Dec 12, 2015

मसलमानों की तरक्की के लिए समान अवसर आयोग को बहाल किया जाए

मसलमानों की तरक्की के लिए समान
अवसर आयोग को बहाल किया जाए

अब किसी को शायद समान अवसर आयोग याद ही नहीं रहा , जबकि संप्रग सरकार की मनरेगा जैसी अनेक योजनाएं आज भी संचालित की जा रही हैं ! यह एक ऐसा आयोग था , जिससे किसी हद तक न्याय और तटस्थता की उम्मीद थी , मगर वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल के डेढ़ वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है ! सरकार की इस उदासीनता को लेकर तरह - तरह के सवालों का उठाना स्वाभाविक है | यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार अल्पसंख्यक कल्याण की ओर पूरी तरह गाफ़िल है और वह कोई ऐसा काम नहीं करना चाहती , जिससे मुसलमानों को सीधे तौर कोई फ़ायदा पहुंचे | मुसलमानों के सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन का अध्ययन करने वाली सच्चर समिति ने जिसने 2006 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी , समान अवसर आयोग गठित करने की सिफारिश की थी , जिसे तत्कालीन संप्रग सरकार ने मान ली थी और वर्षों बाद संप्रग [ भाग 2 ] के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20 फरवरी 2014 इस प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी थी | पिछले लोकसभा चुनाव से ऐन पहले केंद्र सरकार ने देश के अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले भेदभाव को दूर करने के लिए समान अवसर आयोग बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी । इससे संबंधित प्रस्ताव में कहा गया था कि यह एक वैधानिक निकाय होगा, जो नौकरियों, शिक्षा और आवासीय सोसायटियों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव की शिकायत सुनेगा और उसे दूर करने के उपाय करेगा। सच्चर समिति की सिफ़ारिशों के बाद क्रियान्वयन हेतु ए के एंटनी की अध्यक्षता में बने मंत्री समूह ने भी इसकी सिफारिश की थी । पहले इस आयोग के विरोधी यह आरोप और आशंकाएं प्रकट कर रहे थे कि इस तरह का आयोग बनाने से ऐसी ही दूसरी संस्थाओं के अधिकारों का अतिक्रमण होगा , लेकिन इन आपत्तियों को दरकिनार करके मंत्री समूह ने सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए समान अवसर आयोग बनाने की सिफारिश की, जिसे तत्कालीन केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूर कर लिया था । ऐसी बात भी नहीं है कि इस आयोग के गठन के सिलसिले में पूर्व कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के इरादे पाक - साफ़ थे | उसने जन - बूझकर इसके गठन का प्रस्ताव अपने कार्यकाल के अंतिम काल में किया , ताकि इसका राजनीतिक लाभ उठाया जा सके | जबकि जून 2009 में ही संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने कहा, "सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण को उच्चतम प्राथमिकता देना जारी रखेगी। अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री ने 15 सूत्री कार्यक्रम और सच्चर कमेटी की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई कुछ सीमा तक सरकार संसाधनों, नौकरियों और योजनाओं में अल्पसंख्यकों के लिए न्यायोचित हिस्सा सुनिश्चित करने में सफल रही है।" उन्होंने कहा था , "अल्पसंख्यकों के कल्याण की दिशा में उठाए जा रहे कदमों को और सुदृढ़ किया जाएगा। सरकार वक्फों के प्रशासन को सुदृढ़ करने और आधुनिक बनाने के लिए प्रयास करेगी, हज संचालन के प्रबंधन में सुधार लाएगी और एक सामन अवसर आयोग स्थापित करेगी।" ज़ाहिर है , समान सुधार के नेक काम में जब क्षुद्र राजनीति की अवांछित घुसपैठ हो जाती है , तो उसका जो हश्र होता है , समान अवसर आयोग के साथ भी हुआ | अतः यह बहुत ज़रुरी है कि राजनीति की क्षुद्रता से ऊपर उठकर समान अवसर आयोग को फ़ौरन बहाल किया जाए |

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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