Mar 8, 2016

बेसिर - पैर के बयानों की बुरी लत

 बेसिर - पैर के बयानों की बुरी लत 

अभिव्यक्ति की आज़ादी की आड़ में सांप्रदायिकता और फासीवाद को बढ़ावा मिलना देश और समाज की शांति और सद्भाव के नितांत प्रतिकूल है | दुर्भाग्य से ऐसे बयान रहते हैं , जिनसे इंसानियत आहत होती है | अभी चंद दिन पहले उत्तर कन्नड़ से पांच बार के भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े पर मुसलमानों के खिलाफ टिप्‍पणी करने पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का मामला दर्ज किया गया है। हेगड़े ने गत 28 फ़रवरी को कर्नाटक के सिरसी में इस्लाम को आतंक के टाइम बम के रूप में बताया था और कहा था कि इसे खत्म किए जाने की जरूरत है। हेगड़े ने जेएनयू के गिरफ्तार छात्र उमर खालिद के पिता के बयानों को प्रसारित करने के लिए मीडिया पर आतंकियों की मदद करने का आरोप भी लगाया। हेगड़े के खिलाफ सिरसी थाने में धारा 295 (A) के तहत मामला दर्ज किया गया है। युवा कांग्रेस के दक्षिण कन्‍नड़ यूनिट के उपाध्यक्ष लुकमान बंटवाल की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया है। दक्षिण कन्नड़ के काजी अहमद मुसलियार ने राज्य सरकार से हेगड़े के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है , जबकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री यू टी खदेर ने गृह मंत्री जी. परमेश्‍वर से हेगड़े के खिलाफ संज्ञान लेने को कहा है।
पिछले दिनों एक केन्द्रीय मंत्री ने आगरा में विवादस्पद बयान दिया | मगर हमारे देश में नेता की प्रवृति ही ऐसी होती है कि एक दिन पहले जो कहते है, उसके दूसरे दिन उस बात से अक्सर मुकर जाते है। इसी का नमूना पेश किया केंद्रीय राज्यमंत्री राम शंकर कठेरिया ने। एक दिन पहले ही आगरा में अरुण माहौर की शोकसभा में पहुंचे कठेरिया ने आग उगलते हुए बदले का भाषण दिया, लेकिन अगले ही दिन कह दिया कि नहीं दिया था ऐसा बयान। कठेरिया ने कहा कि मेरे बयान के बारे में जो भी छपा है, वो पूरी तरह झूठ है। 
मैंने किसी समुदाय विशेष का नाम नहीं लिया। हांलाकि कठेरिया ने कबूला कि उन्होने कहा था कि हत्या करने वालों को फांसी दो। असत्य भाषण और सांप्रदायिक घृणा फैलाने के आरोप अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष कमलेश तिवारी पहले से ही जेल में बंद हैं | इस्लाम और मुसलमानों को जो लोग निशाना बनाते हैं , उन्हें भी यह पता होता है कि सत्य को झुठलाया नहीं जा सकता | इनमें से कुछ लोग ऐसे भी होते हैं , जो सत्य को बेझिझक स्वीकार कर लेते हैं | इनमें अनार्ड वॉन डूर्न भी शामिल हैं , जो नीदरलैंड की घोर दक्षिणपंथी पार्टी पीवीवी यानी फ्रीडम पार्टी के महत्वपूर्ण सदस्य रह चुके हैं | यह वही पार्टी है जो अपने इस्लाम विरोधी सोच और इसके कुख्यात नेता गिर्टी वाइल्डर्स के लिए जानी जाती रही है | इसके प्रमुख नेता अनार्ड वॉन डूर्न ने 2013 के मार्च में इस्लाम धर्म क़बूल करने की घोषणा की थी | नीदरलैंड के सांसद गिर्टी वाइल्डर्स ने 2008 में एक इस्लाम विरोधी फ़िल्म 'फ़ितना' बनाई थी | इसके विरोध में पूरे विश्व में तीखी प्रतिक्रियाएं हुईं थीं | अनार्ड पार्टी के मुसलमानों से जुड़े विवादास्पद विचारों के बारे में जाने जाते थे | तब वे भी इस्लाम विरोधी थे | वे कहते हैं, "उस समय पश्चिमी यूरोप और नीदरलैंड के बहुत सारे लोगों की तरह ही मेरी सोच भी इस्लाम विरोधी थी. जैसे कि मैं ये सोचता था कि इस्लाम बेहद असहिष्णु है, महिलाओं के साथ ज्यादती करता है, आतंकवाद को बढ़ावा देता है | पूरी दुनिया में इस्लाम के ख़िलाफ़ इस तरह के पूर्वाग्रह प्रचलित हैं | " साल 2008 में जो इस्लाम विरोधी फ़िल्म 'फ़ितना' बनी थी , तब अनार्ड ने उसके प्रचार प्रसार में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था | इस फ़िल्म से मुसलमानों की भावनाओं को काफ़ी ठेस पहुंची थी | वे बताते हैं, "'फ़ितना' पीवीवी ने बनाई थी | मैं तब पीवीवी का सदस्य था. मगर मैं 'फ़ितना' के निर्माण में कहीं से शामिल नहीं था| हां, इसके वितरण और प्रोमोशन की हिस्सा ज़रूर था | " हमारे देश के एक प्रमुख संत स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य जी ने भी जब सत्यता और वास्तविकता को समझा , तो उनकी विचारधारा पूरी तरह बदल गई | वे लिखते हैं , '' कर्इ साल पहले ' दैनिक जागरण ' मे श्री बलराज मधोक का लेख ‘दंगे क्यों होते हैं?’’ पढ़ा था। इस लेख में हिन्दू-मुस्लिम दंगा होने का कारण कुरआन मजीद में काफिरों से लड़ने के लिए अल्लाह के फरमान बताए गए थे। लेख मे कुरआन मजीद की वे आयते भी दी गर्इ थी। इसके बाद दिल्ली से प्रकाशित एक पैम्फलेट ‘कुरआन की चौबीस आयतें, जो अन्य धर्मावलम्बियों से झगड़ा करने का आदेश देती हैं’ किसी व्यक्ति ने मुझे दिया। इसे पढ़ने के बाद मेरे मन में जिज्ञासा हुर्इ कि मैं कुरआन पढूं। इस्लामी पुस्तकों की दुकान से कुरआन का हिन्दी अनुवाद मुझे मिला। कुरआन मजीद के इस हिन्दी अनुवाद मे वे सभी आयतें मिली, जो पैम्फलेट मे लिखी थी। इससे मेरे मन में यह गलत धारणा बनी कि इतिहास में हिन्दू राजाओं व मुस्लिम बादशाहों के बीच जंग में हुर्इ मार-काट तथा आज के दंगों और आतंकवाद का कारण इस्लाम हैं। दिमाग भ्रमित हो चुका था, इसलिए हर आतंकवादी घटना मुझे इस्लाम से जुड़ती दिखार्इ देने लगी। '' स्वामी जी आगे लिखते हैं कि '' इस्लाम, इतिहास और आज की घटनाओं को जोड़ते हुए मैने एक पुस्तक लिख डाली ‘इस्लामिक आतंकवाद का इतिहास’ जिसका अंग्रेजी अनुवाद ‘ The History Of Islamic Terrorism” के नाम से सुदर्शन प्रकाशन, सीता कुंज, लिबर्टी गार्डेन, रोड नम्बर-3, मलाड (पश्चिम), मुम्बर्इ-400064 से प्रकाशित हुआ। फिर मैने इस्लाम धर्म के विद्वानों (उलेमा) के बयानों को पढ़ा कि इस्लाम का आतंकवाद से कोर्इ सम्बन्ध नही हैं। इस्लाम प्रेम, सदभावना व भार्इचारे का धर्म हैं। किसी बेगुनाह को मारना इस्लाम धर्म के विरूद्ध हैं। आतंकवाद के खिलाफ फतवा (धर्मादेश) भी जारी हुआ। इसके बाद मैंने कुरआन मजीद में जिहाद के लिए आर्इ आयतों के बारे में जानने के लिए मुस्लिम विद्वानों से सम्पर्क किया, जिन्होने मुझे बताया कि कुरआन मजीद की आयतों भिन्न-भिन्न तत्कालीन परिस्थितियों में उतरी। इसलिए कुरआन मजीद का केवल अनुवाद ही न देखकर यह भी देखा जाना जरूरी हैं कि कौन-सी आयत किस परिस्थिति में उतरी, तभी उसका सही मतलब और मकसद पता चल पाएगा। साथ ही ध्यान देने योग्य हैं कि कुरआन इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) पर उतारा गया था। अत: कुरआन को सही मायने मे जानने के लिए पैगम्बर मुहम्मद(सल्ल0) की जीवनी से परिचित होना भी जरूरी हैं। विद्वानों ने मुझसे कहा, ‘‘ आपने कुरआन मजीद की जिन आयतों का हिन्दी अनुवाद अपनी किताब से लिया हैं, वे आयतें उन अत्याचारी काफिर और मुशरिक लोगो के लिए उतारी गर्इ जो अल्लाह के रसूल (सल्ल0) से लड़ार्इ करते और मुल्क में फसाद करने के लिए दौड़ते फिरते थे। सत्य धर्म की राह में रोड़ा डालनेवाले ऐसे लोगो के विरूद्ध ही कुरआन में जिहाद का फरमान हैं।’’ उन्होने मुझसे कहा कि इस्लाम की सही जानकारी न होने के कारण लोग कुरआन मजीद की पवित्र आयतों का मतलब समझ नहीं पाते। यदि आपने पूरे कुरआन मजीद के साथ हजरत मुहम्मद (सल्ल0) की जीवनी भी पढ़ी होती, तो आप भ्रमित न होते। मुस्लिम विद्वानों के सुझाव के अनुसार मैने सबसे पहले पैगम्बर हजरत मुहम्मद (सल्ल0) की जीवनी पढ़ी। जीवनी पढ़ने के बाद इसी नजरिए से जब मन की शुद्धता के साथ कुरआन मजीद शुरू से अन्त तक पढ़ा, तो मुझे कुरआन मजीद की आयतों का सही मतलब और मकसद समझ में आने लगा। '' स्वामी जी लिखते हैं , ''सत्य सामने आने के बाद मुझे अपनी भूल का एहसास हुआ कि मैं अनजाने में भ्रमित था और इसी कारण ही मैने अपनी उक्त किताब ‘इस्लामिक आतंकवाद का इतिहास’ में आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ा हैं जिसका मुझे हार्दिक खेद हैं। मैं अल्लाह से, पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) से और सभी मुस्लिम भाइयों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगता हूं तथा अज्ञानता मे लिखे व बोले शब्दों को वापस लेता हूं। जनता से मेरी अपील हैं कि ‘इस्लामिक आतंकवाद का इतिहास ' पुस्तक में जो लिखा हैं उसे शून्य समझें। ''

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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