Jun 18, 2016

इस स्वागत योग्य ऐलान पर फ़ौरी अमल की ज़रूरत

इस स्वागत योग्य ऐलान पर
फ़ौरी अमल की ज़रूरत

मोदी सरकार का मुसलमानों के हितार्थ यह ऐलान स्वागत योग्य है कि बेक़सूर मुसलमानों की गिरफ़्तारी पर रोक लगाई जाएगी | केन्द्रीय कानून एवं न्याय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने अलीगढ़ में कहा कि मुसलमानों पर आतंकी होने के झूठे आरोप लगाना और बाद में सबूत न मिलने के अभाव में उन्हें छोड़ देना चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए कानून में सुधार किया जाएगा। लॉ कमिशन इन मामलों की कानूनी प्रक्रिया में बदलाव लाने के लिए रिपोर्ट तैयार कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के जज के नेतृत्व में यह रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके साथ ही कई कानून विशेषज्ञ भी रिपोर्ट को बनाने में मदद कर रहे हैं। सरकार के दो साल पूरा होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान श्री गौड़ा ने कहा कि आतंक के झूठे आरोपों के आधार पर मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार करना चिंता का विषय है। पिछले कई वर्षों से ऐसे मामले बार - बार सामने आते रहे हैं कि बेक़सूर मुसलमानों को जेल में डाल दिया जाता है और सामान्यतः लंबे समय के बाद अदालत उन्हें बेक़सूर बताते हुए रिहा कर देती है
यह पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का ' प्रिय खेल ' बना हुआ है | दिल्ली में मुहम्मद आमिर खान को 18 वर्ष की उम्र में गिरफ्तारी की गई थी और 14 वर्ष बाद जब वह 32 वर्ष का हुआ , तो उसे बेक़सूर क़रार देते हुए जेल से रिहा किया गया | इसी तरह उत्तर प्रदेश में लखनऊ से इकबाल को 2008 में पकड़ा गया और आठ साल बाद बेक़सूर मानते हुए रिहा कर दिया गया | बेगुनाही के ये दो ही नहीं , दर्जनों मामले हैं , लेकिन यह बड़े अफ़सोस और चिंता की बात है कि नाजायज़ गिरफ्तारी के लिए किसी को भी कोई मुआवज़ा नहीं दिया गया , जबकि मुसलमानों की ओर से इसकी सरकार से बार - बार मांग की जाती रही है |
कुछ समय पहले 'ख़ुफ़िया एजेंसियों की साम्प्रदायिकता और आतंकवाद' विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में में भूतपूर्व पुलिस अधिकारी एस.आर.दारापुरी ने खुलासा किया कि आई.बी. हो या ए.टी.एस., एस.टी.एफ. और स्पेशल ब्रांच सभी का तरीका यही है कि स्क्रिप्ट पहले लिखी जाती है और बाद में लोगों को उठाकर उसमें फिट कर दिया जाता है | यू.पी. प्रेस क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संभ्रांत लोगों और आतंकवाद के नाम पर होने वाली गिरफ्तारियों के प्रभावितों ने हिस्सा लिया | प्रभावित लोगों ने अपनी आपबीती बयान की तो दूसरी तरफ वक्ताओं ने स्पष्ट तौर पर कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियां सांप्रदायिक मानसिकता और भेदभाव की वजह से बेगुनाह मुस्लिम नवजवानों को गिरफ्तार करती हैं |
ए.टी.एस., एस.टी.एफ. के जवान महीनों तक पूछताछ के नाम पर घरवालों को परेशान करते हैं और फिर मौक़ा मिलते ही अपहरण के अंदाज़ में किसी को उठा लेते हैं | बाद में उन लोगों पर कई मामले दर्ज कर दिए जाते हैं , ताकि पूरी ज़िंदगी उनको ज़मानत न मिल सके | एक तीर से कई शिकार किये जा रहे हैं , जिसमें 'आउट ऑफ़ टर्न' प्रमोशन पाने के लिए 'गुड वर्क' की उपाधि प्राप्त करने और वाहवाही लूटने का घिनौना खेल भी शामिल है | इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस ने कहा कि मीडिया पुलिस और एजेंसियों के बयान को अपनी सतह पर जांच किये बगैर प्रकाशित और प्रसारित कर देता है | उन्होंने इस रवैये को 'मीडिया का मोतियाबिंद' का नाम दिया |

अवकाशप्राप्त पुलिस अधिकारी एस.एम.नसीम ने आरोप लगाया कि एस.टी.एफ.,
ए.टी.एस. और अन्य खुफिया एजेंसियों के लोग गैर कानूनी तौर से वसूली में संलिप्त हैं और रकम न मिलने पर लोगों को फंसा रहे हैं | उन्होंने बताया कि एक अस्पताल में लिंग की जांच के नाम पर वसूली करते उन्होंने खुद पकड़ा | एस.एम. नसीम ने कहा कि मुसलमानों की हमदर्द माने जाने वाले सरकारों में बेक़सूरों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है | किसी भी ऐरे गैरे को मास्टरमाइंड बताकर गिरफ्तार कर लिया जाता है और ज्यादा से ज्यादा केस उसके सर मढ़ दिये जाते हैं | यह सिलसिला बंद होना चाहिए | मंत्री महोदय के ऐलान को फ़ौरी तौर पर अमली जामा पहनाने की जरूरत है

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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