Mar 5, 2015

शालीन ड्रेस की ज़रूरत

शालीन ड्रेस की ज़रूरत 

भौतिकता के बढ़ते प्रभाव से महिला शोषण भी बढ़ा है | एयर होस्टेस पर किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जिस ग्लेमरस पोशाक को दुनियाभर के एयर होस्टेस को पहनने के लिए मजबूर किया जाता है , वह उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गया है | भारत समेत जापान, ब्रिटेन और जर्मनी समेत कई निजी और सरकारी एयरलाइंस की एयरहोस्टेस ने अपनी ग्लैमरस यूनीफॉर्म पर आपत्ति दर्ज कराई है। 
इन एयरहोस्टेस का कहना है कि ऐसी ड्रेस पहनने से उन्हें काम करने में काफी दिक्कत होती है। ये इतनी कसी होती हैं कि छेड़खानी के खतरे के अलावा खुद से भी चोट पहुंचने तक की आशंका बढ़ जाती है। महिलाकर्मियों के मुताबिक , दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डिजाइनरों द्वारा बनाई गइं ये ड्रेसेस स्टाइलिश होती हैं। इनमें पारंपरिक पोशाक ' सारोंग केबाया ' दिखने में तो खूबसूरत है, लेकिन इसे पहनकर आराम महसूस नहीं होता।
 दुनियाभर में हर एयरलाइंस की अपनी ड्रेस अलग-अलग होती है , लेकिन कई एयरलाइंस के ड्रेस बेहद असुविधाजनक और अश्लील होते हैं | ऐसे में इन एयर  होस्टेस का कहना है कि लगभग 35 हजार फुट  की ऊंचाई पर कपड़े ही बेचैन करेंगे, तो काम क्या खाक होगा। उनके मुताबिक पुरुष तो सूट पहनते हैं, पर महिलाओं का यूनीफार्म कसा, अंगप्रदर्शन करने वाला, खुरदुरा और दुल्हन की ड्रेस की तरह भारी-भरकम तक होता है। उन्हें स्कर्ट और हील पहनने से भी दिक्कत होती है।  आपातकालीन स्थिति में  तो इन यूनीफार्म में काम करना असंभव सा हो जाता है। 
भारत की कई निजी एयरलाइंस की एयरहोस्टेस ने भी कई बार यात्रियों द्वारा उनकी स्कर्ट की तस्वीरें खींचने जैसी अनेक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। एयर होस्टेस की इन समस्याओं का भी निराकरण होना चाहिए | जमाअत इस्लामी हिन्द के केन्द्रीय सहायक सचिव जनाब इन्तिज़ार नईम ने हाल में नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र भेजकर एयर होस्टेस एवं उड्डयन विभाग की महिला कर्मचारियों के लिए नारी गरिमा के अनुकूल शालीन ड्रेस की व्यवस्था व प्रावधान करने की मांग की है | साथ ही इस सिलसिले में प्रभावी प्रयास का आग्रह करते हुए उन्होंने लगभग 70 स्वयंसेवी संगठनों को पत्र लिखा है | 
- डॉ . मुहम्मद अहमद 

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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