Oct 24, 2015

सांप्रदायिकता एवं फासीवाद - भारतीय समाज के दो बड़े शत्रु

सांप्रदायिकता एवं फासीवाद - भारतीय समाज के दो बड़े शत्रु


देश में सांप्रदायिकता और फासीवाद का बढ़ता रुझान बहुत चिंताजनक और आत्मघाती है | उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर स्थित दादरी के बिसहड़ा गांव में पिछले दिनों जो कुछ घटित हुआ , वह इस कुप्रवृत्ति का जीवंत उदाहरण है | वैसे पिछले कुछ समय से ऐसी घटनाएं घटित होती रही हैं , जिनसे साफ़ पता चलता है कि देश में ऐसे लोग मौजूद हैं , जो हिंसा , अराजकता और स्वेच्छाचारिता पर यक़ीन रखते हैं और जिन्हें शासन के विधि - विधान के प्रति कोई दायित्व - बोध नहीं है | बिसहडा में जो निंदनीय घटना घटी , वह इसी मानसिकता का एक नतीजा है | गोहत्या की झूठी खबर फैलाकर मुहम्मद अखलाक़ की जान ले गई | वरिष्ठ पत्रकार स्वामीनाथन एस . अंकलेश्वर अय्यर लिखते हैं , '' एक बीफ खाने वाले हिंदू के तौर पर मैं दादरी में मुहम्मद अखलाक के घर में बीफ रखा होने की अफवाह के बाद उनकी हत्या किए जाने से बेहद परेशान हूं। इससे भी दुखद बीजेपी के नेताओं की ओर से हत्या को साफ रंग देने का प्रयास है। ....यह दावा कि सभी हिंदू गोहत्या का विरोध करते हैं, गलत है। हां, आज ताकतवर उच्च जातियां बीफ के खिलाफ है, लेकिन दलित और जनजातियां हमेशा से बीफ खाती रही हैं। दलित आदिवासी बहुजन एंड माइनॉरिटी स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन धारावाथ कहते हैं, 'दलित समुदाय के लिए बीफ प्रोटीन का सबसे सस्ता स्रोत रहा है।' ....लेकिन मैं भवभूति के नाटक के आधार पर ही यह भी दावा करता हूं कि बीफ खाने का अधिकार प्राचीन हिंदू परंपरा का हिस्सा रहा है। एक ब्राह्मण के तौर पर मैं वशिष्ठ मुनि के पदचिह्नों पर खुशी से चल रहा हूं। ' [ नभाटा , नई दिल्ली , 5 अक्तूबर 2015 ] | घर में गोमांस रखने की अफ़वाह फैलाकर अखलाक़ की हत्या का कोई कैसे औचित्य ठहरा सकता है ? पुलिस द्वारा मांस को जाँच के लिए भेजना एक अवैधानिक कार्रवाई है , क्योंकि क़ानून में मांसाहार पर कोई रोक नहीं है | इस घटना के विरोध में केरल के तिरुवनंतपुरम में बीफ़ पार्टी का आयोजन उल्लेखनीय है , जो बयान आ रहे हैं , वे भी सांप्रदायिकता व फासीवादी मानसिकता पर चोट करते हैं , जो समय की बड़ी मांग है | सुप्रीमकोर्ट के सेवानिवृत जज मार्कण्डेय काटजू का कहना है कि '' वे गोमांस खा चुके हैं और मौका मिलेगा तो फिर खाएंगे। उन्होंने कहा कि गोहत्या पर पाबंदी की मांग सिर्फ राजनीतिक है और ऐसा किए जाने से विदेशों में भारत की छवि खराब होगी। उन्हें हमारे ऊपर हंसने का मौका मिलेगा। हाल में महाराष्ट्र और हरियाणा में गोमांस पर प्रतिबंध लगाया गया था। उन्होंने गोमांस के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि यह सस्ते प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है। नगालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और केरल में गोमांस की बिक्री पर रोक नहीं है। काटजू का कहना है, "गोहत्या के खिलाफ शोर मचाने वाले लोगों को उन गायों की भी फिक्र करनी चाहिए, जिन्हें ठीक से खाना नहीं मिलता है। मैंने गायों को कचरा खाते हुए देखा है।" उन्होंने कहा, "दुनिया में ज्यादातर लोग गोमांस खाते हैं। क्या वे सभी लोग पापी हैं? मुझे गोमांस खाने में कुछ गलत नहीं दिखता।" दादरी की घटना पर अंग्रेजी की मशहूर पत्रकार एवं लेखिका शोभा डे ने काफ़ी तंज़ भरे अंदाज़ में ट्वीट किया की '' मैंने अभी - अभी गोमांस खाया है , आओ मुझे मार डालो | '' 
उधर उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री आजम खान ने गोमांस के निर्यात पर पाबंदी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा | उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ''अगर सरकार को गोमांस खाने पर पाबंदी लगानी है तो सबसे पहले गोमांस के निर्यात पर रोक लगाने की जरूरत है।'' इस घटना की आड़ में जो सांप्रदायिकता फ़ैलाने की कोशिश करे , उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई अवश्य की जानी चाहिए | इस सिलसिले में विभिन्न वक्तव्यों में घटना के कथित पक्षकारों के कई निंदनीय उद्गार भी सामने आए हैं | आइए कुछ सांप्रदायिक और फासीवादी वक्तव्यों पर भी एक नज़र डालते हैं -
वीएचपी के प्रवक्ता विनोद बंसल का कहना है कि ऐसे लोग हिन्दू के नाम पर अभिशाप है और हिंदू जीवन पद्धति को अपमानित कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह के बयान देकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश की जा रही है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ये लोग कानून का उल्लंघन कर रहे हैं और उनके खिलाफ कारर्वाई करने की जरूरत है। केन्द्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा का दावा है कि यह महज एक 'घटना' थी। पूर्व विधायक नवाब सिंह नागर कहते हैं कि जिन लोगों ने ताकतवर ठाकुरों की भावनाओं को आहत करने की हिम्मत की है, उन्हें इसके अंजाम का अहसास भी होना चाहिए। वे दावा करते हैं कि हत्या करने वाली भीड़ में 'मासूम बच्चे' भी हैं, जिनकी उम्र 15 साल से कम है। कई भाजपा नेता मुसलमानों पर गोमांस खाने का आरोप लगाते हैं। विचित्र तोमर चाहते हैं कि गाय के हत्यारों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए, न कि मुसलमानों का कत्ल करने वालों को। श्रीचंद शर्मा कहते हैं कि ''यदि मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदुओं की भावनाओं को आहत करते हैं तो हिंसा अवश्यंभावी है।'' ज़ाहिर है , ये वक्तव्य घोर आपत्तिजनक और सांप्रदायिक सद्भाव के नितांत विरोधी हैं | इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पीड़ित परिवार का सहयोग करके अच्छा कार्य किया है | उन्होंने पीड़ित परिवार को कुल 45 लाख का मुआवजा दिया। मुख्यमंत्री ने इसके पहले परिजनों को 20 लाख रुपए की मदद देने की घोषणा की थी। विगत 4 अक्तूबर 15 को उन्होंने अखलाक के तीन भाइयों को भी पांच-पांच लाख रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीनों भाइयों की माली हालत बेहद खस्ताहाल होने की वजह से उन्हें मदद देने का फैसला किया गया है। घटना में गंभीर रूप से घायल अखलाक के पुत्र का इलाज सरकारी खर्च पर कराने की घोषणा करते हुए अखिलेश यादव ने भरोसा दिलाया कि किसी भी हाल में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा का यदि व्यावहारिक क्रियान्वयन किया गया , तो निश्चय ही देश में जान - बूझकर पनपायी जा रही सांप्रदायिकता पर अवश्य रोक लगेगी | ज़रूरत इस बात की है कि सांप्रदायिकता और फासीवाद के विरुद्ध एक मज़बूत लड़ाई लड़ी जाए |

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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