Apr 4, 2015

इतिहास के भगवाकरण का घृणित प्रयास

इतिहास के भगवाकरण का घृणित प्रयास 

पूर्व भाजपा अध्यक्ष एवं वर्तमान शहरी विकासमंत्री वेंकैया नायडू ने 23 जून 2013 को कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है , तब पाठ्यक्रमों में बदलाव करेगी | इसी बात के अनुवर्तन में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने 23 जुलाई 2014 को राज्यसभा में कहा कि '' यह प्रस्ताव है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि बच्चों को मानवीय मूल्यों तथा जीवन मूल्यों के प्रति जागरूक बनाने के लिए स्कूली पाठ्यक्रमों में बदलाव किया जायेगा | '' अब आर एस एस से जुड़े शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीनानाथ बत्रा ने कहा है कि '' राजनीतिक बदलाव हो चुका है  अब शिक्षा में पूर्ण बदलाव होना चाहिए | '' इन सब बयानों के बीच भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन को हरी झंडी मिल चुकी है | इतिहास को तोड़ने - मरोड़ने का प्रिय कार्य एक बार फिर से चल पड़ा है आर एस एस की केरल यूनिट की पत्रिका 'केसरी' के विगत 17 अक्तूबर में एक लेख में भाजपा के एक नेता बी. गोपालाकृष्णन ने इशारों में लिखा है कि नाथूराम गोडसे को महात्मा गांधी के बदले जवाहर लाल नेहरू को निशाना बनाना चाहिए था। लेख में कहा गया है कि देश के बंटवारे के लिए नेहरू जिम्मेदार थे और उन्हें कभी भी राष्ट्रपिता से सही में लगाव नहीं रहा। गोपालाकृष्णन केरल की चालाकुडी लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे। 

उन्होंने लिखा है कि नेहरू का स्वार्थ सभी बड़ी राष्ट्रीय त्रासदियों की वजह था।  'अगर इतिहास के विद्यार्थियों ने ईमानदारी से बंटवारे के पहले के ऐतिहासिक तथ्यों और गोडसे के विचारों का अध्ययन किया होता तो वे इस निष्कर्ष पर पहुंच सकते थे कि गोडसे ने गलत निशाना चुना था।पूरे लेख में इस बात पर तर्क दिया गया है कि गांधी की हत्या में संघ का कोई हाथ नहीं था और गोडसे स्वयंसेवक नहीं था, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि गोडसे नेहरू से बेहतर था। लेख कहता है, 'वैश्विक नेता बनने के लिए नेहरू को गांधीजी का नाम, खादी और टोपी चाहिए थी। गोडसे नेहरू से कहीं ज्यादा बेहतर था। उसने सम्मानपूर्वक झुकने के बाद उन्हें गोली मारी। वह नेहरू जैसा नहीं था कि आगे से झुका और पीठ में छुरा भोंक दिया।''' इंडियन एक्सप्रेस '' से बातचीत करते हुए गोपालकृष्णन ने कहा है कि उनके लेख का मकसद अंग्रेजों द्वारा गलत तथ्यों पर लिखे गए इतिहास को एक्सपोज करना है। वे कहते हैं, 'नेहरू शुरू से ही स्वार्थी और पाखंडी थे। वह अपने से ऊपर कांग्रेस में किसी को नहीं देखना चाहते थे। गांधी जी की लोकप्रियता और प्रभाव से वे ईर्ष्या करते थे। नेहरू कभी भी गांधी के अनुयायी नहीं रहे। वे अंग्रेजों के पसंदीदा थे और इतिहास इस तरह से लिखा गया कि नेहरू को महान बनाया जा सके। अब समय आ गया है कि इतिहास को फिर से लिखा जाए।' वास्तव में तथ्य विध्वंस संघ परिवार को सदा से पसंद रहा है | हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने के लिए यह सब छल - छद्म अमल में लाया जाता रहा है | आज आवश्यकता इस बात की है कि मानवता , लोकतंत्र , मानव समता की पक्षधर ताक़तें एकजुट हों और इतिहास विध्वंस के विरुद्ध आगे आयें

About the Author

मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

0 comments:

Post a Comment