Nov 28, 2015

मज़दूरी हड़पने की नई कूट रचना , रेंजर के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग

मज़दूरी हड़पने की नई कूट रचना , रेंजर के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग

सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग , बलरामपुर [ उत्तर प्रदेश ] का बनकटवा रेंज भ्रष्टाचार और अनियमितता का केंद्र बन गया है | यहाँ के रेंजर बी डी राय ने हाल में ही एक दर्जन से अधिक मनरेगा मजदूरों की वर्षों से लंबित हज़ारों रूपये की मज़दूरी को हड़पने के लिए एक ही दिन में फर्जी तौर पर कागज़ी प्रक्रिया पूरी करने का नया कारनामा अंजाम दिया है ! उल्लेखनीय है कि मजदूरों से 13 जनवरी से 26 मार्च 2014 के बीच विभिन्न अवधियों में वृक्षारोपण और झाड़ी की सफ़ाई के काम कराये थे | कुछ मज़दूरों से दो - ढाई महीने तक काम कराये गये , लेकिन अब तक मज़दूरी का भुगतान नहीं किया गया है और फर्जी तौर पर दूसरों के नाम मजदूरी की रक़म डलवाकर ऐंठ ली गई |
' कान्ति ' [ साप्ताहिक ] के 13 सितंबर 15 के अंक में प्रकाशित ' वाचर ने दिया पुख्ता सबूत , मज़दूरी देने से बलरामपुर वन प्रभाग अब कैसे करेगा इन्कार ? ' शीर्षक रिपोर्ट के बाद भ्रष्ट वन अधिकारियों और कर्मचारियों को दिन में तारे नज़र आने लगे | उन्होंने मज़दूरी हड़पने का नया दुष्चक्र रचा र झूठे तौर पर यह बताने की कोशिश की , मज़दूर अपनी मज़दूरी को लेकर रेंजर के सामने गिडगिडाने और याचना करने नहीं आए | उल्लेखनीय है कि ये मज़दूर पिछले लगभग डेढ़ वर्ष वन विभाग के अधिकारियों से लेकर अन्य संबंधित उच्च अधिकारियों से लिखित रूप में फ़रियाद कर चुके हैं , मगर उनकी फ़रियाद नहीं सुनी जा रही है | आरोप है कि वन अधिकारी मिल - बाँटकर पहले ही मज़दूरी हड़प चुके हैं और अब अपनी नौकरी बचाने के लिए नियम - क़ानून को ताक पर रखकर तरह - तरह की कूट - रचना और बहानेबाजियों का सहारा ले रहे हैं , जिसके चलते वे अपने ही द्वारा बुने गए जाल में बुरी तरह फंसते नज़र आ रहे हैं |
बनकटवा के रेंजर बी डी राय जो मज़दूरी देने के इस मामले में पहले ही निष्पक्षता का परिचय न देकर मजदूरों पर सवालिया निशान लगा चुके हैं , इस बार मुख्य शिकायतकर्ता मज़दूर केशव राम को डरा - धमकाकर 15 अक्तूबर 2015 को अपने फारेस्ट गार्ड मालिक राम से द्वारा एक कागज़ भेजकर उस पर दस्तखत करवा लिया , जिस पर रेंजर की ओर से लिखा गया था कि 14 अक्तूबर 15 को मज़दूरी के बारे में जो कहना है वह अपने साथियों के साथ आकर कहो , मानो मजदूरों ने अपनी गाढ़ी मेहनत से कमाई मज़दूरी के बारे में पहले कुछ कहा ही न हो | इस कागज़ में यह भी लिखा था कि यदि इस दिन नहीं आते तो मान लिया जाएगा कि मजदूरों को अपनी मज़दूरी के सिलसिले में कुछ नहीं कहना है | यह भी झूठी बात लिखी गई कि सप्ताह भर के भीतर दो बार फारेस्ट गार्ड मालिक राम द्वारा मजदूरों को मौखिक रूप से बुलाया गया था | उल्लेखनीय है कि मालिक राम अब भी मजदूरों से कहता है कि रेंजर राय जल्द ही बुलाएँगे , तब उनसे मिलने आप लोग चलना | इसी तरह की बात उसने केशव राम से दस्तखत कराने के समय कही थी | पता चला है कि पूर्व फारेस्ट गार्ड नुरुल हुदा भ्रष्टाचार के खेल के अपने एक गुर्गे राम किशुन के साथ रेंजर की जी - हुजूरी में लगा है |
ज़ाहिर है ,मजदूरों की अज्ञानता और भोलेपन के कारण ही मजदूरों से उक्त गैर कानूनी बर्ताव किया गया और और उनकी मज़दूरी हड़पने की एक बार फिर कोशिश की गई ! रेंजर द्वारा हाज़िरी तिथि के एक दिन बाद यानी 15 अक्तूबर की शाम को केशव राम से दस्तखत लेना अपने आम में जुर्म की श्रेणी में आता है और यह समग्र छल - छद्म , फ्राड और भयाक्रांत की कार्रवाई से परिपूर्ण है | यह उत्तर प्रदेश श्रमिक शिकायत निवारण तंत्र नियमावली के बिलकुल विपरीत कार्रवाई है , जो 24 सितंबर 2009 से प्रदेश में लागू है | रिहाई मंच , लखनऊ के सीनियर लीडर राजीव यादव ने रेंजर बी डी राय के ख़िलाफ़ जाँच और कार्रवाई की मांग की है | उन्होंने कहा कि डरा - धमकाकर इन छिछोरी फर्ज़ी कागज़ी कारस्तानियों के सहारे मज़दूरी नहीं हड़पी जा सकती | वर्षों तक यह मामला जीवंत रहेगा , जब तक मजदूरों को मज़दूरी नहीं मिल जाती | नियम - क़ानून को धता बताकर भ्रष्टाचार की गंगा बहानेवाले ढीठ , दुस्साहसी अधिकारी - कर्मचारी कभी बख्शे नहीं जाएंगे |

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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