Sep 17, 2015

अलीगढ़ की घटना से सबक़


13 सितंबर 2015 ... सुबह का वक्त .... अलीगढ़ के थाना जवां क्षेत्र के गांव कस्तली के पास गोकुशी की घटना की ख़बर पाकर आसपास के कई गांवों के लोग भड़क गए। 21 गायों को काटने की बात कही गई | नतीजतन गोकुशी के आरोपियों के मैक्स लोडर व बाइक को आग लगा दी।निजी बस समेत कई वाहनों में तोड़-फोड़ की। पुलिस के खदेड़ने पर हमलावर हुई भीड़ ने पथराव कर दिया जिसमें एसपी देहात समेत कई पुलिसकर्मी चोटिल हो गए।भीड़ ने थाने का घेराव कर खरी-खोटी भी सुनाई।पुलिस ने गोकशी के आरोप में दोमहिलाओं समेत 11 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है |
11 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा-सुमेरा गांव के धनंजय शर्मा पुत्र रामवीर शर्मा की तहरीर पर पुलिस ने डल सिंह पुत्र छौजी सिंह, विजय सिंह पुत्र सोजी सिंह निवासी देवली टोंक, विजय सिंह पुत्र नन्नू सिंह निवासी प्रतापनगर कालोनी थाना देवली टोंक, राम सिंह पुत्र नन्नू सिंह, मोहर सिंह पुत्र विजय सिंह देवली टोंक, दुर्गा पुत्र रत्‍‌ना निवासी ढावा देव थाना मोदक कोटा, शरमा पुत्र विजय सिंह निवासी देवली टोंक, शोभा पुत्र नक्कू निवासी देवली टोंक, मोहनलाल उर्फ शरमा पुत्र अमर सिंह व काली देवी पत्नी डल सिंह देवली, प्रेमाबाई पत्‍‌नी विजय सिंह देवली टोंक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।सभी आरोपी राजस्थान के हैं उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।
लापरवाही और ढिलाई बरतने के आरोप में इंस्पेक्टर रामदरश यादव, दारोगा दिनेश कुमार, सिपाही सुरेंद्र सिंह, विमल कुमार, शोभाराम, सुरेश सिंह व अवधेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्राप्त विवरण के अनुसार , घटना कर दिन सुबह छह बजे जवां पुलिस को सूचना मिली कि गांव कस्तली में कासिमपुर पावर हाउस के एश डंप यार्ड के पास कुछ गायों को ज़िबह कर दिया गया है।यह खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई।आसपास के गांव फरीदपुर, पला, सुमेरा व छेरत, अमरौली, मंजूरगढ़ी से भीड़ भी जा पहुंची।लोगों ने देखा कि कुछ लोग मैक्स लोडर में मीट लादकर भाग रहे हैं तो उन्हें रोक लिया।लोडर व उनकी एक बाइक में आग लगा दी।पुलिस ने भीड़ को खदेड़ दिया।जवाब में भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया।तब तक एसपी देहात संसार सिंह ने कई थानों की पुलिस के साथ जा पहुंचे।पथराव में एसपी देहात संसार सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी, अमरौली चौकी इंचार्ज अवनीश चंद्र दुबे सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
गोकशी की घटना के विरोध में जवां का बाजार बंद रहा।लोगों ने तीन जगह जाम लगाकर प्रदर्शन किया।प्राइवेट बस समेत कई वाहनों के शीशे तोड़ दिए। जाम-प्रदर्शन में भाजपाइयों समेत बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठनों के लोग भी मौजूद रहे। यह हमारे देश की पहली घटना नहीं है , बल्कि ऐसी घटनाएं आए दिन घटती हैं और बदअमनी पैदा करती हैं | इससे देश का सामाजिक ताना - बाना बिगड़ता है | कानूनन उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में गोकुशी पर पाबंदी है , फिर भी ऐसी घटनाओं का घटित होना यकीनन चिंता और तशवीश की बात है |
यह भी सच है कि पाबंदी के मामले में धार्मिकता की जगह राजनितिक पुट अधिक देखा जाता है | वैसे देखा जाए तो बीफ मुख्यत: गरीबों का भोजन है, चाहे उसका कोई भी धार्मिक संबंध हो। इसके अलावा इसके जरिए गरीबों को सबसे सस्ते में प्रोटीन मिल जाता है। सरकारी आंकड़े खुद यह बताते हैं कि गैर शाकाहारी भोजन में बीफ सामान्यत: अधिक खाया जाता है। यूनाइटेड नेशंस फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में जो सबसे अधिक मांस खाया जाता है वह बीफ है।
पश्चिम बंगाल और केरल में गोमांस गैरकानूनी नहीं है। हिंदुओं की ऐसी बहुत बड़ी संख्या है जो गोवंश का गोश्त खाती है। दक्षिण केरल में सभी समुदायों, जिसमें हिंदू भी शामिल हैं, द्वारा जितना गोश्त खाया जाता है उसमें आधा हिस्सा बीफ का होता है। साफ है कि बीफ गरीबों का भोजन है जिसे केवल मुसलमान ही नहीं खाते हैं। वर्तमान में केरल में 72 समुदाय ऐसे हैं, जिनमें सभी अछूत नहीं हैं, जो महंगे बकरे के गोश्त के बजाय गोवंश के जानवरों के गोश्त को ज्यादा तरजीह देते हैं। अतः इसे लेकर हिंसा , तनाव उत्पन्न करना हर दृष्टि से निंदनीय - भर्त्सनीय है |

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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