Jan 23, 2015

काले धन को वापस लाने के लिए ठोस प्रयास करे केंद्र सरकार

काले धन को वापस लाने के लिए ठोस प्रयास करे केंद्र सरकार 
भारत कालाधन विदेश में जमा करने के मामले में चौथे स्थान पर है और 2004-2013 के बीच देश से 51 अरब डालर सालाना बाहरले जाया गया। यह बात 9 दिसंबर 15 को अमेरिका की एक विचार संस्था ने कही। वाशिंगटन की एक अनुसंधान एवं सलाहकार संस्थान ग्लोबल फिनांशल इंटेग्रिटी (जीएफआई) द्वारा जारी रपट के मुताबिक भारत का रक्षा बजट 50 अरब डालर से कम का है। चीन सालाना 139 अरब डालर की निकासी के साथ इस सूची में शीर्ष पर है जिसके बाद रूस (104 अरब डालर सालाना) और मेक्सिको (52.8 अरब डालर सालाना) का स्थान है। रपट में कहा गया कि 2013 के दौरान विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में गैरकानूनी धन, कर चोरी, अपराध, भ्रष्टाचार और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से पैदा रिकार्ड 1,100 अरब डालर कालाधन विदेश में जमा किया गया। रपट में 2013 तक के आंकड़े उपलब्ध हैं। जीएफआई के अनुमान के मुताबिक कुल मिलाकर 2004-2013 तक के दशक के दौरान भारत से 510 अरब डालर की राशि भारत से बाहर गई जबकि चीन से 1,390 अरब डालर और रूस से 1,000 अरब डालर कालाधन विदेश गया।
मोदी सरकार ने विदेशों से काला धन वापस लाने के लिए एस आई टी की एक समिति बनायी थी | उस समय इस क़दम को ऐतिहासिक बताकर स्वागत किया गया था , लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद इस दिशा में कोई उल्लेखनीय प्रगति न होना वाकई तशवीशनाक और चिंताजनक है | अब भाजपा वाले ख़ुद इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं | भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कह दिया है कि सरकार विदेशों में जमा काला धन वापस नहीं ला पायेगी | दूसरी ओर केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली कहते हैं कि काले धन की वापसी में लंबी प्रतीक्षा की ज़रूरत नहीं है | इन बयानों के बीच यह सच भी सामने रहे कि केंद्र सरकार में एस आई टी गठित करने की घोषणा के बाद  इस विषय पर कोई गंभीर चर्चा नहीं हो पा रही है | एसोचैम के अनुसार , विदेशों में भारतीयों के दो हज़ार अरब डालर जमा हैं | आये दिन विदेशी बैंकों से रक़म निकाले जाने की सूचनाएं भी आती रहती हैं | कुछ समय पहले एसोचैम की कानूनी मामलों की समिति के अध्यक्ष आरके हांडू ने कालेधन पर एसोचैम की अध्ययन रिपोर्ट जारी करते हुए कहा था कि विदेशों में पड़े कालेधन को वापस लाने के लिए 'माफी योजना एक बेहतर और व्यावहारिक योजना है।'सरकार ने 1997 में इस प्रकार की 'आय की स्वैच्छिक घोषणा योजना (वीडीआईएस)' के जरिए 10,000 करोड़ रुपये जुटाए थे , हालांकि इस योजना को लेकर विरोध के स्वर उठे और कहा गया कि यह योजना ईमानदार करदाताओं को दंडित करने कर चोरी करने वालों को प्रोत्साहन देने के समान है। सरकार ने बाद में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया, जिसमें कहा गया कि वीडीआईएस इस तरह की आखिरी योजना है और वह भविष्य में ऐसी कोई योजना नहीं लाएगी। हांडू ने इसके जवाब में कहा कि सरकार इस मामले में फिर से सुप्रीम कोर्ट जा सकती है और मंजूरी ले सकती है। स्पष्ट है , सरकार इस दिशा में कुछ नहीं सोच रही है | उसे जी - 20 देशों [ स्विट्जरलैंड और मारीशस समेत 45 देश ] की इस सहमति पर शायद अधिक भरोसा हो गया है कि ये देश 2017 की शुरुआत से ये आपस में सभी बैंकों की सूचना टैक्स अधिकारियों के साथ ऑटोमैटिक सालाना साझा करेंगे। 
बताया जाता है कि ओईसीडी टैक्स फोरम जो कि विभिन्न देशों के बीच पारदर्शिता के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान पर एक मिशन के तहत काम कर रहा है, सितंबर 2017 से 2018 के अंत तक यह अपनी प्रतिबद्धता को पूरी कर सकेगा , लेकिन यह काले धन को वापस लाने में कितना कारगर होगा , यक़ीनी तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता | इस मामले में वर्तमान केंद्र सरकार पूर्व सरकारों से भिन्न नहीं दिखती | पूर्व सरकारों की तरह यह भी दिखावे पर यक़ीन रखती है | पूर्व की कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने 21 मई 2012 को काले धन पर श्वेतपत्र जारी किया था , जिससे यह लगा था  कि वह काले धन की समस्या से निबटने के प्रति गंभीर है , लेकिन आगे चलकर यह दिखावे का क़दम साबित हुआ | तत्कालीन वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा पेश इस दस्तावेज़ में भ्रष्टाचार के मामलों की तेज़ी से जाँच और दोषियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई के लिए जल्द से जल्द लोकपाल और लोकायुक्त जैसी संस्थाओं का गठन किए जाने की बात कही गयी थी | तत्कालीन वित्तमंत्री ने आयकर विभाग में अभियोजन पक्ष को मज़बूत बनाने और प्रत्यक्ष कर क़ानूनों व नियमों को युक्तिसंगत बनाने की ओर इशारा करते हुए त्वरित अदालतों के गठन एवं अपराधियों को कड़ी सज़ा के प्रावधानों का समर्थन किया था | कुल 97 पेज के इस श्वेत पत्र में किसी आर्थिक अपराधी का नाम नहीं लिया गया था और न ही इस बारे में कोई जानकारी दी गयी थी कि दरअसल कितना काला धन विदेशों में है | सरकार ने इस सिलसिले में अन्य एजेंसियों के आकलन शामिल किए थे |अफ़सोस की बात यह है कि कांग्रेस ने श्वेतपत्र तो पेश कर दिया , मगर कभी इस दिशा में कोई गंभीर क़दम नहीं उठाया | अब मोदी सरकार भी पूर्व सरकार की ही पैरवी करती नज़र आती है | सरकार को चाहिए कि वह काला धन स्वदेश लाने के लिए ठोस प्रयास करे , ताकि देश की चरमराती अर्थव्यवस्था पर रोक लग सके



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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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