Jan 16, 2015

यह क्या हुआ !?

यह क्या हुआ !?

क्या मोदी लहर अब नहीं चल रही ? उत्तर प्रदेश छावनी परिषद के हाल में संपन्न हुए चुनाव यही बता रहे हैं !  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के चुनाव क्षेत्र लखनऊ में हुए छावनी परिषद के चुनावों में भाजपा को करारा झटका लगा है। दोनों ही स्थानों पर उसके समर्थित सभी प्रत्याशी हार गए। इसके अलावा आगरा में भी भाजपा को करारा झटका लगा है , जहां पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा गया था। यहां की सभी आठ सीटों में भाजपा को सिर्फ एक ही सीट मिल पाई | मथुरा में भी भाजपा को सिर्फ दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। 
वाराणसी में सभी सीटों पर निर्दल प्रत्याशियों ने बाज़ी मारी।इस चुनाव में कुल 36 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था और मतदान में करीब 15 हजार मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। लखनऊ में भी भाजपा की दुर्गति हुई | भाजपा ने बोर्ड की सभी आठ सीटों के चुनाव में एक-एक प्रत्याशी को समर्थन दिया था, लेकिन उनमें से कोई भी जीत नहीं सका। उधर आगरा छावनी परिषद् के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सोनम यांगडोल ने बताया कि आठ वाडरें में से भाजपा केवल एक सीट पर दर्ज कर सकी, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों ने सात सीटों पर जीत हासिल की। इनमें पांच प्रत्याशी पहली बार निर्वाचित हुए हैं। 
मथुरा छावनी परिषद के सात वार्डों के चुनाव में भाजपा को सिर्फ दो पर ही विजय मिली। इन चुनावों के परिणाम गत 11 जनवरी को घोषित किये गये |इन परिणामों के बाद यहां भाजपा खेमे में अजीब सन्नाटा है। फिर भी कुछ बातें कही ही जा रही हैं | भाजपा के प्रान्तीय अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने छावनी परिषद के चुनाव में पार्टी की हार पर कहा कि जहां भाजपा को अपना चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने की इजाजत दी गयी, वहां पार्टी ने बढ़त बनायी और वाराणसी, कानपुर, लखनऊ और फैजाबाद में उसे अपने चुनाव निशान का इस्तेमाल नहीं करने दिया गया। इसी वजह से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। 
भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक भी छावनी परिषद चुनाव में पार्टी की हार को स्वीकार करते हुए कहते हैं और हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ सपा की और से विकलांग कल्याण मंत्री अम्बिका चौधरी ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जो सपने दिखाए थे , उनकी हकीक़त सामने आने लगी है। भाजपा उपचुनाव में 11 में से नौ सीटों पर हारी। चौधरी ने कहा, ‘‘अब भाजपा की हार का सिलसिला शुरू हो गया है। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि आने वाले समय में भाजपा हर चुनाव हारेगी।’’ निश्चित रूप से ये चुनाव दिल्ली विधानसभा चुनाव पर भी असर डालेंगे , जहाँ सात फ़रवरी को मतदान होना है | बहरहाल भाजपा की यह हार उसके लिए किसी सदमे से कम नहीं है | सच है केवल नारों से काम नहीं चलता , बदलाव के लिए निरंतर कार्य की जरूरत होती है |  

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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