Apr 4, 2015

बाबा राम पाल की काली करतूतें और धर्मभीरू जनता

इन्सान का पालनहार ही इन्सान का अस्ली उद्धारक

रामपाल ने ये भीड़ कैसे जुटाई ? ये कौन लोग हैं जो रामपाल के लिए मरने मारने पर उतारू हैं ? क्या आपने कभी सोचा है कि रामपाल नाम के जिस इंजीनियर ने जिंदगी में कभी सड़क का पुल नहीं बनाया वो आत्मा और भगवान के बीच का पुल का ठेकेदार कैसे बन बैठा? आठ साल पहले लेकर चलते हैं आपको। उसके पास तहखाना भी था। यही वो भेद है, जिसमें घुसकर रामपाल को भगवान का चोला ओढ़ रखा था। रोहतक के सतलोक आश्रम का सच दहला देने वाला है। यह सतलोक नहीं है। रामपाल का मायालोक है। इस मायालोक में विज्ञान के अविष्कारों से उसने फरेब का एक ऐसा आभामंडल तैयार किया था, जिसने बर्खास्त जूनियर इंजीनियर रामपाल को बाबागीरी का उस्ताद बना दिया। इस मायालोक में एक सिंहासन था। वहां से रामपाल अपने भक्तों को दर्शन दिया करता था। इसके चारों तरफ बुलेट प्रूफ शीशा लगा हुआ होता था। किसी को पता नहीं चलता था कि रामपाल इसके भीतर कैसे पहुंचता है। वो नीचे से कहीं से निकलता था। यही नहीं, जब यहां का प्रवचन खत्म हो जाता था तो बिना बाहर निकले वो दूसरी तरफ हाजिर हो जाता था। यहां भी वो नीचे से ऊपर की ओर निकलता था। लोग ताज्जुब में कि बाबा एक ही जगह में दो जगह कैसे। इसका राज था ये तहखाना। इसी तहखाने से रामपाल दौड़कर दूसरी तरफ भागता था। और इसे एक चमत्कार में बदलने के लिए उसने अपनी सारी इंजीनियरिंग भिड़ा दी थी। ये सिंहासन दरअसल एक हाईड्रोलिक मशीन पर टंगा हुआ होता था। इस सिंहासन के हत्थे में ही बटन लगे होते थे। बटन दबाते ही बाबा तहखाने से सीधे प्रवचन के डिब्बे में पहुंच जाता था। और प्रवचन खत्म तो बटन दबाया सिंहासन नीचे। अब नीचे ही नीजे बनी हुई थी एक सुरंग। इस सुरंग से रामपाल दूसरे हिस्से में भागता। ये सुरंग सिर्फ रामपाल के फरेब के काम में आती थी। अनुयायियों के बीच जाते समय राम पाल इसी ट्राॅलीनुमा हाइड्रोलिक चेयर का प्रयोग करता था। यह चेयर ऊपर, नीचे, दाएं-बाएं घूमती थी। साधक इसे चमत्कार समझते थे। सुरंग के रास्ते रामपाल एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंच जाता। वहां भी बिल्कुल उसी तरह का सिंहासन। हाइड्रोलिक मशीन पर टंगा हुआ। बटन दबाते ही सिंहासन ऊपर की ओर चल पड़ता। जहां रामपाल के भक्त उसका इंतजार कर रहे होते। रामपाल बिना दिखे या चले हुए ऐसे निकलता जैसे जमीन फाड़कर निकला हो। लोगों की आंखें फटी की फटी रह जातीं। उन्हें लगता कि ये तो सचमुच में चमत्कार है। और बाबा भगवान का अवतार है।
2000 से 2006 तक रामपाल करौंथा में रोज ये कलाकारी दिखाता रहा। दूर-दूर तक उसने अपने इस ढकोसले को चमत्कार की तरह बेचा। वो तो एक दिन आश्रम से गोली चली। एक नौजवान की मौत हुई और पुलिस आश्रम में घुस गई। तब जाकर पता चला रामपाल ने अपनी बाबागीरी का बढ़िया बाज़ार सजा रखा है। यह उस जमाने की बात है जब रामपाल गोलीकांड में अपने 37 गुर्गों के साथ गिरफ्तार हो गया था। तब रामपाल इतना बड़ा नहीं हुआ था। ये कितनी अजीब बात है कि जिस रामपाल की पोल पट्टी 8 साल पहले खुल चुकी थी वो रामपाल जब दो साल बाद जेल से निकला तो भक्ति की चादर ओढ़कर फिर से घी पीने लगा। फिर भी लोग नहीं चेते , उसके फ़रेब में फंसते चले गये | वह तरह - तरह के हथकंडों  के सहारे द्वारा धर्मभीरु जनता को फांसता रहा |  पुलिस को इस बाबत कई सबूत मिले हैं | उसके हाइड्रोलिक   चेयर के पास से बड़ी संख्या में शीशियां मिली हैं , जिसमें वह ट्यूबवेल का पानी भरवा कर रखता था और चरणामृत कहता था | वह लोगों का इससे इलाज करता | लोग इलाज के लिए चरणामृत लेने दूर-दूर से आते थे। बाबा के आश्रम में शांति और सादगी के उलट भोगविलास के सारे प्रबंध थे |  बाबा के पास कई लग्जरी कारें, एक स्विमिंग पूल, कई फ्लैट स्क्रीन टीवी, कई एयर कंडिशन, मसाज टेबल्स, बहुत महंगी ट्रेड मिल के साथ जिम भी हैं। वैसे आश्रम की पूरी इमारत लग्जरी है। इसमें ग्रेनाइट टाइल्स, मार्बलफ्लोरिंग, फैंसी ग्रील्स, मजबूत दरवाजे, सारी सुविधाओं से लैस वॉशरूम, स्प्लिट एयर कंडिशन, फ्लैट स्क्रीन टीवी के साथ मसाज बेड भी हैं। एक पुलिस अफसर  ने कहा कि बाबा का निजी कमरा बहुत बड़ा है। इंजिनियर से भगवान बने बाबा के पास 25 मीटर का पर्सनल पूल है।इस पुल में केवल वही अठखेलियां करते थे। फिलहाल पूल खाली है क्योंकि बाबा सर्दी में पूल इस्तमाल नहीं करते थे। आश्रम के चारों तरफ 20 फीट की दीवार से घेरेबंदी है। सुरक्षा बलों को इस दीवार को भेदने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। तलाशी में जुटी पुलिस ने आश्रम से तीन रिवॉल्वर, चार राइफल, 26 एयर गन और 103 कारतूस बरामद किए। हथियार रामपाल की गद्दी के नीचे बने कमरे से मिले हैं। एक राइफल रामपाल के बिस्तर के नीचे भी मिली। पुलिस ने रामपाल के कमरे से प्रेग्नेंसी जांच किट भी बरामद की है। रामपाल के जाल में किस कदर लोग फंसे हुए थे अब धीरे-धीरे कई तथ्य सामने आ रहे हैं। बाबा की झूठी महिमा में फंसे लोगों ने बताया कि वह जिस दूध से नहाते थे उससे बाद में खीर बनती थी। 
इस खीर को बाबा के भक्त प्रसाद की तरह खाते थे। रामपाल के अंधभक्तों ने कहा कि इस खीर को खाने के बाद चमत्कार की उम्मीद बढ़ जाती थी। 45 साल के भक्त मनोज ने बताया कि रामपाल को जिस दूध से स्नान कराया जाता था उसी दूध में फिर प्रसाद के लिए खीर बनती थी। बाबा को अरेस्ट करने के दौरान भगदड़ में जख्मी हुए 29 साल के कृष्ण ने कहा कि बाबा जब ध्यान लगाने बैठते थे तब उन्हें दूध से नहाया जाता था। इससे ध्यान की दुआ दूध में आती थी और उसी दूध से प्रसाद के लिए खीर बनती थी | ऐसा लगता है कि आजकल अन्धता का युग है | कारोबारी फ़ायदों के लिए जनता के बीच सुनियोजित ढंग से अंधविश्वास को बढ़ाया जाता है | इसके कारण विकास युग  अंध विश्वास युग में तब्दील हो चुका है | एक नज़र समाज के चतुर्दिक डालें , तो साफ़ पता चलता है कि आज शनि, राहू, केतु का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है | टोने-टोटके आदि नये परिधान पहनकर वापस आ गये हैं। बहुत पढ़े-लिखे, तर्कशील समझे जाने वाले लोगों की उंगलियां भी मूंगे, मोती और नीलम की अंगूठियों से भरी दिखायी पड़ती हैं। सैकड़ों कारोबारी ज्योतिषी और सैकड़ों भविष्यवाची माँएं लोगों की तकदीर बाँचने के नाम पर न जाने किस-किस तरह से ठगने में जुटी हैं। मीडिया मजबूर है , क्योंकि उसका भी इससे कारोबार चलता है | इसलिए इन ठगों से मिलकर वह भी इनके विराट अर्थसाम्राज्य का कुछ हिस्सा अपनी थैली में डाल लेने पर आमादा है। उसे इससे कोई मतलब नहीं कि इसका जनता पर क्या असर पड़ेगा, लोग कितने गुमराह होंगे, किस तरह ठगे जायेंगे, कितना नुकसान उठायेंगे। ऐसे में मीडिया भी बाबा बन जाता है और पहले से राम पाल जैसे बाबा बने लोगों की चांदी हो जाती है | आवश्यकता इस बात की है कि लोगों को अन्धता से निकाला जाए और अन्धता - प्रचार के सभी स्रोतों एवं साधनों पर जनविरोधी सामग्री परोसने पर रोक लगाई जाए | इसके स्थान पर आम जन को बताया जाए कि वे बुद्धि - विवेक का प्रयोग करें और सत्य को ही ग्रहण करने का प्रयास करें | सत्य धर्म इस्लाम की शिक्षाएं इनके लिए भी उपयोगी हैं , जहाँ ईश्वर और बंदे के बीच किसी अन्य की मध्यस्थतता के बिना सीधे संपर्क की व्यवस्था है | ईश्वर ही संकट से नजात देता है | पवित्र कुरआन में है - '' और अल्लाह को छोड़कर किसी ऐसी सत्ता को न पुकारो , जो तुझे न फ़ायदा पहुंचा सकती है न नुक़सान , अगर तू ऐसा करेगा तो ज़ालिमों में से होगा | अगर अल्लाह तुझे किसी मुसीबत में डाले , तो ख़ुद उसके सिवा कोई नहीं जो उस मुसीबत को टाल दे , और अगर वह तेरे हक़ में किसी भलाई का इरादा करे , तो उसके उदार अनुग्रह को फेरने वाला भी कोई नहीं है '' [ 10 : 106 , 107 ] |  


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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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