ऐसा कांड है , जिसने देश में सुरक्षा प्रबंधों पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है | फिर भी देश भर में इन जैसी स्थितियों की जानकारी देशवासियों को नहीं है | अतः देश के शीर्ष मुस्लिम संगठन जमाअत इस्लामी हिन्द ने उत्तर प्रदेश सहित देश के सभी राज्यों और सभी केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक प्रमुखों से आर . टी . आई . एक्ट के अंतर्गत उक्त कांड से प्रसूत कुछ अहम जानकारियां मांगी हैं , जो देश में शांति , सुरक्षा और सलामती को बढ़ावा देनेवाली और नागरिकों को लाभ पहुंचानेवाली हैं | जमाअत के सहायक सचिव जनाब इन्तिज़ार नईम ने सभी राज्यों से जिन पांच प्रश्नों से संबंधित सूचनाएं मांगी हैं , वे इस प्रकार हैं - [ 1 ] क्या उनके प्रदेश में गैरक़ानूनी हथियार प्रशिक्षण केंद्र हैं और अगर हैं तो क्या वहां लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है ? [ 2 ] अगर किसी स्थान पर कोई हथियार प्रशिक्षण केंद्र है या हैं तो क्या वे सरकार द्वारा अधिकृत हैं या नहीं ? [ 3 ] अगर किसी ज़िले में ऐसे हथियार प्रशिक्षण केंद्र सरकार की मंज़ूरी के बिना अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं , तो इन्हें बंद कराने के लिए प्रशासन द्वारा क्या क़दम उठाए गए और इस प्रकार का गैर क़ानूनी काम करनेवालों के ख़िलाफ़ क्या कर्रवाई की गई ? [ 4 ] पिछले पांच वर्षों में प्रशासन को इस प्रकार के कितने हथियार प्रशिक्षण केंद्र या केन्द्रों के बारे में जानकारी मिली और इनके ख़िलाफ़ प्रशासन ने क्या कार्रवाई की ? [ 5 ] संबंधित राज्य में मथुरा के जवाहर बाग जैसे असामाजिक तत्वों और भू माफ़िया द्वारा सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण किया गया , जिसका विवरण देने का कष्ट करें ?


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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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