Feb 21, 2015

जनगणना रिपोर्ट की सही व्याख्या की जाए


' आउटलुक ' [ 1 - 15 फ़रवरी 2015 ] में ' जनगणना पर राजनीति ' शीर्षक से प्रकाशित आवरण लेख में देश में मुसलमानों की आबादी को लेकर किये जा रहे भ्रामक दुष्प्रचारों का सटीक विश्लेषण करके यथातथ्य पेश करने का प्रयास किया गया है |आवरण लेख में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने लिखा है कि '' 2001 से 2011 के जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक़ , भारत की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी बढ़ने की रफ़्तार कम हुई है | हालाँकि अब भी हिन्दू समेत बाक़ी समुदायों की तुलना में उनकी आबादी की वृद्धि अधिक है | वर्ष 2001 से 2011 के बीच आबादी में उनका हिस्सा 13 . 4 फ़ीसदी से 14 . 2 फ़ीसदी हो गया है यानी 0 . 8 फ़ीसदी अंक की वृद्धि , जबकि 1991 से 2001 के दशक में उनकी आबादी में 1 . 7 फीसदी अंक का इज़ाफ़ा हुआ था | देखा जाए तो भारत में मुसलमानों की आबादी 24 . 4 फीसदी बढ़कर 13 . 8 करोड़ से 17 . 18 करोड़ हो गई | इस लिहाज़ से मुसलमानों की कुल आबादी बढ़ने की रफ़्तार में भी बहुत गिरावट हुई है |  '' मुसलमानों का लिंगानुपात यह बताता है कि 1000 मुस्लिम मर्दों की तुलना में औरतें 936 ही हैं |  मुसलमानों की आबादी के बढ़ने के दो प्रमुख कारण हैं -  पहला , उनकी जीवन प्रत्याशा हिन्दुओं से अधिक 68 वर्ष है , जबकि हिन्दुओं की 65 वर्ष है | दूसरा प्रमुख कारण मुसलमानों में बाल मृत्यु दर का कम होना है | हिन्दुओं में बाल मृत्यु दर 76 है , जबकि मुसलमानों में केवल 70 है [ राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण - 3 , 2005-06 , पृष्ठ 182 टेबल 7.2 ] | अतः व्यर्थ का हो - हल्ला करनेवालों को चाहिए कि सही तथ्य ही अवाम के सामने पेश करें , कुतर्क करके भ्रम की स्थिति न पैदा करें |
  आज हो यह रहा है कि मुस्लिम आबादी को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है | कुछ लोग ज़्यादा बच्चे पैदा करने की बार - बार वकालत कर रहे हैं और धर्माधार पर इस मुद्दे को उठा रहे हैं | एक ओर संघ प्रमुख मोहन भागवत भारत को हिन्दू राष्ट्र में तब्दील करने की बात कर रहे हैं , भाजपा नेता श्यामलाल गोस्वामी [ पश्चिम बंगाल ] ने हिन्दू महिलाओं से कम से कम पांच - पांच बच्चे पैदा करने की अपील की है | कुछ साधु - संत ऐसी ही बातें कर रहे हैं और ज़्यादा बच्चे पैदा करनेवालों को सम्मानित - प्रोत्साहित कर रहे हैं | धर्माधार की बात छोड़कर आंध्रप्रदेश के मुख्य मंत्री चंद्रबाबू नायडू ज़्यादा बच्चे पैदा करने के पक्ष में नये तर्क दे रहे हैं | उनका कहना है कि अगर ज़्यादा बच्चे नहीं पैदा किये गये , तो भारत की स्थिति भी जापान जैसी हो जाएगी , जहाँ बूढ़ों की संख्या अधिक है | मगर इन सब बयानों का एक और पक्ष भी है , जिससे इन्कार नहीं किया जा सकता | प्रसिद्ध समाजविज्ञानी सतीश देशपांडे का यह कहना सही है कि '' जनगणना के आंकड़ों की तर्कसंगत व्याख्या करने के बजाय खौफ़ पैदा करने की कोशिश की जा रही है | दुनिया भर में अल्पसंख्यकों की आबादी बहुसंख्यक लोगों की आबादी से तेज़ रफ़्तार से बढ़ती है | इसकी बहुत बड़ी वजह इस समुदाय का पिछड़ापन होता है | भारत में भी यही प्रवृत्ति है , जहाँ पर मुसलमानों की आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति ठीक हुई है , वहाँ उनकी आबादी में वृद्धि दर कम है | दक्षिण भारत के कई राज्यों में मुसलमानों की आबादी की वृद्धि दर उत्तर भारत के हिन्दुओं की आबादी की वृद्धि दर से कम है | आबादी में वृद्धि का मसला कौम , धर्म से नहीं बल्कि भौतिक स्थितियों से जुड़ा हुआ है और इसे इसी सन्दर्भ में देखा जाना चाहिए | ''  उक्त पत्रिका की आवरण कथा में शहरी एवं जनसंख्यात्मक मामलों के विशेषज्ञ अनंत कृषणन का बयान भी उद्धरित किया गया है , जिसमें उन्होंने कहा है कि '' सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए आबादी की वृद्धि दर पर राजनीति की जा रही है | '' विभिन्न संस्थाओं से जुड़े अर्थशास्त्री अमिताभ कुंडू का मुस्लिम आबादी पर मानना है कि '' यह स्वाभाविक - सा ट्रेंड है | इसमें कुछ भी हैरतअंगेज नहीं है और न ही इस पर कोई हंगामा खड़ा करने की ज़रूरत है | ''  

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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