Aug 13, 2015

आधार पर उचित फ़ैसला

 आधार पर उचित फ़ैसला  

- डॉ . मुहम्मद अहमद 
आधार की अनिवार्यता को लेकर केंद्र सरकार पिछली कांग्रेस सरकार की ही तरह बिना संसद की मंज़ूरी के सक्रिय थी , जिसके कारण आमजन को काफ़ी परेशानी हो रही थी | अब सुप्रीमकोर्ट कोर्ट ने अपने एक अंतरिम आदेश में जनता की यह परेशानी दूर हो गई है , लेकिन देखना यह है कि उसके इस आदेश का कितना अनुपालन किया जाता है | क्या उसके पिछले वर्ष 24 मार्च के आदेश जैसा इस बार नहीं होगा कि उसके इसी प्रकार के आदेश की केंद्र सरकार अवहेलना करती रही और आधार को अनिवार्य ठहराने पर ज़ोर देती रही ? शायद इसी कारण से विगत 11 अगस्त 15 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उसकी महत्वकांक्षी योजना आधार को लेकर उसे करारा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने देश में आधार कार्ड को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बतौर एकमात्र पहचान मानने से इन्कार कर दिया है। अतः नागरिकों को अब आधार कार्ड बनवाना अनिवार्य नहीं है। यह बात खुद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कही है। सरकार ने यह भी कहा है कि आधार कार्ड बनाने का फैसला लोगों की इच्छा पर है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र औऱ राज्यों सरकारों को आदेश दिए हैं कि इस बात का ध्यान रखा जाए कि किसी भी अवैध नागरिक का आधार कार्ड न बने। कोर्ट ने कहा है कि आवश्यक सुविधाओं जैसे एलपीजी, टेलीफोन कनेक्शन वगैरह के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा, आधार कार्ड को एक विशुद्ध स्वैच्छिक योजना रहना चाहिए। सरकार अपनी कई योजनाओं को पहले ही आधार कार्ड से जोड़ चुकी है। ऐसे में सरकार का सुप्रीम कोर्ट में यह कहना कि इसे बनवाना लोगों की इच्छा पर है उस पर कई सवाल उठते हैं। इनमें एक बड़ा सवाल यह है कि सुप्रीमकोर्ट की आधार - अनिवार्यता के विरुद्ध पिछले वर्ष के आदेश के बावजूद बड़े पैमाने पर आधार से योजनाओं को अनिवार्यता की तरह क्यों जोड़ा गया ? क्या इससे शीर्ष अदालत कर निर्णय की अवमानना नहीं हुई ? फिर अवमानना पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कोई दंडात्मक कार्यवाही की ?
सुप्रीमकोर्ट ने ताज़ा आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए, जिसमें आधार कार्ड योजना को बंद किए जाने की मांग की गई है। इसके पीछे तर्क दिया है कि आधार कार्ड में कई तरह की कमियां हैं। इससे व्यक्ति की निजता का उल्लघन होता है , डाटा का दुरूपयोग हो सकता है और ऐसे भी मामले प्रकाश में आये हैं , जिनमें फिंगर प्रिंट न उभरने की वजह से लोगों का आधार बनाने से इन्कार कर दिया गया | यह आरोप  भी लगाया जाता है कि आधार कार्ड बनवाने का ठेका निजी कंपनियों को दिया जाता है , जो पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हैं , जिसके फलस्वरूप कुत्ते - बिल्ली आदि के भी आधार बन चुके हैं | 
दरअसल पहले ये खबरें फैलाई गई थीं और गैस डीलरों की ओर से बार - बार यही कहा जा रहा था  कि रसोई गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी आधार कार्ड से जुड़े आपके बैंक अकाउंट में ही आएगी। सब्सिडी की राशि तभी अकाउंट में आएगी, जब आपने आधार कार्ड बनवाकर अपने बैंक अकाउंट से उसे लिंक कराया होगा। यह भी बात सामने आ रही थी कि आधार कार्ड न होने पर मार्केट रेट पर सिलेंडर खरीदना पड़ेगा। सबसे ज्यादा भ्रम की स्थिति एलपीजी के मसले पर ही थी जो कोर्ट के फैसले के बाद अब दूर हो गई है |
सुप्रीमकोर्ट ने अब यह व्यवस्था दी है कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा। इसके साथ ही अदालत ने इस योजना के तहत पंजीकरण के लिए एकत्र व्यक्तिगत बायोमेट्रिक आंकड़े साझा करने से प्राधिकारियों को रोक दिया। एकत्र की गयी जानकारी का इस्तेमाल अदालत की अनुमति से ही आपराधिक मामलों की जांच के अलावा किसी अन्य कार्य के लिए नहीं किया जायेगा। शीर्ष अदालत की संविधान पीठ अब इस सवाल पर फैसला करेगी कि क्या आधार कार्ड तैयार करने के लिये बायोमेट्रिक आंकड़े एकत्र करने से व्यक्ति के निजता के अधिकार का हनन होता है और क्या निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है ?
 जस्टिस जे चेलामेश्वर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि आधार कार्ड की कोई भी व्यक्तिगत जानकारी किसी प्राधिकार के साथ साझा नहीं की जायेगी। अदालत ने इस संबंध में अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी का कथन भी रिकार्ड में दर्ज किया। शीर्ष अदालत ने कहा, आधार का इस्तेमाल सार्वजनिक वितरण पण्राली, मिट्टी के तेल और रसोई गैस , वितरण पण्राली के अलावा किसी अन्य मकसद के लिए नहीं किया जायेगा। परंतु साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिये भी आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा।
 शीर्ष अदालत ने आधार योजना को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं का इस योजना के तहत पंजीकरण की प्रक्रिया रोकने का अंतरिम अनुरोध अस्वीकार कर दिया। इससे पहले इसी पीठ ने केन्द्र सरकार की आधार कार्ड योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ को यह फैसला करने के लिये सौंप दिया कि क्या निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है | याचिका कर्ताओं का दावा है कि इस योजना के तहत एकत्र बायोमेट्रिक सूचना को साझा करना निजता के मौलिक अधिकार का हनन है। इससे पहले सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल ने आधार कार्ड योजना का समर्थन करते हुये दलील दी थी कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा था, कोई भी फैसला स्पष्ट रूप से नहीं कहता है कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है। यह अनुच्छेद 21 के तहत भी नहीं है। 
यदि यह न्यायालय महसूस करता है कि इस मामले में स्पष्ट होना चाहिए तो इस पर सिर्फ संविधान पीठ ही निर्णय कर सकती है। अटार्नी जनरल रोहतगी ने छह और आठ न्यायाधीशों की पीठ के दो फैसलों को उद्धृत किया था जिसमें कहा गया था कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। उन्होंने ए .के . गोपालन, मेनका गांधी और बैंकों के राष्ट्रीयकरण मामलों में दी गयी व्यवस्थाओं का हवाला देते हुये कहा कि चुनिन्दा मौलिक अधिकारों की व्याख्या को लेकर व्याप्त असंगति को सिर्फ बड़ी पीठ ही दूर कर सकती है। 
केन्द्र सरकार ने नागरिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये कथित रूप से आधार कार्ड के लिये दबाव डाले जाने के मामले में केन्द्र, भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के अनुरोध का विरोध करते हुये कहा था कि यह अनिवार्य नहीं है। अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पिंकी आनंद ने अदालत से कहा था कि इससे पहले के आदेशों के अनुरूप सरकार ने राज्यों और संबंधित प्राधिकारियों को सूचित किया था कि विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये आधार कार्ड का होना अनिवार्य नहीं किया जाये।
केद्र सरकार की यह बात सही नहीं लगती , क्योंकि आधार की अनिवार्यता की बात न कही गई होती , तो हर जगह आधार की मांग क्यों की जाती और जनता को अनावश्यक परेशानी में न डाला जाता |

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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