Feb 21, 2015

ऐसे बयान क्यों ?


लगता है , अब झूठे बयानों से सद्भावना आएगी ! मुफ्ती मुहम्मद इलियास ने पिछले दिनों विवादित बयान देते हुए कहा है कि भगवान शंकर मुस्लिमों के पहले पैगंबर हैं। उन्होंने कहा कि इस बात को मानने में मुसलमानों को कोई गुरेज नहीं है। उन्होंने यह भी गलत - भ्रामक बात कही कि मुसलमान भी सनातन धर्मी हैं और हिंदुओं के देवता शंकर और पार्वती हमारे भी मां-बाप हैं। उन्होंने यह झूठी बात भी जोड़ी कि शंकर जी लंका में आए थे। हमारे इस्लाम धर्म के पहले पैगम्बर हैं। हम यहीं पैदा हुए हैं। यहीं हमारा कर्म और धर्म क्षेत्र है। इसलिए हमें इससे प्यार है। सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा। उनकी अन्य बातें भी आपत्तिजनक हैं |
 मसलन उनका यह कहना कि देश के मुसलमान हिंदू राष्ट्र के विरोधी नहीं हैं। मीडिया में बताया गया कि मुफ़्ती साहब का संबंध जमीअत उलेमा से है , हालाँकि जमीअत ने इसका खंडन किया है | मीडिया में यह खबर भी आई कि जमीअत का एक प्रतिनिधिमंडल गत 19 फरवरी को अयोध्या आया था। जमीयत बलरामपुर में कौमी एकता का कार्यक्रम करने जा रहा है। इसी कार्यक्रम में अयोध्या के साधु-संतों को भी आमंत्रित करने के लिए प्रतिनिधिमंडल अयोध्या आया था। इस दौरान मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल ने राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सतेंद्रदास और शनि धाम के महंत हरदयाल शास्त्री के साथ मिलकर आतंकवाद का पुतला फूंका।
ऐसा लगता है कि मुफ़्ती साहब को न तो इस्लाम की जानकारी है और न ही हिन्दू धर्म की | यह भी संभव है कि अपने घिनौने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उन्होंने ऐसा बयान दिया हो , जिसे किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता | अगर मुफ़्ती साहब ने जानबूझ कर बयान दिया है , तो भी उन्हें जनता के बीच गलतफहमियां फैलाने का अधिकार कहाँ से मिल गया | 
हिन्दू धर्म की मान्यता है कि सृष्टि का आरंभ मनु और सतरूपा से हुआ , जिन्हें शंकर जी ने आशीर्वाद दिया था | कथा है कि मनु और सतरूपा परमब्रह्म  की तपस्या कर रहे थे | कई वर्ष तपस्या करने के बाद शंकर जी  ने स्वयं पार्वती  जी से कहा कि मैं, ब्रह्मा और  विष्णु कई बार मनु सतरूपा के पास वर देने के लिये आये , पर उन्होंने वर नहीं माँगा | इसका उल्लेख तुलसी दास जी द्वारा रचित रामचरितमानस में भी मिलता है-  '' बिधि हरि तप देखि अपारा। मनु समीप आए बहु बारा। '' कहने का मतलब यह कि जिनसे सृष्टि का आरंभ हुआ , वे मनु - सतरूपा थे | 
ज़ाहिर है , तथ्यहीन बातों से सद्भावना नहीं पैदा हो सकती , अपितु गलत फहमियां फैलती हैं , जो सद्भावना की दिशा में बड़ी बाधा है | लखनऊ के ईदगाह इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा है कि इस तरह के बयान से मुसलमानों पर कोई असर नहीं होता। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने कहा कि मुफ्ती साहब धर्म के नाम पर विवाद न खड़ा करें। इस तरह के बयान से पहले वह हिंदू धर्म के बारे में जानें, क्योंकि शंकर जी हिंदू धर्म की आस्था का केंद्र हैं। फैजाबाद के शहर उलेमा ने कहा है कि भगवान शंकर को मुसलमानों का पहला पैगंबर बताना उनका अपना विचार है। उनके मुताबिक, 'हर धर्म अपनी धार्मिक आस्था के आधार से समाज से जुड़ा है। हिंदू धर्म के मानने वालों व इस्लाम धर्म के मानने वालों का अलग-अलग इतिहास है और इसे किसी से जोड़ा नहीं जा सकता।'
- डॉ . मुहम्मद अहमद 

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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