Dec 30, 2015

कम हुआ नहीं लगता देश का भ्रष्टाचार

कम हुआ नहीं लगता देश का भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार के नित नये मामलों का आना इस बात का सबूत है कि भ्रष्टाचारी किसी सरकार ने नहीं डरते ! न ही केजरीवाल से और न ही मोदी से | दिल्ली सरकार की नाक के नीचे ऑटो परमिट का घोटाला आप वाले झेल ही रहे हैं , वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के जेटली समेत कुछ मंत्री आरोपों के घेरे में हैं | भाजपा शासित राज्य भी इससे अछूते नहीं हैं | पिछले दिनों मध्‍य प्रदेश में लोकायुक्‍त पुलिस की छापेमारी में एक हेड कॉन्‍स्‍टेबल के पास 5 घर, 6 प्‍लॉट, 3 कार, एक एसयूवी गाड़ी समेत करोड़ों की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त पुलिस ने आरटीओ विभाग में तैनात हेड कॉन्स्टेबल अरुण सिंह के इंदौर, रीवा, सतना और जबलपुर स्थित ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में की गई थी। अरुण सिंह जिस घर में रहता है अकेले उसी की कीमत एक करोड़ रुपए बताई जा रही है | अरुण सिंह के इंदौर स्थित घर से अन्नपूर्णा नगर स्थित तीन मंजिला मकान, तलावली चांदा कॉलोनी में दो प्‍लॉट के कागजात बरामद हुए हैं। इसके अलावा एक स्‍कॉर्पियो और बैंक में लॉकर के दस्‍तावेज भी लोकायुक्‍त पुलिस के हाथ लगे हैं। अरुण सिंह के पास से कुल संपत्ति के जो दस्‍तावेज मिले हैं, उनमें इंदौर के अन्नपूर्णा इलाके में तीन मंजिल मकान, 6-6 हजार स्‍क्‍वायर फीट के दो प्लॉट पत्नी के नाम, इंदौर में बेटे के नाम पर दो फ्लैट, रीवा में 30 एकड़ जमीन, रीवा में 8-8 हजार स्‍क्‍वायर फीट के दो प्लॉट, रीवा में दो मकान, स्कॉर्पियो सहित तीन कार, और 8 बैंक अकाउंट समेत कुछ लॉकर शामिल हैं | यह मध्य प्रदेश की पहली घटना नहीं है | चिंताजनक बात यह है कि भ्रष्टाचारियों के पकड़े जाने के बाद भी कोई शिक्षा नहीं ग्रहण करता ! दूसरी ओर भ्रष्टता सूची में देश के पायदान का घटना कोई विशेष उपलब्धि नहीं मानी जा सकती , क्योंकि जो टेम्पो केजरीवाल और मोदी के आह्वान से बना था , उसे बिना कार्यरूप दिए अधिक समय तक बरक़रार नहीं रखा जा सकता |
भ्रष्टाचार विरोधी संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की भ्रष्ट देशों की ताजा सूची में कुल 175 देशों के नाम हैं | सूची में भारत को 85वां स्थान मिला है जो सांत्वना का विषय ज़रूर हो सकता है | इस संगठन की 2011 की भ्रष्टता सूची में भारत 95 वें पायदान पर था , जबकि इससे पहले 79 वें पायदान पर था , लेकिन इस घट - बढ़ में भ्रष्टाचार का चलन कम नहीं हुआ है , बल्कि इसका तरीक़ा बदल गया | भ्रष्टाचार विरोधी तेवरों के बावजूद इस पर रोकथाम के प्रयास नगण्य हैं , बल्कि ऐसे लोगों को बचाया भी जाता है | केन्द्रीय सत्ता में आने से पहले से ही काले धन को जिस तरह मोदी ने अपना बड़ा मुद्दा बनाया , उससे भी इस सोच को बल मिला कि नई सरकार भ्रष्टाचार और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगी | सरकार बनते ही उन्होंने न्यायालयों से भ्रष्ट नेताओं पर चल रहे मामलों की फास्ट ट्रैक सुनवाई करने की अपील की , मगर दूसरी ओर, इस पर भी गौर किया जाना चाहिए कि वर्तमान कैबिनेट में तमाम आपराधिक मामलों में आरोपित लोगों की तादाद पुरानी कांग्रेस सरकार के दागी मंत्रियों से करीब दोगुनी है | 66 सदस्यीय वर्तमान कैबिनेट के करीब एक तिहाई मंत्री आपराधिक धमकी, धोखाधड़ी , तो कुछ दंगा भड़काने और बलात्कार जैसे गंभीर आरोपों में घिरे हैं | लोकपाल भी अभी तक हवा में हैं | आप के लोकपाल को भी मोदी सरकार ने रोककर क़ानूनी दांव - पेंच के हवाले कर दिया है और केजरीवाल सरकार को निबटाने पर पूरा ज़ोर लगा रखा है | भ्रष्टाचार विरोधी क़ानून में उचित संशोधन करने के साथ ही लोकपाल जैसी व्यवस्था को लागू करने से भ्रष्टाचार पर रोकथाम में काफी मदद मिल सकती है | आर्थिक विकास से ही भ्रष्टाचार उन्मूलन - संभव नहीं | 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भ्रष्टाचार को वैश्विक चलन कहा था | इस वक्तव्य के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री के ऐसी बात करने पर खेद जताया था | 
1989 के लोकसभा चुनाव में भ्रष्टाचार का मुद्दा छाया रहा | तबसे लेकर आज तक चुनावी अभियानों में भ्रष्टाचार मिटाने के दावे बढ़चढ़ कर उछाले जाना आम बात हो गई है | ऐसे में इन दावों की कलई तब खुलती है , जब भारत सूची में बुर्किना फासो, जमैका, पेरु और जाम्बिया जैसे गरीब देशों के पायदान जैसा पाया जाता है | वस्तुस्थिति यह है कि आज हमारा देश भ्रष्टाचार और नैतिक पतन से गंभीर रूप से जूझ रहा है | भ्रष्टाचार पूरी व्यवस्था को चाट रहा है | जब तक इन्सान के नैतिक अस्तित्व को सबल नहीं बनाया जाएगा और उसके अंदर ईशपरायणता एवं ईशभय नहीं पैदा होगा , तब तक भ्रष्टाचार - उन्मूलन असंभव है | पूरी सृष्टि में केवल इन्सान ही ऐसा प्राणी है , जिसे कर्म और इरादे का अधिकार प्राप्त है | वह ईश्वर द्वारा स्रष्ट सभी जीवों और चीजों में सर्वश्रेष्ठ है , अतः सृष्टि की बहुत - सी चीज़ें उसके वशीभूत की गई हैं , जिनका वह अधिकारपूर्वक उपभोग करता है और कर सकता है | उहाँ यह तथ्य भी स्पष्ट रहे कि इन्सान के न तो अधिकार असीमित हैं और न ही उपभोग | उसके लिए भी एक सीमा - रेखा है , जिसे मर्यादा कहते हैं | यह चीज़ ही इन्सान को नैतिक अस्तित्व प्रदान करती है | मर्यादा और नैतिक अस्तित्व को बनाये रखने के लिए ही सदाचरण के द्वारा इन्हें परिमार्जित करने एवं जीवन को उच्चता की ओर ले जाने के लिए इन्सान को आध्यात्मिकता की ज़रूरत होती है , जो उसके जीवन की नैसर्गिक , बुनियादी और अपरिहार्य आवश्यकता है | अतः भ्रष्टाचार - निवारण के लिए अनिवार्य है कि इन्सान अपने स्रष्टा - पालनहार की ओर पलटे और उसका आज्ञाकारी और ईशपरायण बने |

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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