Mar 29, 2015

भारतीय समाज की मुश्किलें

भारतीय समाज की मुश्किलें 

आज हमारा प्यारा देश चौतरफ़ा समस्याओं से घिरा हुआ है | गरीबी , बेरोज़गारी , महंगाई, भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं ने आम आदमी की मुश्किलें बहुत बढ़ा दी हैं | आख़िर इन समस्याओं का मूल कारण क्या है ? इन्सान की विकृत मानसिकता , नैतिक पतन के साथ ही पूंजीवाद और पूंजीवादी स्वार्थपरक मानसिकता ही इसका मूल कारण है | आज देश का लगभग हर नेता हर हाल में अपने खाने - कमाने में मशगूल है | ज़ाहिर है , बिना पूंजीवाद का दमन थामे यह संभव नहीं है ! अतएव आज सामान्य रूप से देखा जा रहा है कि देश को पूंजीवादी साम्राज्यवाद की आग में झोंकने का काम सत्ताधारी वर्ग और प्रतिपक्षी दोनों कर रहे हैं
देश के राजनीतिक दल इस घिनौने काम में बुरी तरह पारंगत हो चुके हैं | सभी जानते हैं कि ये ही देश की व्यवस्थापिका का निर्माण करते हैं | फिर कार्यपालिका में अपने जैसी मानसिकता रखनेवालों का प्रोत्साहन एवं संवर्धन करते हैं , जिसके नतीजे में  अधिकारियों और कर्मचारियों का पूरा गिरोह रिश्वतखोरी , कामचोरी और भ्रष्टता में बेख़ौफ़ तरीक़े से लिप्त हो जाता है ! फिर हालत यह हो जाती रही है कि हर छोटे - बड़े सभी कामों और सौदों में छोटी रक़म से लेकर अरबों - खरबों की धनराशि कमीशन या रिश्वत के तौर पर ली जाती है ! हमारे प्रिय देश को बड़े - बड़े घोटाले करने का श्रेय और गर्व प्राप्त है ! इनके अनगिनत नाम हैं | टू जी स्पेक्ट्रम , कोलगेट , राष्ट्रमंडल खेल घोटाला , बोफ़ोर्स ,  चारा घोटाला , ताबूत और हेलीकाप्टर - खरीद घोटाला आदि ऐसे अनगिनत काण्ड एवं ' आमालनामे ' हैं , जो देश के कर्णधारों  के चाल - चलन को पूरी तरह उजागर कर देते हैं | केंद्र और राज्य सरकारों का यही हाल है | एक छोटे - से क्लर्क के पास से करोड़ों की काली कमाई निकलती है ! म . प्र . में छापेमारियों ने इसे स्वयं सिद्ध कर दिया है  | सरकारी कार्यालय भ्रष्टाचार के ' जीवंत ' केंद्र बने हुए हैं | हालत इतनी बदतर है कि किसी को भी अपना काम कराने के लिए रिश्वत देने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं है |गरीबों को उनका जायज़ हक़ रिश्वत , पक्षपात   और प्रदूषित मानसिकता के कारण नहीं मिलता
 देश की आज़ादी के लिए जो लड़ाई हिन्दू - मुसलमान और अन्य लोगों ने मिलकर लड़ी थी , उनमें आज दूरी पायी जाती है | सांप्रदायिक दंगों में जो लगातार वृद्धि हो रही है , वह भी दूरी और बदगुमानी का कूपरिणाम है | इस सूरतेहाल में सांप्रदायिक और फ़ासीवादी तत्वों को अपना काम करने का ' सुअवसर ' प्राप्त होता है | ये तत्व देश की सत्ता - राजनीति पर क़ाबिज़ होना चाहते हैं और इसके लिए अंग्रेज़ों की ' फूट डालो . राज करो ' की नीति को पूरी तरह अपना रखा है | इनकी पहुँच पुलिस , प्रशासन , मीडिया और न्यायपालिका तक है , जिसे कारण देश के अल्पसंख्यक और कमज़ोर वर्गों को अपने भौतिक एवं आस्थागत अस्तित्व को बचाना बहुत कठिन हो गया है | वास्तव में नागरिक और मानवीय अधिकारों की पामाली हमारे देश में एक बड़ी समस्या बनी हुई है आतंकवाद के नाम पर पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियां मुस्लिम नवजवानों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत आरोपों के तहत झूठे मुक़दमों में फंसाकर जेलों में झोंक रही हैं | स्थिति यह है कि जब तक इनकी बेगुनाही अदालत में साबित होती है , तब तक ये अपनी उम्र का बड़ा हिस्सा जेलों में गुज़ार चुकते हैं | यह अन्यायपूर्ण स्थिति भी ज़रूर बदलनी चाहिए | ज़रूरत इस बात की है कि शांति प्रिय , न्याय प्रिय और देश व समाज हितैषी हर व्यक्ति अपनी ज़िम्मेदारी महसूस करे , मौलिक धार्मिक और नैतिक मूल्यों को अपनाए एवं देश को इन समस्याओं के हल तथा चरित्रहीन व मलिन राजनीति से देश को पाक करने के लिए आगे आए | क्या भाजपा इन विसंगतियों और समस्याओं में स्वस्थ - सकारात्मक बदलाव लाने में सफल हो पाएगी ?

आज हमारा प्यारा देश चौतरफ़ा समस्याओं से घिरा हुआ है | गरीबी , बेरोज़गारी , महंगाई, भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं ने आम आदमी की मुश्किलें बहुत बढ़ा दी हैं | आख़िर इन समस्याओं का मूल कारण क्या है ? इन्सान की विकृत मानसिकता , नैतिक पतन के साथ ही पूंजीवाद और पूंजीवादी स्वार्थपरक मानसिकता ही इसका मूल कारण है | आज देश का लगभग हर नेता हर हाल में अपने खाने - कमाने में मशगूल है | ज़ाहिर है , बिना पूंजीवाद का दमन थामे यह संभव नहीं है ! अतएव आज सामान्य रूप से देखा जा रहा है कि देश को पूंजीवादी साम्राज्यवाद की आग में झोंकने का काम सत्ताधारी वर्ग और प्रतिपक्षी दोनों कर रहे हैं
देश के राजनीतिक दल इस घिनौने काम में बुरी तरह पारंगत हो चुके हैं | सभी जानते हैं कि ये ही देश की व्यवस्थापिका का निर्माण करते हैं | फिर कार्यपालिका में अपने जैसी मानसिकता रखनेवालों का प्रोत्साहन एवं संवर्धन करते हैं , जिसके नतीजे में  अधिकारियों और कर्मचारियों का पूरा गिरोह रिश्वतखोरी , कामचोरी और भ्रष्टता में बेख़ौफ़ तरीक़े से लिप्त हो जाता है ! फिर हालत यह हो जाती रही है कि हर छोटे - बड़े सभी कामों और सौदों में छोटी रक़म से लेकर अरबों - खरबों की धनराशि कमीशन या रिश्वत के तौर पर ली जाती है ! हमारे प्रिय देश को बड़े - बड़े घोटाले करने का श्रेय और गर्व प्राप्त है ! इनके अनगिनत नाम हैं | टू जी स्पेक्ट्रम , कोलगेट , राष्ट्रमंडल खेल घोटाला , बोफ़ोर्स ,  चारा घोटाला , ताबूत और हेलीकाप्टर - खरीद घोटाला आदि ऐसे अनगिनत काण्ड एवं ' आमालनामे ' हैं , जो देश के कर्णधारों  के चाल - चलन को पूरी तरह उजागर कर देते हैं
केंद्र और राज्य सरकारों का यही हाल है | एक छोटे - से क्लर्क के पास से करोड़ों की काली कमाई निकलती है ! म . प्र . में छापेमारियों ने इसे स्वयं सिद्ध कर दिया है  | सरकारी कार्यालय भ्रष्टाचार के ' जीवंत ' केंद्र बने हुए हैं | हालत इतनी बदतर है कि किसी को भी अपना काम कराने के लिए रिश्वत देने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं है |गरीबों को उनका जायज़ हक़ रिश्वत , पक्षपात   और प्रदूषित मानसिकता के कारण नहीं मिलता
 देश की आज़ादी के लिए जो लड़ाई हिन्दू - मुसलमान और अन्य लोगों ने मिलकर लड़ी थी , उनमें आज दूरी पायी जाती है | सांप्रदायिक दंगों में जो लगातार वृद्धि हो रही है , वह भी दूरी और बदगुमानी का कूपरिणाम है | इस सूरतेहाल में सांप्रदायिक और फ़ासीवादी तत्वों को अपना काम करने का ' सुअवसर ' प्राप्त होता है | ये तत्व देश की सत्ता - राजनीति पर क़ाबिज़ होना चाहते हैं और इसके लिए अंग्रेज़ों की ' फूट डालो . राज करो ' की नीति को पूरी तरह अपना रखा है | इनकी पहुँच पुलिस , प्रशासन , मीडिया और न्यायपालिका तक है , जिसे कारण देश के अल्पसंख्यक और कमज़ोर वर्गों को अपने भौतिक एवं आस्थागत अस्तित्व को बचाना बहुत कठिन हो गया है | वास्तव में नागरिक और मानवीय अधिकारों की पामाली हमारे देश में एक बड़ी समस्या बनी हुई है आतंकवाद के नाम पर पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियां मुस्लिम नवजवानों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत आरोपों के तहत झूठे मुक़दमों में फंसाकर जेलों में झोंक रही हैं | स्थिति यह है कि जब तक इनकी बेगुनाही अदालत में साबित होती है , तब तक ये अपनी उम्र का बड़ा हिस्सा जेलों में गुज़ार चुकते हैं | यह अन्यायपूर्ण स्थिति भी ज़रूर बदलनी चाहिए | ज़रूरत इस बात की है कि शांति प्रिय , न्याय प्रिय और देश व समाज हितैषी हर व्यक्ति अपनी ज़िम्मेदारी महसूस करे , मौलिक धार्मिक और नैतिक मूल्यों को अपनाए एवं देश को इन समस्याओं के हल तथा चरित्रहीन व मलिन राजनीति से देश को पाक करने के लिए आगे आए | क्या भाजपा इन विसंगतियों और समस्याओं में स्वस्थ - सकारात्मक बदलाव लाने में सफल हो पाएगी ?
- डॉ . मुहम्मद अहमद 


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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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