Aug 13, 2015

पोर्नोग्राफी और पोर्न साइटों पर लगे पूर्ण प्रतिबन्ध

पोर्नोग्राफी और पोर्न साइटों पर लगे पूर्ण प्रतिबन्ध 

भारत में बढ़ती पोर्नोग्राफी और पोर्न के इंटरनेट उपयोग के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों  सुनवाई की। मध्यप्रदेश की इंदौर हाईकोर्ट के वकील कमलेश वासवानी द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर कार्रवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि पूरी तरह से पोर्न साईट्स को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है हालांकि बच्चों के पोर्न को ब्लाॅक करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। कोर्ट ने सरकार को आदेश देकर बच्चों की 850 पोर्न बेव साइटें बंद कराने को कहा | दूसरी ओर शील - शुचिता की बार - बार बात और दुहाई देनेवाली , जिनमें पोर्न बेवसाइटों और ब्लू फिल्मों पर रोक की बात शामिल है , केंद्र सरकार ने गत चार अगस्त 15 को कहा कि वह आठ सौ से अधिक बेव साइटों पर लगी आंशिक प्रतिबन्ध हटाने जा रही है ! जिसका मतलब यह हुआ कि सरकार पोर्न साइटों पर रोक के सिलसिले में गंभीर नहीं है | सुप्रीमकोर्ट ने  कहा कि यह किसी की निजता और व्यक्तिगत आजादी का उल्लंघन है। मामले में कोर्ट ने पोर्न साइटों के उपयोग को रोकने की बात को नकारते हुए कहा है कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 में वर्णित मौलिक अधिकार का हनन है। मिली जानकारी के अनुसार कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि इस मसले पर वयस्क और अवयस्क का सवाल उठ सकता है। यही नहीं जिस देश में ' कामसूत्र ' की रचना की गई हो वहां, व्यक्तिगत आजादी सर्वोपरि होना जरूरी है। तीन न्यायाधीशों की बेंच की अध्यक्षता करते हुए मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू द्वारा कहा गया है कि इंटरनेट पर ब्लू फिल्म उपलब्ध हैं और कामुकता व्यक्ति की इच्छा है, हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि महिलाओं और बच्चों के विरूद्ध अधिकांश अपराध इसी तरह की पोर्न साईट्स से होते हैं। कोर्ट ने कहा कि आखिर यदि कोई व्यक्ति घर की चारदीवारी में पोर्न साईट देखता है तो उसे कैसे रोका जा सकता है। हालांकि सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए उत्तरों से न्यायालय संतुष्ट नहीं है ,लेकिन माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू द्वारा पोर्न साईट रोकने को लेकर असंतोष जताया। सुप्रीम कोर्ट के पोर्न साईट पर बैन के निर्देश पर केंद्र सरकार ने दलील दी कि पोर्न की सभी वेबसाइट को प्रतिबंधित करना संभव नहीं है। वहीँ केंद्र ने यह भी कहा कि पोर्न पाबंदी से नुकसान भी हो सकता है , क्योंकि फिर ऐसे शब्दोंवाली साहित्यिक सामग्री लोगों को इन्टरनेट पर उपलब्ध नहीं हो सकेगी। जस्टिस बी एस चौहान की अध्यक्षता वाली बेंच को सरकार की तरफ से जनरल विश्वानाथन ने कहा है कि इस तरह की वेबसाइट बंद करने से अच्छे साहित्य का  मिलना भी मुश्किल हो जायेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी वेबसाइट बंद करने के लिए कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर लगाने होंगे जिसके लिए सॉफ्टवेयर कंपनी के निर्माताओं को सॉफ्टवेयर लगाने के निर्देश देने होंगे।
 इंदौर निवासी वकील कमलेश वासवानी की जनहित याचिका के अनुसार इस समय बाजार में बीस करोड़ से भी अधिक क्लिपिंग आसानी से उपलब्ध हैं। श्री वासवानी कहते हैं, "पोर्न देखने के बाद लोग बच्चों और महिलाओं का बलात्कार करते हैं | कई बार बलात्कार कांड के अभियुक्तों ने कहा है कि उन्होंने पोर्न देखने के बाद ही वारदात को अंजाम दिया था |" उनके मुताबिक़, "कुछ ने यह भी माना है कि पोर्न देखने से उन्हें बलात्कार करने की प्रेरणा मिली | इसलिए पोर्न साइट पर रोक लगा दी जानी चाहिए | "वासवानी ने यह भी कहा कि सरकार ने पहले तो साफ़ कह दिया था कि पोर्न साइट को ब्लॉक करना तकनीकी रूप से मुमकिन ही नहीं है | उन्होंने अदालत में कहा कि सभी न सही, कुछ बड़े और आसानी से लोगों की पंहुच में आने वाले साइट तो ब्लॉक किए ही जा सकते हैं |उन्होंने 850 साइट की एक सूची अदालत को सौंपी और सरकार उन्हें ब्लॉक करने पर राज़ी हो गई| वे इस तर्क को ख़ारिज करते हैं कि अपने घर में बैठ कर पोर्न देखने में कोई बुराई नहीं है | उनका तर्क है कि जब घर में बैठ कर ड्रग्स लेना या घर में ड्रग्स रखना ग़ैरक़ानूनी है तो ये कैसे नहीं ? वे कहते हैं कि बच्चे तो ख़ुद अदालत जा नहीं सकते और महिलाएं इस तरह की बातों से बचना चाहती हैं. इसलिए उन्होंने अदालत जाने का फ़ैसला किया | वस्तुस्थिति यह है कि हमारे देश के ख़ासकर युवाओं में इसकी लत बहुत बढ़ी हुई है | हालत यह है कि 800 से ज्यादा पॉर्नोग्राफिक वेबसाइट्स को ब्लॉक करने से पॉर्न डीवीडी की चोरी-छिपे होने वाली बिक्री काफी बढ़ गई। नई दिल्ली के पालिका बाजार, लाजपत नगर और पहाड़गंज जैसे मार्केट्स में पॉर्न डीवीडी खरीदने के लिए लोगों और रिटेलर्स की भीड़ देखी गई। इस दौरान पॉर्न डीवीडी की बिक्री पहले से कई गुना बढ़ गई। पहले जो डीवीडी 100 रुपये में बिकती थी, वह 300 रुपये तक में बिकी। करीब 300 रुपये की कीमत की 8 जीबी की एक नॉर्मल डीवीडी में हर तरह की 10-12 एचडी क्लिपें होती हैं। कोलकाता में दुकानदारों ने सीडी के दाम 20 फीसदी से 30 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। पार्क सर्कस के एक दुकानदार ने बताया कि 20 रुपये में बिकने वाली सीडी 25-30 रुपये में बिक रही है। सबसे ज्यादा मांग वाली एमएमएस क्लिपें करीब दोगुने कीमत 30-40 रुपये में बिक रही हैं। एक दूसरे दुकानदार ने बताया कि मुख्य स्थानों जैसे गरियाहाट और रासबिहारी एवेन्यू में सीडी और डीवीडी के दाम 20 फीसदी बढ़ गए हैं। इंग्लिश पॉर्न डीवीडी करीब 50-60 रुपये में बिक रही है | लखनऊ की बात करें तो पॉर्न के कन्जयूमर्स ने बताया कि पाइरेटेड सीडी/डीवीडी 50फीसदी ज्यादा दाम में बिक रही हैं। हजरतगंज का नाका और नाज मार्केट में प्रीत और अंबर मार्केट्स ऐसे स्थान हैं जहां कंप्यूटर सामग्री और सीडी खुलेआम बिकती हैं। बेंगलुरु में डीवीडी से ज्यादा वीपीएन की मांग बढ़ी। वीपीएन की मदद से कोई भी व्यक्ति सर्विस प्रवाइडर द्वारा किए गए ब्लॉक को तोड़ सकता है। ये हालात कुछ इस क़िस्म के हैं कि सरकार , दूकानदार और उपभोक्ता सभी पोर्नोग्राफी और पोर्न साइट्स को सिरे से बंद करने के खिलाफ़ हैं | जबकि समय , नैतिकता और अच्छे शील - स्वभाव की यह मांग है कि देश में पोर्न साइटों पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाए


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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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