Dec 28, 2014

शरीया इंडेक्स से देश की अर्थव्यवस्था को पंख लगे

शरीया इंडेक्स से देश की अर्थव्यवस्था को पंख लगे 

एस . बी . आई . के शरीया रोके जाने के फ़ैसले से देश के मुसलमान एक बार आहत हुए हैं , जबकि इससे देश की अर्थव्यवस्था ही और मज़बूत होनेवाली थी | शायद यह प्रस्तावित लोकहितकारी फण्ड धर्मान्धता के हत्थे चढ़ गया | इस फण्ड से देश की आर्थिक तरक्की को चार चाँद लगनेवाले थे | शरीया इंडेक्स इसका सबूत है , जिसमें मुसलमानों की उल्लेखनीय भागीदारी है | निश्चय ही इससे भी देश की अर्थव्यवस्था मज़बूत हुई है | वर्तमान सरकार की आर्थिक नीतियों का इसमें दखल है ही | देश का विदेशी पूंजी भंडार 12 दिसंबर को समाप्त हुए सप्ताह में 2.1721 अरब डॉलर बढ़कर 316.8338 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो 19,778.3 अरब रुपये के बराबर है। भारतीय रिजर्व बैंक ने जो आंकड़े जारी किए, उसके अनुसार, विदेशी पूंजी भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा भंडार आलोच्य सप्ताह में 2.4057 अरब डॉलर बढ़कर 292.3604 अरब डॉलर हो गया, जो 18,259 अरब रुपये के बराबर है। विदेशी मुद्रा भंडार को डॉलर में व्यक्त किया जाता है और इस पर भंडार में मौजूद पाउंड स्टर्लिग, येन जैसी अंतर्राष्ट्रीय मुद्राओं के मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। आलोच्य अवधि में देश के स्वर्ण भंडार का मूल्य बिना किसी बदलाव के 18.9852 अरब  डॉलर बरकरार रहा, जो 1,176.6 अरब रुपये के बराबर है। इस दौरान देश के विशेष निकासी अधिकार (एसडीआर) का मूल्य 1.99 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.2282 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो 264 अरब रुपये के बराबर है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) में मौजूद देश के भंडार का मूल्य उक्त अवधि में 25.35 करोड़ डॉलर घटकर 1.26 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो 78.7 अरब रुपये के बराबर है। शरीया इंडेक्स शुरू होने के बाद वित्तीय क्षेत्र में मुसलमानों की भागीदारी बढ़ी है और वे अपने निवेश पर बेहतर रिटर्न पा रहे हैं | इस्लामी कानून में बैंकिंग, शराब, तंबाकू और नशीले पदार्थो समेत कई ऐसी वस्तुओं व सेवाओं का करोबार करने की सख्त मनाही है | इन्हें इस्लामी शरई कानून में हराम और अवैध ठहराया गया है। इसके चलते मुस्लिम समुदाय के लोग वित्तीय क्षेत्र जैसे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड इत्यादि में निवेश नहीं कर पाते थे। 
इस्लामी कानून में बैंक अथवा किसी अन्य वित्तीय संस्थान से ब्याज का लेनदेन करना या उन चीजों का कारोबार करना जिसकी शरीयत में मनाही है, को हराम करार दिया गया है। इसके चलते जहां कई तरह के कारोबार में मुसलमानों की उपस्थिति नगण्य हो गई थी |  इसी को देखते हुए वर्ष 2008 में बंबई शेयर बाजार के प्रबंधन ने तक़वा एडवाइजरी एंड शरीया इन्वेस्टमेंट साल्यूशंस (तासिस) के सहयोग से बीएसई शरीया-50 इंडेक्स शुरू करने का ऐलान किया।  बीएसई शरीया इंडेक्स-50 इस्लामी या शरीया कानून में ब्याज के लेनदेन, सुअर, शराब, तंबाकू, नशीले पदार्थ, सिनेमा, होटल व पारंपरिक वित्तीय सेवाओं जैसे बीमा, बैंक एफडी इत्यादि का कारोबार करने या इसमें अन्य किसी माध्यम से धन लगाकर मुनाफा अर्जित करने पर पूरी तरह से रोक है। शरीयत के इन्हीं नियमों के चलते वित्तीय क्षेत्र में मुसलमानों की घटती भागीदारी को देखते हुए तक़वा एडवाइजरी एंड शरीया इन्वेस्टमेंट साल्यूशंस (तासिस) ने बंबई शेयर बाजार के पास एक ऐसा प्रस्ताव भेजा ताकि शेयर बाजार और  देश के अन्य वित्तीय क्षेत्रों में मुसलमानों की भागीदारी बढ़ाई जा सके। इस प्रस्ताव के तहत बंबई शेयर बाजार में सेंसेक्स, मिडकैप और स्मालकैप की तरह एक शरीया इंडेक्स बनाने का सुझाव दिया गया। इस इंडेक्स में ऐसा कारोबार करने वाली कंपनियों को शामिल किया गया , जिनका कारोबार शरीया कानून में वैध है। इस इंडेक्स में बुनियादी ढांचा, कपड़ा, कैपिटल गुड्स,एफएमसीजी, आईटी और टेलीकाम क्षेत्र की कंपनियों को शामिल किया गया।
 इस इंडेक्स को तासिस ने कई इस्लामी विद्वानों [ उलमा हज़रात ] की सहमति से तैयार किया। मौजूदा समय में दुनिया भर के शेयर बाजारों की तुलना में बंबई शेयर बाजार के शरीया इंडेक्स में सबसे ज्यादा कंपनियां शामिल हैं। इस्लामी देशों में भी शेयर बाजारों में इस प्रकार के इंडेक्स में मुस्लिम समुदाय के लोग शेयर कारोबार में लगे हैं। इस्लामी आलिमों का कहना है कि शरीयत में वैध बताए गए कारोबार को करना या उस कारोबार को करने वाली कंपनियों के शेयरों में लेनदेन करने से शरीयत कानून का उल्लंघन नहीं होता। बांबे स्टाक एक्सचेंज (बीएसई) शरीया इंडेक्स पर खास नजर रखता है और यह देखता है कि अगर कोई कंपनी शरीया कानून से हटकर अपना धन किसी ऐसी योजना या कारोबार में लगाती है जिसकी शरीया कानून में मनाही है तो उस कंपनी को शरीया इंडेक्स से हटा दिया जाता है। एसएंडपी बीएसई 500 शरीया इंडेक्स ने पिछले पांच साल में निवेशकों को लगभग 14 फीसद का रिटर्न दिया है। हालांकि मौजूदा समय में शेयर बाजार में शरीया इंडेक्स वाले शेयरों में निवेशकों की संख्या में इजाफा हुआ है ,लेकिन निवेशकों का रुझान इंट्रा ट्रेडिंग की जगह लंबी अवधि के शेयरों में निवेश के प्रति ज्यादा है। इससे शेयरों का ट्रेडिंग वाल्यूम बहुत ज्यादा नहीं रहा है। शरीया इंडेक्स में सिर्फ मुस्लिम ही नहीं बल्कि अन्य निवेशकों ने भारी मात्रा में धन निवेश किया है। इससे पता चलता है कि इस इंडेक्स की लोकप्रियता बढ़ी है। वित्तीय समावेशन में काफ़ी मददगार शरीया इंडेक्स के जरिए वित्तीय क्षेत्र में मुसलमानों की भागीदारी और बढाई जानी चाहिए | शरीया आधारित अन्य उत्पाद भी लांच किये जाने चाहिए | संकीर्णता का त्याग करके सरकार को चाहिए कि एस . बी . आई . का शरीया फण्ड तत्काल लांच करे | 

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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