Sep 23, 2014

पलटिए , अपने रब की तरफ़

स्टीफन हाकिंग ने ' गॉड पार्टिकल्स ' को पूरी दुनिया को खत्म करनेवाला बताया 
पलटिए , अपने रब की तरफ़ 
इस्लाम क़यामत के आने पर पूर्ण धारणा रखने की शिक्षा देता है | क़यामत का अर्थ है महाप्रलय , पुनरुत्थान | यह ऐसा दिन है जब मौजूदा सांसारिक व्यवस्था छिन्न - भिन्न हो जाएगी | सारे जीवधारी मर जायेंगे | इसके बाद अल्लाह एक दूसरी सृष्टि की रचना करेगा | सारे लोग पुनः ज़िन्दा करके उठाये जायेंगे और उन्हें उनके अपने कर्मों का  बदला दिया जायेगा | यही क़यामत का दिन होगा | पवित्र कुरआन में है - '' [ इन्सान ] पूछता है , ' आख़िर क़यामत का दिन कब आएगा? तो जब निगाह पथरा जाएगी और चन्द्रमा प्रकाशहीन हो जायेगा , और सूर्य , चन्द्रमा मिलाकर एक कर दिए जायेंगे | उस दिन इन्सान कहेगा कहाँ भागकर जाऊं ? कदापि नहीं , वहां शरण लेने की कोई जगह न होगी | उस दिन तेरे रब ही के सामने जाकर ठहरना होगा | [ 75 : 6 - 12 ] क़यामत अचानक आएगी , मगर कब आएगी , सिर्फ़ अल्लाह को मालूम है | लेकिन इसके लक्षण ज़रूर हैं , जिनके आधार पर क़यामत की कल्पना की जाती है | इन्सान अपनी करतूतों से प्रकृति के उपादानों का विनाश कर रहा है , जो भी बिगाड़ और विनष्टीकरण का कारण है | आज इंसान ख़ुद प्राकृतिक संसाधनों को मिटाने पर लगा हुआ है | लगातार प्रकृति के कार्यों में हस्तक्षेप कर इंसान ने खुद को प्रकृति के सामने ला खड़ा किया है जहां प्रकृति उसका विनाश कर सकती है.... जंगलों की कटाई कर असंतुलन पैदा किया जा रहा है.... हवा को प्रदूषित कर कर दिया गया है तो  जल को भी इंसान ने नहीं बख्शा | जब से पृथ्वी बनी हैं, छिटपुट विनाश के कई चरण हुए हैं, कई प्रजातियां विलुप्त हुई और कई नई आई हैं. | भूगर्भीय साक्ष्य भी पृथ्वी पर कई प्राचीन विनाशकारी हलचल को दर्शाते हैं., चाहे वे भूकम्प के रूप में ,  ज्वालामुखी के रूप में ,  या फिर बाढ़ के रूप में जिसकी परिणति इससे पहले कई बार  हिमयुग के रूप में हुई है तो कई बार भयंकर बाढ़ , तूफ़ान आदि के रूप में | यह अल्लाह की चेतावनियाँ और उसके वजूद की निशानियाँ भी हैं | वही स्रष्टा है और संहारक भी | अब विज्ञान भी इस तथ्य को मानने लगा है | भौतिकी और ब्रह्मांड विज्ञान के मशहूर प्रफेसर स्टीफन हॉकिंग ने पिछले दिनों दुनिया को चेतावनी दी है कि जिस 'गॉड पार्टिकल्स' ने सृष्टि को स्वरूप और आकार दिया है, उसमें पूरी दुनिया को खत्म करने की भी क्षमता है। प्रफेसर हॉकिंग की ' संडे टाइम्स ' [ लन्दन 7 सितंबर 2014 ] को दी इस रिपोर्ट ने विज्ञान जगत में खलबली मचा दी है। वैज्ञानिक इस विषय को लेकर काफी रोमांचित हैं। हॉकिंग का कहना है कि अगर वैज्ञानिक गॉड पार्टिकल्स को हाई टेंशन (उच्च तनाव) पर रखेंगे तो इनसे 'कैटास्ट्रॉफिक वैक्यूम' तैयार होगा। यानी इससे बुलबुलानुमा गैप तैयार होंगे। इससे ब्रह्मांड में गतिमान कण टूट-टूटकर उड़ने लगेंगे और आपस में टकराकर चूर-चूर हो जाएंगे। हॉकिंग ने कहा कि हिग्स बोसोन १०० अरब गीगा इलेक्ट्रॉन वोल्ट से अधिक की ऊर्जा पर अति स्थिर हो सकता है। ऐसी स्थिति में एक विनाशकारी निर्वात (वैक्यूम) बन जाएगा। बुलबुले के रूप में बना यह निर्वात प्रकाश की गति से विस्तार लेगा और पूरे ब्रह्मांड के विनाश का कारण बन जाएगा |
हालांकि भौतिकविदों ने इस मसले को आपदा की आशंका मानकर किसी तरह का प्रयोग नहीं किया है। लेकिन प्रफेसर हॉकिंग ने दुनिया के वैज्ञानिकों को सचेत जरूर किया है। सैद्धांतिक भौतिकीविदों ने हिग्स बॉसन के बारे में लिखा है कि उनकी नई किताब स्टारमस में नील आर्मस्ट्रॉन्ग, बज़ एलड्रीन, क्वीन गिटारिस्ट ब्रायन मे आदि के लेक्चर्स का चयन है। इसी साल नवंबर में यह किताब आने वाली है। इसमें भी गॉड पार्टिकल्स से जुड़ी जानकारियां होंगी। यूनिवर्स की हर चीज (तारे, ग्रह और हम भी) पदार्थ से बनी है। मैटर अणु और परमाणुओं से बना है और मास वह फिजिकल प्रॉपर्टी है, जिससे इन कणों को ठोस रूप मिलता है। मास जब ग्रैविटी से गुजरता है, तो वह भार की शक्ल में भी मापा जा सकता है, लेकिन भार अपने आप में मास नहीं होता, क्योंकि ग्रैविटी कम-ज्यादा होने से वह बदल जाता है। मास आता कहां से आता है, इसे बताने के लिए फिजिक्स में जब इन तमाम कणों को एक सिस्टम में रखने की कोशिश की गई तो फॉर्म्युले में गैप दिखने लगे। इस गैप को भरने और मास की वजह बताने के लिए 1965 में पीटर हिग्स ने हिग्स बोसोन या गॉड पार्टिकल का आइडिया पेश किया। 
क़यामत की धारणा धर्मग्रन्थों में मौजूद है | इस विषय पर इस्लाम में विशद विवरण है | ईसाई धर्म में भी क़यामत की धारणा विद्यमान है | हिन्दू धर्म में भी महा प्रलय का उल्लेख है | अन्य धर्मग्रन्थों के साथ ही महाभारत में कलियुग के अंत में प्रलय होने का जिक्र है, लेकिन यह किसी जल प्रलय से नहीं बल्कि धरती पर लगातार बढ़ रही गर्मी से होगा। महाभारत के वनपर्व में उल्लेख मिलता है कि सूर्य का तेज इतना बढ़ जाएगा कि सातों समुद्र और नदियां सूख जाएंगी। संवर्तक नाम की अग्रि धरती को पाताल तक भस्म कर देगी। वर्षा पूरी तरह बंद हो जाएगी। सबकुछ जल जाएगा, इसके बाद फिर बारह वर्षों तक लगातार बारिश होगी। जिससे सारी धरती जलमग्र हो जाएगी। लगभग ढाई सौ पहले के चर्चित भविष्यवक्ता नास्त्रेस्देमस की इस बारे में भविष्यवाणी मौजूद है | नास्त्रेस्देमस ने प्रलय के बारे में बहुत स्पष्ट लिखा है कि मै देख रहा हूँ,कि एक आग का गोला पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है,जो धरती से मानव के काल का कारण बनेगा । एक अन्य जगह वे लिखते हैं कि एक आग का गोला समुद्र में गिरेगा और पुरानी सभ्यता के समस्त देश तबाह हो जाएंगे। माया कलेंडर के अनुसार , 21 दिसंबर 2012 के बाद दुनिया को नहीं होना चाहिए , हालाँकि यह भविष्यवाणी गलत साबित हो चुकी है | साउथ ईस्ट मेक्सिको के माया कैलेंडर में 21 दिसंबर 2012 के बाद की तिथि का वर्णन नहीं है। कैलेंडर उसके बाद पृथ्वी का अंत बता रहा है। माया कैलेंडर के मुताबिक 21 दिसंबर 2012 में एक ग्रह पृथ्वी से टकराएगा, जिससे सारी धरती खत्‍म हो जाएगी। करीब 250 से 900 ईसा पूर्व माया नामक एक प्राचीन सभ्यता स्थापित थी। ग्वाटेमाला, मैक्सिको, होंडुरास तथा यूकाटन प्रायद्वीप में इस सभ्यता के अवशेष खोजकर्ताओं को मिले हैं। कहा जाता है कि माया सभ्यता के काल में गणित और खगोल के क्षेत्र उल्लेखनीय विकास हुआ था। अपने ज्ञान के आधार पर माया लोगों ने एक कैलेंडर बनाया था। कहा जाता है कि उनके द्वारा बनाया गया कैलेंडर इतना सटीक निकला है कि आज के सुपर कम्प्यूटर भी उसकी गणनाओं में 0.06 तक का ही फर्क निकाल सके और माया कैलेंडर के अनेक आकलन, जिनकी गणना हजारों सालों पहले की गई थी, सही साबित हुए हैं। मगर क़यामत की तारीख़ के सिलसिले में माया कलेंडर असफल सिद्ध हो चुका है | फिर भी अमेरिका के कुछ वैज्ञानिकों ने कुछ समय पहले घोषणा की है कि 13 अप्रैल 2036 को पृथ्वी पर प्रलय हो सकता है। खगोलविदों के अनुसार अंतरिक्ष में घूमने वाला एक ग्रह एपोफिस 37014.91 किमी/ प्रति घंटा) की रफ्तार से पृथ्वी से टकरा सकता है। इस प्रलयंकारी भिडंत में हजारों लोगों की जान भी जा सकती है। हालांकि नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हकीक़त यह है कि क़यामत का आना यक़ीनी है , मगर यह कब आएगी , इसका ज्ञान सिर्फ़ अल्लाह को है | अतः परलौकिक जीवन को सफल बनाने के लिए अनिवार्य है कि इन्सान इस दुनिया सुकर्म करे , जिससे पालनकर्ता प्रभु उससे राज़ी हो |
Dr. Muhammad Ahmad

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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