Jun 4, 2015

मोदी सरकार वित्तीय सेवाएं आसान बनाए

मोदी सरकार वित्तीय सेवाएं आसान बनाए 


कहा जाता है कि किसी नई सरकार की उपलब्धियां आंकने के लिए एक साल कम होता है , लेकिन यह सच है कि एक साल में उसकी प्रगति की दिशा ज़रूर मालूम हो जाती है | आगामी 26 मई को मोदी सरकार के एक वर्ष पूरे हो जाएंगे जहाँ तक मोदी सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियों का सवाल है , तो इस सिलसिले में कहा जा रहा है कि मोदी सरकार और डॉ . मन मोहन सिंह के एक वर्षीय कार्यकाल में दोनों में बहुत समानताएं हैं | मगर यह पूरा सच नहीं है | मोदी का एकाधिकारवादी होना एक अलग समस्या है , जो मनमोहन सिंह में नहीं थी | इसी प्रकार मोदी सरकार आरोपों के घेरे में अधिक है | एक अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि  मोदी सरकार के कार्यकाल में धार्मिक एवं लैंगिक भेदभाव बढ़ा है | अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में मंत्री रह चुके अरुण शौरी का कहना है कि वर्तमान में प्रधानमंत्री आफ़िस का कंट्रोल बहुत अधिक बढ़ गया है | इसका यह भी मतलब है कि पीएम की हर चीज पर नजर है और जो कुछ हो रहा है, उसकी जवाबदेही से प्रधानमंत्री बच नहीं सकते। नई सरकार के बारे में विदेशी निवेशकों का जोश ठंडा पड़ चुका है, हालांकि उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है। इस स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पहले साल की उपलब्धियां कुछ समान अवश्य लगती हैं | ,मिसाल के तौर पर दोनों ही प्रधानमंत्रियों के पहले वर्ष के कार्यकाल में विकास दर में तेजी आई, आयात और निर्यात घटा, विदेशी पूंजी भंडार बढ़ा, कोयला उत्पादन बढ़ा, बिजली उत्पादन बढ़ा, पेट्रोलियम उत्पादों की खपत बढ़ी और बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) का स्तर बढ़ा। 'इंडिया स्पेंड' ने 12 संकेतकों का मूल्यांकन किया, जिसमें कई समानताएं देखी गईं। मोदी के प्रथम वर्ष में आठ प्रमुख उद्योगों (कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफायनरी उत्पाद, ऊर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली) की विकास दर 2014-15 में पांच फीसदी रही, जो एक साल पहले 4.2 फीसदी थी। सिंह के प्रथम वर्ष में छह प्रमुख उद्योगों (कच्चा तेल, रिफायनरी उत्पाद, कोयला, बिजली, सीमेंट और तैयार कार्बन स्टील) की विकास दर 2009-10 में 10.4 फीसदी थी, जो 2008-09 में 2.8 फीसदी थी।डॉलर राशि में निर्यात और आयात 2014-15 में साल-दर-साल आधार पर क्रमश: दो फीसदी और 0.5 फीसदी घटा। डॉ .सिंह के दूसरे कार्यकाल के प्रथम वर्ष 2009-10 में यह क्रमश: चार फीसदी और पांच फीसदी रहा।विदेशी पूंजी भंडार 12 फीसदी वृद्धि दर्ज करते हुए 2013-14 के 304 अरब डॉलर से बढ़कर 2014-15 के आखिर में 341 अरब डॉलर हो गया। 2009-10 में यह 5.4 फीसदी वृद्धि के साथ 254.9 अरब डॉलर दर्ज किया गया था, जो एक साल पहले 241.7 अरब डॉलर था। आर्थिक मोर्चे पर देखें तो 2012-13 में 5.1% के बाद 2013-14 में 6.9% की विकास दर हासिल करने का माहौल अब भी बना हुआ है। इस सरकार को कई अहम मोर्चों पर निरंतरता बनाए रखने का श्रेय दिया जाना चाहिए। रघुराम राजन रिजर्व बैंक के गवर्नर बने हुए हैं और वह रुपये में स्थिरता बनाए रखने और महंगाई पर काबू पाने की जंग छेड़े हुए हैं।

यहाँ उन बातों की भी चर्चा होनी चाहिए जो पहले नहीं थीं या अल्प मात्रा में पाई जाती थीं और अब उनका विस्तार हो गया है ! देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों पर होनेवाले हमलों पर प्रधानमंत्री मोदी की ख़ामोशी को अच्छा नहीं माना जा रहा है और इसे लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत बताया जा रहा है | बढ़ते धार्मिक और लैंगिक भेदभाव की  अस्ल वजह राजनीतिक शह है , जिसके चलते लोगों को नौकरियां और क़र्ज़ हासिल करने में दिक्कत हो रही है। मशहूर संस्था ' मास्टर कार्ड ' ने हाल में एक सर्वे के नतीजे जारी किए हैं, जिनसे ये बातें स्पष्ट हुई हैं सर्वे के लिए इंडिया में जितने लोगों ने हिस्सा  किया, उनमें से 58 फ़ीसद ने बताया कि भेदभाव के चलते उनके लिए क़र्ज़ लेना, बचत करना और नौकरी पाना मुश्किल होता है। सर्वे में शामिल दूसरे देशों के 33 फ़ीसद लोगों की यह शिकायत थी। सर्वे में यह भी बताया गया है कि 58 फ़ीसद लोगों को अपने अल्पसंख्यक समुदाय या धर्म का होने के चलते नौकरी पाने या क़र्ज़ लेने में दिक्कत होती है। बाहर के देशों में ऐसी शिकायत 28 फ़ीसद लोगों ने की थी। प्रधानमंत्री मोदी अपने वित्तीय समायोजन की पहल को आगे बढ़ाते हुए पिछले वर्ष 15 अगस्त को  देश के हर परिवार को बैंकिंग सेवाओं के दायरे में लाने के लिए महत्वाकांक्षी जन धन योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत करोड़ों बैंक खाते खुले और रूपे डेबिट कार्ड जारी किये गये | प्रधानमंत्री के अनुसार , जन धन योजना के तहत 15 करोड़ से ज्यादा खाते खोले जा चुके हैं। इनमें 15,800 करोड़ रुपये जमा हो गए हैं। इस योजना के तहत करोड़ों बैंक खाते खुले और रूपे डेबिट कार्ड जारी किये गये | अब मोदी सरकार ने तीन सामाजिक योजनाओं की घोषणा की है | इनमें 1 रुपये से कम के दैनिक खर्च में जीवनबीमा कवर और हर महीने एक रुपये के प्रीमियम पर सेहत और दुर्घटना कवर वाली योजना शामिल हैं। मगर मास्टर कार्ड के सर्वे में कहा गया है कि वित्तीय सेवाएं प्राप्त करना आसान हो तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा और विकास की गति बढ़ेगी

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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