Mar 29, 2015

फिर गाय की सियासत

फिर गाय की सियासत 


देश में गाय को लेकर फिर राजनीति की जा रही है | एक ओर महाराष्ट्र की भाजपा सरकार पाबंदी का दायरा बढ़ाकर बैलों आदि तक कर देती है , वहीं दूसरी ओर वह गोवा में सहर्ष बीफ परोस रही है | पार्टी के इस क़दम से सभी हैरत में हैं और बीफ पर रोक से प्रभावितों में सहज ही गुस्सा व आक्रोश है | मालूम हो कि महाराष्ट्र में पाबंदी के चलते गोवा में हाहाकार मचा हुआ था , तो राज्य सरकार ने पिछले 14 मार्च से लोगों को आसानी से बीफ़ मिलने लगा।
 इसके लिए राज्य के लोग गोवा की भारतीय जनता पार्टी सरकार को शुक्रिया कह रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भाजपा गोवंशकुशी रोकने के लिए भावनात्मक आधार पर अभियान चलाकर अपना राजनीतिक स्वार्थ पूरा करने की कोशिश करती रही है | हाल के दिनों में उसने महाराष्ट्र के बाद हरियाणा में ऐसा ही क़दम उठाते हुए गोवंश कुशी पर पाबंदी लगा दी | हरियाणा विधानसभा में विगत 16 मार्च को हरियाणा गोवंश संरक्षण व गोसंवर्धन विधेयक-2015 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई। अब प्रदेश में गोकुशी ग़ैर ज़मानती आपराधिक कृत्य बन चुकी है
ऐसे अपराध के दोषियों को तीन से 10 साल तक की कैद व एक लाख रुपये तक जुर्माने की सजा हो सकती है। महाराष्ट्र में भी कड़ी सज़ा का प्रावधान है | इसके विपरीत गोवा में भाजपा सरकार इस बात की पूरी कोशिश क्र रही है कि राज्य में बीफ की किल्लत न होने पाए | वह गोवा में बीफ की कमी पड़ोसी राज्य कर्नाटक और महाराष्ट्र के जरिए पूरी कर रही है ! साथ ही भाजपा सरकार प्राइवेट सेक्टर के कोल्ड स्टोरेज से भी मदद ले रही है।
 जीएमसी के चेयरमैन लिंदोन मोंटेरिओ ने कहा, 'हमने प्रदेश में बीफ ट्रेडर्स से दो टूक कहा कि वे अपने स्टोर को खोलें नहीं तो कार्रवाई की जाएगी। हमने इन्हें एक हफ्ते का वक्त दिया था , लेकिन ये हरकत में नहीं आए। इसके बाद हमने पड़ोसी राज्यों से बीफ खरीद राज्य में अपने स्टोरेज के जरिए बेचना शुरू किया। इस वक्त गोवा सरकार अपने खुद के चेन के जरिए राज्य में बीफ बेच रही है। ' गोवा की कुल आबादी में ईसाई 26 पर्सेंट हैं। इनके किचन के लिए बीफ अहम है।
उधर केरल में इस मुद्दे पर घमासान मचा हुआ है | पूरे देश में गोहत्या और गोमांस पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ दोनों मोर्चे एकजुट हो गए हैं। दोनों ने इसे लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखलंदाजी करार दिया है। माकपा की राज्य कमेटी के सदस्य राजेश के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) ने पिछले दिनों केंद्र की पहल के खिलाफ राज्य भर में मुफ्त में गोमांस निर्मित खाद्य पदार्थ बांटकर बीफ-फेस्टिवल मनाया। केरल देश के उन राज्यों में है जहां सर्वाधिक गोमांस की खपत होती है। 
सबसे महत्त्वपूर्ण और ध्यान देने वाली बात यह है कि बीफ मुख्यत: गरीबों का भोजन है, चाहे उसका कोई भी धार्मिक संबंध हो। इसके अलावा इसके जरिए गरीबों को सबसे सस्ते में प्रोटीन मिल जाता है। सरकारी आंकड़े खुद यह बताते हैं कि गैर शाकाहारी भोजन में बीफ सामान्यत: अधिक खाया जाता है। यूनाइटेड नेशंस फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में जो सबसे अधिक मांस खाया जाता है वह बीफ है। 
पश्चिम बंगाल और केरल में गोमांस गैरकानूनी नहीं है। हिंदुओं की ऐसी बहुत बड़ी संख्या है जो गोवंश का गोश्त खाती है। दक्षिण केरल में सभी समुदायों, जिसमें हिंदू भी शामिल हैं, द्वारा जितना गोश्त खाया जाता है उसमें आधा हिस्सा बीफ का होता है। साफ है कि बीफ गरीबों का भोजन है जिसे केवल मुसलमान ही नहीं खाते हैं। वर्तमान में केरल में 72 समुदाय ऐसे हैं, जिनमें सभी अछूत नहीं हैं, जो महंगे बकरे के गोश्त के बजाय गोवंश के जानवरों के गोश्त को ज्यादा तरजीह देते हैं। 
यही वजह है कि वहां भाजपा की कोशिश का सर्वाधिक खुलकर विरोध हो रहा है | इसी कड़ी में गत दिनों वहां एक अनोखे उत्सव का नजारा देखने को मिला , जहां खुली रसोई में बीफ (गाय का मांस) पकाया गया। इतना ही नहीं, हिंदुओं और मुसलमानों ने साथ बैठकर बीफ खाया भी। इस फेस्ट में आए लोग महाराष्ट्र में बीफ पर लगाए गए बैन का विरोध कर रहे थे। केरल में बीफ का मतलब गाय और भैंस दोनों का गोश्त है और यहां बीफ खाना कोई धर्म से जुड़ा मसला भी नहीं है। 
केरल में बहुत से हिंदू ऐसे हैं जो न सिर्फ बीफ खाते है बल्कि यह लोगों का पसंदीदा भी माना जाता है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बीफ खाना एक सामान्य बात है। भारत के विभिन्न हिस्सों में आदिवासी, दलित और मुसलमान बीफ खाते हैं। यही नहीं, उत्तर-पूर्वी भारत के पहाड़ी समुदायों के लोग भी बीफ खाते हैं। उत्तराखंड में आज भी बड़े पैमाने पर भैंसे की बलि चढ़ाने की परंपरा है , जिसका गोश्त खाया जाता है | हिन्दू धर्म ग्रंथ इसका समर्थन करते हैं | सुप्रसिद्ध लेखक डी एन झा ने अपनी पुस्तक ' द मिथ ऑफ होली काउ ' में कई ऐसे हवाले दिए हैं |


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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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