Dec 28, 2014

क्यों रुका शरीया फंड ?

क्यों रुका शरीया फंड ?
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में शरीया आधारित कंपनियों का अलग से इंडेक्स है , जो 27 दिसंबर 2010 को लांच किया गया था । ये कंपनियां एस एंड पी बीएसई 500 शरीया इंडेक्स में लिस्टेड हैं। एनएसई में सीएनएक्स निफ्टी शरीया इंडेक्स भी है।शरिया इंडेक्स की ग्रोथ बीएसई में बेहतर है। ईडी एसबीआई एफएम डीपी सिंह के मुताबिक़ , जहां बीएसई के अन्य इंडेक्स ने रिटर्न करीब 14 फीसदी दिया है। वहीं शरिया इंडेक्स का रिटर्न 18 फीसदी रहा है। इसमें निवेश के फ़ायदे और धन - संग्रहण में इसकी महती भूमिका को देखते हुए सेबी ने एस बी आई को इस्लामिक इक्विटी फंड लाने की इजाज़त दी थी , जिसे एक दिसंबर 2014 से लागू किया जाना था , मगर बाह्य दबाव के चलते एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट ने इसे टाल दिया गया है। 
 बताया जाता है कि हिन्दुत्ववादी इस क़दम से बेहद नाराज़ थे | इसे तुष्टीकरण तक बता दिया गया | कुछ अख़बारों ने इसके ख़िलाफ़ मुहिम चला रखी थी | यह विवाद पैदा किया जा रहा था कि क्या इस्लामिक फंड के बाद जैन, सिख, ईसाई फंड भी लाए जाएंगे? ज़ाहिर है , सार्वजनिक क्षेत्र के अग्रणी भारतीय स्टेट बैंक द्वारा इस्लामिक इक्विटी फंड जारी हो जाता तो देशभर के 17 करोड़ मुसलमानों के लिए निवेश के लिए अच्छा अवसर होता और देश का वित्तीय घाटा कम होता , तो निश्चित रूप से देश की अर्थव्यवस्था और मज़बूत होती | बैंक के एक अधिकारी के अनुसार , इस फंड में एक अरब रूपए की राशि का निवेश होता |
 साथ ही अगर यह फंड लॉन्च होता तो ब्रिटेन के बाद भारत विश्व में दूसरा ऐसा गैर- मुस्लिम  देश बन जाता, जिसके किसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की सहायक कंपनी शरीया बॉन्ड लेकर आती। 
आज देश में निजी क्षेत्र में अमेरिका की गोल्डमैन सैक्स, टोरस और टाटा के शरीया फंड हैं , लेकिन सरकारी स्तर पर इसे लांच होने से लोग बढ़ - चढ़ कर इसमें निवेश करते , भले ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शुरू से ही कहता रहा हो कि यह फंड वह नहीं, बल्कि एसबीआई एफएम ला रही है। यह एसबीआई की ही सहयोगी कंपनी है, जो एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से रजिस्टर्ड है। 
 यह संयुक्त भागीदारी वाली कंपनी है। इसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 63 फीसदी और फ्रांस की कंपनी अमूंडी की 37 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके साथ ही एसबीआई की सीएमडी अरुंधति भट्‌टाचार्य एसबीआई एफएम कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स- एएमसी (असेट मैनेजमेंट कंपनी) की चेयरपर्सन और एसोसिएट डायरेक्टर हैं। वास्तव में यह सरकारी प्रयास था , जिसे सांप्रदायिकों ने नाकाम बना दिया |एसबीआई एफएम सरकारी म्यूचुअल फंड कंपनी है।
 डी पी सिंह [ ईडी, एसबीआई एफएम ] का यह कहना सही नहीं मालूम होता है कि मीटिंग में रिटर्न, कंपनी कमीशन आदि मुद्दों को दोबारा देखने की आवश्यकता के कारण शरिया फंड को टाल  दिया गया है। 
रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन शुरू से ही इस फंड के पक्षधर रहे हैं , जबकि केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इससे पल्ला झाड़ लिया था , जिसके कारण इसे लांच नहीं किया जा सका | अब भाजपा के केन्द्रीय शासन के दौरान ऐसे किसी सकारात्मक क़दम की उम्मीद भी नहीं की जानी चाहिए | वित्तमंत्री महोदय ने यह फरमा दिया था कि ''कोई भी बैंक आरबीआई के मानकों के मुताबिक कैसी भी योजना शुरू कर सकता है। मैं यह भी साफ कर देना चाहता हूं कि वित्त मंत्रालय का इस प्रोजेक्ट विशेष से कोई लेना-देना नहीं है। '' 
 दूसरी ओर भाजपा के ही पूर्व केन्द्रीय वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा आगे बढ़कर इसे ग़ैर क़ानूनी बताने से भी नहीं चूके |उन्होंने फ़रमाया कि '' मुझे आश्चर्य है कि ऐसा बॉन्ड या पेपर एसबीआई की कोई कंपनी ला रही है। धर्म या संप्रदाय के आधार पर फंड लाना कानून के खिलाफ भी होगा। सेबी को भी इसे देखना चाहिए और इसे प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। '' अब बैंक की यह बात भ्रामक ही मानी जाएगी कि इसे अच्छे , आकर्षक ढंग से लागू किया जायेगा | 
 एसबीआई एफएम के ईडी और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर डीपी सिंह ने भास्कर को बताया कि हमने ओपन इंडेक्स शरीया म्यूचुअल फंड को लाने के लिए इस वर्ष मई 2014 में सेबी को एप्लाई किया था। जुलाई 2014 में हमें सेबी से अनुमति मिल गई थी। इसके बाद हमने एक दिसंबर को इसे लाने का फैसला किया था। एसबीआई म्युचुअल फंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश खारा ने कहा कि यह ऎसा इक्विटी फंड होगा जिसमें छोटे मध्यम और बड़े आकार के कैपिटल फंड होंगे। यह  लगभग 17 करोड़ भारतीय मुसलमानों और देश की अर्थव्यवस्था के हित में उचित होगा कि इसे सांप्रदायिक चश्मे से न देखा जाए और जल्द से जल्द लागू किया जाए |
- डॉ . मुहम्मद अहमद 
 

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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