Jan 14, 2016

ए एम यू भी निशाने पर ?

ए एम यू भी निशाने पर ?

क्या केंद्र सरकार चाहती है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का अब अल्पसंख्यक चरित्र न रहे ? केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी और गौरव शर्मा ने  सुप्रीमकोर्ट से 11 जनवरी 2016 को आग्रह किया है कि सरकार अपनी उस याचिका को वापस लेना चाहती है जिसमें उसने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक चरित्र को ख़त्म किये जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले को लगभग आठ वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी |  केद्र सरकार ने देश की शीर्ष अदालत से कहा है कि सेकुलर सरकार किसी धर्म विशेष के संस्थानों का पोषण नहीं कर सकती
इस मामले में केंद्र सरकार का यह यू टर्न खासकर मुसलमानों को हैरान - परेशान करनेवाला है | केंद्र सरकार के इस बदले हुए रुख से अदालत भी सहमत नहीं दिखी | उसने कहा कि सरकार अपना रुख ऐसे नहीं बदल सकती | यदि ऐसा ही था , तो उसने पहले यह अपील दाख़िल ही क्यों की थी ? अदालत ने कहा कि बिना सुनवाई के सरकार को यह याचिका को वापस नहीं लेने दिया जाएगा | इस मामले की सुनवाई अब अप्रैल 16 में होगी | जस्टिस एम वाई इक़बाल और जस्टिस सी नागप्पन की खंडपीठ से अटार्नी जनरल रोहतगी ने कहा कि इस मामले में वे कोर्ट को संतुष्ट करेंगे कि सरकार का पहले का रुख संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध था
 अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टीनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह का कहना है कि विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक चरित्र मौत और ज़िन्दगी का मामला है | भारतीय समाज में दबे - कुचले मुसलमानों की शिक्षा और उन्नति में इस विश्वविद्यालय की उल्लेखनीय भूमिका है | केंद्र के इस रुख से मुसलमानों में गंभीर चिंता पैदा हो गई है | सरकार अपने पिछले रुख से हट गई है | उन्होंने कहा कि हम अपने काज़ के लिए अदालत में लड़ेंगे | उल्लेखनीय है कि 2006 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया था कि यह विश्वविद्यालय संविधान के 30 [ 1 ] के तहत अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है , क्योंकि इसका सारा खर्च केंद्र सरकार उठाती है | इसलिए यह 50 फ़ीसद मुस्लिम छात्रों को आरक्षण नहीं दे सकती |केद्र सरकार और विश्वविद्यालय ने इसे चुनौती दी थी और अप्रैल 2008 में सुप्रीम कोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया था |
1920 में केन्द्रीय सरकार के कानून द्वारा इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कालेज सोसायटी और मुस्लिम युनिवर्सिटी फाउण्डेशन कमेटी ने अपने सारे अधिकार, चल-अचल सम्पत्ति सहित नए अधिनियम 1920 के विश्वविद्यालय एक्ट के अन्तर्गत भारत सरकार को सौंप दिए थे। इसे अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय का जामा सन् 1981 में इंदिरा गांधी ने 1920 के विश्वविद्यालय एक्ट में संशोधन कर पहनाया था। 
इसी संशोधन के आधार पर तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने गत 19 मई 2005 को विश्वविद्यालय के 36 परास्नातक विषयों में 50 प्रतिशत स्थान मुसलमानों के लिए आरक्षित किए। जिन विषयों में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया , उनमें एम.बी.ए., एम.डी.,एम.टेक., एमबीबीएस, एम.सी.ए.,एम.एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त 20 प्रतिशत सीटें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के स्नातकों के लिए एवं 5 प्रतिशत सीटें कुलपति के विवेकाधीन कोटे हेतु, कर्मचारी-अध्यापक एवं पूर्व छात्रों के बच्चों के लिए सुरक्षित हैं , जिनका मुसलमानों को फ़ायदा मिलता है
यह कोई असंवैधानिक प्रावधान नहीं था और न है मानव संसाधन विकास मंत्रालय में पूर्व संयुक्त सचिव सुनील कुमार विश्वविद्यालय को लिखे अपने पत्र में कहते हैं, "अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक्ट 1981 (संशोधित) का अधिनियम 5 (सी) विश्वविद्यालय को भारत के मुसलमानों के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक उन्नयन को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने के लिए निर्देशित करता है। सरकार मानती है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक पांथिक अल्पसंख्यक संस्थान है जो कि भारत के संविधान की धारा 30 (1) के द्वारा स्थापित एवं संचालित है। इसी के अनुसार मुझे यह भी कहना है कि विश्वविद्यालय की एमडी/एमएस/परास्नातक सीटों में उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा भारतीय मुसलमानों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान पर भी मंत्रालय को कोई आपत्ति नहीं है।" 
मई सन् 1873 में अलीगढ़ में मुसलमानों में अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार के लिए सर सैयद अहमद खां ने एक प्राइमरी पाठशाला की स्थापना की थी। नाम था "मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल स्कूल" जो आगे चलकर 1876 में एक हाईस्कूल के रूप में परिवर्तित हुआ। सन् 1877 में तत्कालीन वायसराय लार्ड लिटन ने इसे एक कालेज के रूप में चलाने के लिए नए भवन का शिलान्यास किया। कालांतर में सर सैयद अहमद खां द्वारा स्थापित इस कालेज को विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने की इच्छा को देखते हुए सन् 1911 से 1920 के मुस्लिम प्रतिनिधियों एवं भारत सरकार के मध्य कई दौर की वार्ता हुई। भारत सरकार ने अलीगढ़ विश्वविद्यालय को खोलने का निश्चय किया और बाकायदा विश्वविद्यालय एक्ट में इस सन्दर्भ में स्पष्ट नियम बनाए गए। (ए.एम.यू.एक्ट-1920, धारा 8)
भारत सरकार ने 1920 में संसद में कानून पारित कर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ किया। साथ ही इस्लामी अध्ययन के कुछ विशेष पाठ्यक्रमों को स्वीकृति दी गयी और इसके अल्पसंख्यक चरित्र को बरक़रार रखा | केद्र सरकार को चाहिए कि वह इस प्राचीन शिक्षण संस्थान के इस विशेष चरित्र को बनाये रखे |



About the Author

मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

0 comments:

Post a Comment