Jan 2, 2015

देश में हर साल दो सौ महिलाओं की डायन बताकर हत्या


डायन विरोधी क़ानून की ज़रूरत 

हमारे देश में कई महिला विरोधी कुप्रथाएं प्रचलित हैं | इनमें एक डायन कुप्रथा भी है , जिसके ख़िलाफ़ अभियान भी छेड़ा जाता है , लेकिन रोक लगने या इसमें कमी आने की खबर अभी तक नहीं मिल सकी है ! एक अध्ययन में यह बात आई है कि देश में हर साल लगभग दो सौ महिलाओँ को डायन होने के आरोप में अपनी जान गवानी पड़ती है | स्वयं सेवी संस्था ' रूरल लिटिगेशन एंड एनटाइटलमेंट सेंटर ' के प्रभारी अवधेश कौशल के अनुसार , झारखण्ड , ओडिशा और हरियाणा के साथ ही दक्षिण भारतीय राज्य आँध्रप्रदेश में भी इस तरह की घटनाएं अधिक होती हैं | इस कुप्रथा की ज्यादातर पीड़ित अकेले रहने वाली विधवा महिलाएं हैं , जिनकी जमीन या सम्पति हड़पने के लिए डायन बना दिया जाता है | इस संस्था के एक अध्ययन में यह बात भी कही गयी है कि महिलाओं को डायन घोषित करने पर ही बस नहीं किया जाता , अपितु हद से बहुत आगे बढ़कर इन महिलाओँ को बहुत ही बेहरहमी से सार्वजानिक रूप से कत्ल किया जाता है  | पहले इन्हे पेशाब पीने या फिर मानव मल तक खाने के लिए विवश किया जाता है फिर सब लोगो के सामने इन्हे निर्वस्त्र करके पूरे गाँव में घुमाया जाता है | फिर पेड़ में बांध कर उस समय तक ईट और पत्थरों से मारा जाता है , जब तक वह महिला खुद को डायन [ चुड़ैल , डाकिनी ] न स्वीकार कर ले | फिर बहुत ही वीभत्स और निर्मम ढंग से गला रेत कर उसकी हत्या कर दी जाती है | साथ - साथ सभ्य समाज होने का ढोंग और दावा समानांतर रूप से चलता रहता है | राष्ट्रीय महिला आयोग के मुताबिक भारत में विभिन्न प्रदेशों के पचास से अधिक जिलों में यह कुप्रथा सबसे ज्यादा फैली है |देश के इन जिलों में ऐसी औरतों की सूची लंबी है जिन्हें डायन करार देकर जुल्मोसितम का शिकार बनाया जा चुका हैं | यह सिलसिला अब भी जारी है |इस कुप्रथा की कुछ मिसालें इस प्रकार हैं - राजस्थान में टोंक जिले की रहनेवाली कमला मीणा तीन बच्चो की माँ है | पति ने एक दिन उसे डायन करार दे दिया और दूसरी शादी कर ली | कमला ने पत्रकारों को बताया , “ दस साल हो गए मुझे दर-दर की ठोकरें खाते हुए |  जिसके भी दरवाजे पर दस्तक दी, खाली हाथ लौटा दी गई | कस्बे  में कोई मकान तक किराये पर नहीं देता | जैसे ही पता चलता है ,मुझे मकान खाली करने के लिए कह दिया जाता है | ''कमला ने पत्रकारों को बताया कि उसे आधी रात को घर से निकाल कर मारा पीटा गया | उसने अपने जिस्म पर उभरे कुल्हाड़ी की मार के जख्म के निशान भी  दिखाए | कमला के मुताबिक़  न उसे पुलिस से मदद मिली और न ही अदालत से न्याय |  हिमाचल प्रदेश की निर्मल चंदेल जब 24 साल की थी , उसके पति का देहावसान हो गया , जिसके लिए उसे जिम्मेदार ठहराया गया | दक्षिण राजस्थान की सुन्दर बाई विधवा है | उन्हें उनके भतीजे ने ही डायन घोषित कर दिया | एक दिन मृत घोषित कर पेंशन बंद करा दी. क्योंकि वह मेरी सम्पति हड़पना चाहता है | अब  पेंशन वापस शुरू हो गई है , मगर अब भी मैं डरी हुई हूँ | एक अन्य घटना झारखंड के आदिवासी बहुल लोहरदगा ज़िले के कुड़ू थाना क्षेत्र के टाटी डुमरटोली गांव की है | पीड़िता के पति दुतिया मुंडा एक साधारण किसान हैं | बेटे भी खेती-बाड़ी करते हैं | पीड़िता के पुत्र उमेश मुंडा के मुताबिक़ छह साल पहले भी उनकी मां की डायन बताकर सरेआम पिटाई की गई थी | उन्होंने अपनी बहन के साथ मिलकर मां को बचाने का प्रयास किया , लेकिन गांव वालों ने उन्हें खदेड़ कर भगा दिया | उनकी मां गुहार लगाती रही, लेकिन उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया गया | पुलिस के मुताबिक़, पांच नवंबर की सुबह गांव में पंचायत बिठाई गई जिसमें कदनी देवी को सज़ा सुनाई गई | इससे पहले भी लोहरदगा से सटे गुमला ज़िले में ऐसी ही घटना हुई थी जब लेमहा गांव में एक विधवा महिला को डायन बताकर उनकी हत्या कर दी गई थी | पुलिस ने बताया कि सुधवा मुंडा के एक बच्चे की मौत हो गई थी और उन्हें शक था कि उसी महिला ने कोई जादू-टोना कर दिया था जिससे बच्चों की मौत हो गई | पुलिस विभाग के एक आंकड़े के मुताबिक़ ,झारखंड में पिछले आठ महीने में डायन बताकर लगभग 40 महिलाओं की हत्या कर दी गई है |
 विधि - विधान और नैतिकता को धता बताकर देश के गांव-देहातों और छोटे कस्बों में अब भी कोई ओझा, भोपा , गुनिया और तांत्रिक किसी सामान्य औरत को कभी भी डायन घोषित कर देता है | आम तौर पर औरत के घर , परिवार और रिश्तेदार ऐसा करवाते हैं | देखा जाता है कि इस कुप्रथा के ख़िलाफ़ खाप पंचायतें भी अपना मुंह नहीं खोलतीं | महाराष्ट्र में सामाजिक कार्यकर्ता विनायक तावडे़ और उनका संगठन कई सालों से डायन प्रथा के विरुद्ध अभियान चला रहे है | तावडे़ के मुताबिक आदिवासी इलाकों में ये प्रथा एक बड़ी समस्या बनी हुई है | वे बताते हैं कि कैसे एक ओझा गाव में एक महिला को डायन करार देने का उपक्रम करता है -  “जैसे गांव में कोई बीमार हो गया,तो कुछ लोग जवार के दाने बीमार के ऊपर सात बार घुमाकर ओझा के पास ले जाते हैं |ओझा एक दाना इस तरफ, एक उस तरफ रख कर मन्त्र बोलना शुरू करता है | फिर कहता है - हाँ, .उसे डायन ने खाया है | उस डायन का घर नाले के पास है | उसमे पेड़ है, इतने जानवर है ,आम के पेड़ है | महू का पेड़ है ,इतने बच्चे है! ” मि . तावडे आगे बताते हैं, “इनमे जो बातें अनुमान से किसी पर लागू  हो जाए , उस औरत को डायन करार दिया जाएगा | हमने ऐसे ही एक ओझा को गिरफतार करवाया है | ” राष्ट्रीय महिला आयोग की निर्मला सावंत प्रभावलकर मानती हैं कि देश के पचास - साठ ऐसे जिले है जहाँ इस कुप्रथा के उदाहरण आये दिन मिल जाते हैं | महिला को डायन, कही डाकन, तेनी या टोनी, पनव्ती ,मनहूस और ऐसे ही नामों से लांछित कर उसे घर से निकाल दिया जाता है | यह  समस्या शिक्षित वर्ग में भी है | कभी ऐसा भी होता है कि जब कोई महिला राजनीति में आती है ,तो लोग कहने लगते हैं कि वह जहां भी हाथ लगाएगी, नुकसान हो जायेगा | आप चुनाव हार जायेगे ,ऐसा कह कर लांछित किया जाता है | पीड़ित महिलाओं में ज्यादातर दलित, आदिवासी या पिछड़े  वर्ग से है | सामाजिक कार्यकर्ता तारा अहलूवालिया ने राजस्थान में आदिवासी बहुल इलाकों में ऐसी पीड़ित महिलाओं की मदद की है | उनके अनुसार ,  “ लगभग 36 ऐसे मामले मेरे पास है जिनमें औरत को डायन घोषित कर दिया गया |  मगर पुलिस ने कोई मदद नहीं की | इस गंभीर स्थिति में इस कुप्रथा पर कैसे लगाम लग पाएगी ? अहलूवालिया ने कहा, “ यह समय है जब डायन विरोधी कानून बनना चाहिए | अकेले भीलवाड़ा जिले में ही कोई ग्यारह स्थान ऐसे है जो औरत के शरीर से डायन निकालने के लिए जाने जाते है | वहां हर सप्ताह भीड़ लगती है. इन औरतों के साथ हर तरह की हिंसा होती है | ”रांची इंस्टीटयूट ऑफ़ न्यूरो साइकिएट्री एंड एलायड साइसेंज के निदेशक सह मनोवैज्ञानिक डॉ. अमूलरंजन सिंह कहते हैं , “किसी की बीमारी या मौत में भूत-प्रेत, ओझा-गुनी की कोई भूमिका नहीं होती , लेकिन गांवों में अब भी तरह-तरह की भ्रांतिया हैं | इसे जागरूकता के ज़रिए ही दूर किया जा सकता  है | महिला कार्यकर्ता लखी दास डायन कुप्रथा के ख़िलाफ़ कोल्हान इलाक़े में काम करती हैं | उनका कहना है , “ इन मामलों में विधवाएं अधिक प्रताड़ित होती हैं | जनजाति बहुल गांवों में अब भी गहरा अंधविश्वास है |.” उन्होंने बताया कि अध्ययन में पाया गया है कि महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर मैला पिलाया जाता है | उनके बाल काट दिए जाते हैं और उन्हें निर्वस्त्र कर घुमाया जाता है, लेकिन सुदूर इलाक़ों में होनेवाली प्रताड़ना की अधिकतर घटनाएं प्रकाश में नहीं आ पातीं | झारखंड सरकार ने डायन प्रथा उन्मूलन की योजना बनाई है | इस योजना के नाम पर हर साल बीस लाख रुपए ख़र्च किए जाते हैं | यह योजना कारगर नहीं साबित हुई है |  इस कुप्रथा पर रोक के लिए बड़े पैमाने पर काम करने की ज़रूरत है | 

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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