Jan 23, 2015

धार्मिक छवि के सिक्के और देश की धर्म निरपेक्षता

धार्मिक छवि के सिक्के और देश की धर्म निरपेक्षता 
भारतीय राजनीति दलितों-स्‍वर्णों , अल्‍पसंख्‍यकों और बहुसंख्‍यकों के बीच सिमटती जा रही है और इससे हिन्‍दुस्‍तान की धर्म निरपेक्षता वाली छवि दागदार होती जा रही है। इस प्रकार की  राजनीति के पीछे आर्थिक साम्राज्‍यवाद के हाथ होने से काई भी इन्‍कार नहीं कर सकता, और न ही इनके दुष्‍परिणामों से। हमारे देश में अब जिस तरह के मंजर दिखाई देने लगे है उनमें राजनैतिक दलों को भले ही वोटों की लहलहाती फसल दिखाई दे रही हो, मगर इन परिस्‍थितियों के चलते देश की धर्मनिरपेक्षता वाली छवि क्षतिग्रस्‍त होती जा रही है | सभी जानते हैं कि हमारा देश हिन्‍दू राष्‍ट्र नहीं है | यहां अनेक धर्मों के अनुयायी रहते हैं । धर्मनिरपेक्षता को संवैधानिकता प्राप्त है | हमारे संविधान की प्रस्‍तावना में कहा गया है कि भारत एक सम्‍पूर्ण प्रभुत्‍व सम्‍पन्‍न, समाजवादी,धर्म निरपेक्ष , लोकतन्‍त्रात्‍मक गणराज्‍य है। 
सत्य धर्म किसी के लिए ख़ास नहीं है | धर्म भेदभाव व बँटवारे के लिए नहीं होता। हो भी नहीं सकता। धर्म कोई भी हो , वह बाँटना नहीं सिखाता। मगर संवैधानिक रूप से सरकार किसी एक धर्म की पक्षधर नहीं हो सकती | इसी वजह से भारतीय रिज़र्व बैंक ने जब सिक्कों पर धार्मिक तस्वीरों का उत्कीर्णन करवाया तो इसका ज़बरदस्त विरोध हुआ | पांच रुपये के सिक्के पर माता वैष्णो देवी देवी की तस्वीर छापने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने विगत 12 नवंबर को रिजर्व बैंक से पूछा कि किन नियमों के तहत बैंक ने सिक्कों पर हिंदू देवी की तस्वीर छापी। मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी। कोर्ट ने कहा कि सरकार को किसी धर्म का प्रचार करते नहीं दिखना चाहिए और धर्मनिरपेक्षता शब्द का अर्थ सही संदर्भ में लिया जाना चाहिए। 
सिक्कों पर वैष्णो देवी की तस्वीर छापने के विरोध में नफीस काजी और अबू सईद एवं  एडवोकेट सचिन मिश्रा ने वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के खिलाफ अलग - अलग जनहित याचिकाएं दायर की थीं। याचिकाकर्ता नफ़ीस काजी का कहना है भारत राज्य 'सर्व धर्म समभाव' में यकीन रखता है। देश की मुद्रा पर किसी मंदिर या मस्जिद की तस्वीर लगाना उचित नहीं है। नवंबर 2013 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से माता वैष्णो देवी की तस्वीर वाले सिक्के जारी किये गये थे। 
इसके बाद 16 जनवरी 2014 को पांच और दस  रूपये के सिक्कों पर फिर उक्त तस्वीर मुद्रित की गयी |
 इन सिक्कों को जारी करने के संदर्भ में तत्कालीन केंद्र सरकार ने मार्च में मामले की सुनवाई की दौरान तर्क दिया था कि माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की सिल्वर जुबली के मौके पर स्मृति के रूप में क्वॉइंज एक्ट के तहत सिक्के जारी किये गये थे। इससे पहले स्वामी विवेकानन्द की 150 वीं , मोतीलाल नेहरु की 150 वीं और मदनमोहन मालवीय की भी 150 वीं जयन्तियों पर तथा कूका आन्दोलन के 150 वर्ष पूरे होने पर ये सिक्के जारी किये गये थे | सरकार 2010 में बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर के 1000 साल पूरे होने के मौके पर इस मंदिर की छवि वाला 5 रुपये का सिक्का जारी कर चुकी है | 
 याचिकाओं में रिजर्व बैंक को 2010 और 2013 में धार्मिक चिन्ह के साथ जारी सिक्कों को वापस लेने का निर्देश देने की अपील की गई थी | जनहित याचिकाओं में कहा गया कि केंद्र को एक राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश दिया जाना चाहिए जिसके तहत किसी भी धर्म के चिह्न को सरकार की मूर्त या अमूर्त संपत्ति बनाने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए | याचिका में कहा गया कि ये चिह्न धर्मनिरपेक्ष छवि को आघात पहुंचाते हैं | इस मामले में उस समय भी कोर्ट का रूख कड़ा था। मार्च में भी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था, 'यह काम कैसे (सिक्कों पर माता की तस्वीर लगाना) हो सकता है? राज्य कैसे किसी धार्मिक प्रतीक का इस्तेमाल कर सकता है? राज्य को धर्म से बिल्कुल अलग रहना चाहिए?’

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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