Sep 23, 2014

एकता , अखंडता को भंग करने का मंसूबा !

एकता , अखंडता को भंग करने का मंसूबा !
संघ प्रमुख मोहन भागवत को सिख समाज को हिन्दू धर्म का हिस्सा बताना भारी पड़ गया | विरोध में सैकड़ों सिख भाइयों और बहनों ने पिछले 6 सितंबर को नयी दिल्ली स्थित संघ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करके उनके दावे को चुनौती दी | इस प्रदर्शन में शिरोमणि अकाली दल , दिल्ली के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए | उल्लेखनीय है कि संघ प्रमुख ने गत दिनों कहा था कि संघ सिख धर्म को पृथक और अलग पहचान वाला नहीं मानता है | वह इसे हिन्दू धर्म का हिस्सा मानता है | इस बयान पर  सिखों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया हुई | प्रदर्शनकारियों ने इसे सिख धर्म के विरुद्ध और सिखों  के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप क़रार दिया | उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि सिखों को किसी हिन्दू धार्मिक संगठन और वह फासीवादी - के प्रमाण - पत्र की ज़रूरत नहीं है | सिखों ने कहा कि हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि इस तरह के आक्रामक बयानों को सिख और सिख समुदाय सहन नहीं करेगा | 
प्रदर्शनकारी काले झंडे लिए हुए थे और मोहन भागवत के बयान के विरुद्ध नारे लगा रहे थे | संघ समर्थित शिरोमणि अकाली दल [ बादल ] ने इस प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया | शिरोमणि अकाली दल और अन्य सिख संगठनों ने इसमें हिस्सा लिया | पुलिस ने तरसेम सिंह खालसा , भजन वालिया सहित शिरोमणि अकाली दल के कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया , लेकिन बाद में इन्हें छोड़ दिया गया | प्रमुख सिख नेता , शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना भी प्रदर्शन में सम्मिलित हुए | पुलिस ने अवरोध खड़े करके प्रदर्शनकारियों को संघ कार्यालय की ओर बढने से रोकने की कोशिश की | 
सिख भाइयों ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का भी विरोध किया है , जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में रहनेवाले सभी हिन्दू हैं | शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी , अमृतसर के मुखपत्र '' गुरूमति ज्ञान ''  [ सितंबर 2014 . पृष्ठ 56 ] में छपे एक वक्तव्य में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह ने भागवत के बयान को देश की एकता और अखंडता को भंग करनेवाला क़रार देते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है | 
श्री सिंह ने कहा कि ' भारत एक बहुभाषी , बहुधर्मी देश है | इसमें हिन्दू , मुसलमान , सिख , ईसाई व अन्य धर्मों के लोग बसते हैं , जिनके अपने - अपने रीति - रिवाज तथा संस्कार हैं | भारतीय संविधान के अनुसार , प्रत्येक धर्म के लोगों को अपने - अपने धर्म व रीति - रिवाजों के अनुसार रहने का पूर्ण अधिकार है |
उन्होंने कहा कि मोहन भागवत की यह दलील कि अमेरिका , इंग्लैंड में रहनेवाले लोग अंग्रेज़ , जर्मनी में रहनेवाले जर्मन हैं आदि बड़ी उपहासस्पद बात है , क्योंकि अमेरिका में ईसाई गोरे लोगों के अलावा मुसलमान , सिख व हिन्दू भाई भी बड़ी संख्या में रह रहे हैं | इसी तरह दूसरे देशों में भी है , परन्तु किसी ने कभी भागवत जैसी संकुचित सोच का प्रकटन नहीं किया |
श्री सिंह ने कहा कि किसी भी देश में रहनेवाले लोग वहां के निवासी एवं राष्ट्रीयता के नाम से जाने जा सकते हैं , अर्न्तु एकधर्मी नहीं | इससे पहले भी भागवत ने कई विवादकारी बयान दिए हैं | उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक या दूसरे धर्मों का अपमान कर देश की कोई धारा  तरक्की , ख़ुशहाली का सपना पूरा नहीं कर सकती | 
जत्थेदार अवतार सिंह ने कहा कि भागवत के इस सांप्रदायिक बयान से देश में बसनेवाले अन्य धर्मों के लोगों के मन को भारी ठेस पहुंची है | ऐसे बयान राष्ट्रहित में नहीं हैं | उन्होंने भारत सरकार से ज़ोर देकर कहा कि शांतिपूर्ण भारत की एकता व अखंडता को भंग करने के मंसूबे बनानेवाले भागवत के विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई करनी चाहिए |  
- डॉ . मुहम्मद अहमद 

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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