Jan 11, 2015

मदरसों की अज़ीम ख़िदमात

मदरसों की अज़ीम ख़िदमात
देश के मदरसों पर आतंकवाद के फरोग के झूठे आरोप लगाये जाते रहे हैं | ये आरोप संघ परिवार की ओर से बार - बार लगाये जा रहे हैं | अभी कुछ दिनों पहले 14 सितंबर 2014 को उन्नाव से भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने यह मूर्खतापूर्ण , भ्रामक और गलत आरोप लगा दिया कि '' मदरसों में आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है | वहां केवल कुरआन की शिक्षा देकर आतंकवादी और जिहादी बनाना राष्ट्र के हित में नहीं है | '' ज़ाहिर है , यह बयान बहुत आपत्तिजनक है | इस अनर्गल प्रलाप में कम्युनिस्ट पार्टी के लोग भी शरीक होते रहे हैं
पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने 19 जनवरी 2002 को  सिलीगुड़ी में माकपा के जिला सम्मेलन मेंसार्वजनिक रूप से कहा कि गैरपंजीकृत मदरसों में बच्चों के दिमागों में मजहबी जहर घोला जा रहा है, वे आई.एस.आई. के अड्डे बन गए हैं। उनका पंजीकरण और आधुनिकीकरण न हुआ तो उन्हें बंद करा दिया जाएगा। इन प्रलापों का एक जवाब ख़ुद भाजपा के क़द्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी ने दिया था | उन्होंने संसद को बताया था कि देश के मदरसों में आतंकवादी गतिविधियाँ नहीं पाई गयीं | अब एक बार फिर इन आरोपों पर गत 12 नवंबर को केन्द्र सरकार की रिपोर्ट ने विराम लगा दिया। सरकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें जिहादी विचारधारा का प्रसार नहीं किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने कुछ समय पहले देश में देवबंदी, अहले हदीस, जमाअत और बरेलवी विचारधाराओं से जुड़े मदरसों की गतिविधियों को लेकर एक आंतरिक अध्ययन कराया था। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए इस गुप्त अध्ययन की रिपोर्ट हाल में ही सरकार को सौंपी गई है। 
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन मदरसों में भारतीय शिक्षक हैं, वे जिहादी गतिविधियों से नहीं जुड़े हैं और वहां इस तरह की विचारधारा का प्रचार-प्रसार भी नहीं किया जा रहा है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ मदरसे, जिनमें विदेशी उस्ताद या शिक्षक हैं, भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। ऐसे मदरसे मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और असम के सीमावर्ती क्षेत्रों में हैं और उनमें विशेष रूप से बंगलादेश से आए लोग शिक्षक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रोचक बात यह है कि इन्हीं क्षेत्रों के वे मदरसे, जिनमें भारतीय शिक्षक हैं, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के कुछ मदरसों में भी विदेशी शिक्षकों के होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। 
सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों से इन सभी मदरसों के बारे में विस्तार से रिपोर्ट तैयार करने और इनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कहा है। साथ ही पश्चिम बंगाल , त्रिपुरा , असम में चल रहे कुछ मदरसों पर सरकार की नज़र है | मोदी सरकार भी मदरसा आधुनिकीकरण योजना चला रही है , जिसका गुप्त उद्देश्य मदरसों को उनके लक्ष्य से फेरना है | देश के अधिकांश मदरसे स्वयं से आधुनिक शिक्षा को अपने पाठ्यक्रमों को शामिल करते रहे हैं
अतः उन पर इसके लिए दबाव बनाना या धन देकर उन्हें इसके लिए आमादा करना अनुचित है | अब सरकार ने कहा है कि उन मदरसों को धन आवंटित नहीं किया जाएगा , जो आतंकवाद से किसी भी रूप में जुड़े होंगे | मतलब यह हुआ कि अभी भी सरकार ने सभी मदरसों को क्लीन चिट नहीं दिया है | यही बात यह है कि मदरसों को उनके जनता को शिक्षित करने के उनके उद्देश्य से हटाने के लिए ही ये सब दांव - पेंच खेले जा रहे हैं , जिनसे सावधान रहना होगा | मदरसे जनकल्याण के काम में सदियों से लगे हैं | ये देश की आज़ादी की लड़ाई से लेकर आज तक देश और समाज की अज़ीम खिदमत में लगे हुए हैं |



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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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