Sep 23, 2014

केंद्र सरकार सांप्रदायिकता पर रोक लगाकर राजधर्म का पालन करे

केंद्र सरकार सांप्रदायिकता पर रोक लगाकर राजधर्म का पालन करे
देश के शुभचिंतकों , हितैषियों और विवेकशील लोगों को इस बात का शिद्दत से अहसास है कि हमारा प्रिय देश इस समय सांप्रदायिकता की आग में जलने लगा है | उन्हें इस बात की काफ़ी चिंता भी है कि अगर इस नकारात्मक प्रवृत्ति पर फ़ौरन रोक नहीं लगाई गयी , तो स्थिति गंभीर हो सकती है | जमाअत इस्लामी हिन्द के महासचिव जनाब नुसरत अली ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में यह चिंता जताई गयी है कि भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद से अल्प संख्यकों, खासकर मुसलमानों के खिलाफ़ भगवा घृणास्पद आंदोलन में तेज़ी आयी है। विगत 10 सितंबर को लिखे अपने पत्र मे उन्होंने कहा कि यह घृणास्पद आंदोलन न केवल देश  के बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष  ढांचे को नुक़सान पहुंचाएगा , बल्कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की विकास योजना में भी बाधा उत्पन्न करेगा | पत्र में कहा गया है कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान देश  ने घृणित राजनीतिक आंदोलन देखा। एक पूर्ण बहुमत वाली सरकार से आशा की जा रही थी कि इस घृणित आंदोलन पर लगाम लगेगा, लेकिन मामला और भी बीभत्स और व्याकुल करने वाला है। ऐसा लगता है कि आंदालनकारियों को और पंख लग गए हैं। जमाअत के महासचिव ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि ‘लव जिहाद’, ‘सांप्रदायिक बलात्कार’ और ‘बलात् धर्म परिवर्तन’ जैसी नई - नई  शब्दावलियों का ईजाद कर फ़र्जी दुष्प्रचार का नया सिलसिला क़ायम किया गया है। देशवासियों विशेषकर अल्पसंख्यकों के लिए यह अत्यंत निराशाजनक है कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार के नेतागण जैसे योगी आदित्यनाथ, अशोक सिंघल और प्रवीण भाई  तोगडि़या निरंतर उत्तेजक, विषाक्त और घृणास्पद वक्तव्य दे रहे हैं , लेकिन उनके खि़लाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। महासचिव ने यह भी कहा कि केवल यह कहकर कि कानून और व्यवस्था का मामला राज्य सरकार का है, केंद्र को चुप नहीं बैठना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सही है कि क़ानून और व्यवस्था की जि़म्मेदारी राज्य सरकार की है लेकिन अगर राज्य सरकार क़ानून और व्यवस्था को क़ायम रखने में असफल रहती है और घृणास्पद आंदोलन एक बड़ा सांप्रदायिक तनाव पैदा करता है तो केंद्र को चुप नहीं बैठना चाहिए। उन्होंने सरकार से राज धर्म पालन करने का अनुरोध किया।
यह केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारों का दायित्व ही नहीं बल्कि उनकी अनिवार्यता है कि संविधान प्रदत्त देश के सभी नागरिकों, समूहों और समुदायों बसमूल अल्पसंख्यकों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए राज धर्म का पालन करें। जमाअत ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास योजनाओं की प्रशंसा करते हुए इसकी सफलता पर संशय ज़ाहिर किया कि अगर विभाजनकारी आंदोलन इसी तरह जारी रहा तो यह समाजिक एकता और शांति के लिए खतरा होगा। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि लोगों ने वोट चाहे पक्ष में डाले हैं या विरोध में, सरकार सभी समुदायों को एक साथ लेकर चले और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए कठोर कार्रवाई करे। जनाब नुसरत अली ने कहा कि कुछ विषयों पर मत विभिन्नताएं हो सकती हैं, बावजूद इसके जमाअत सरकार के प्रत्येक अच्छी पहल का हमेशा समर्थन करेगी | देश में बढ़ रही सांप्रदायिकता से राजनीतिक दल भी चिंतित हैं | कांग्रेस के क़द्दावर नेता एवं महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर सांप्रदायिकता फैलानेवालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की मांग की है | उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई है कि गृहमंत्री को 'लव जिहाद' का मतलब नहीं पता। दिग्विजय ने कहा है कि जब भाजपा के तमाम नेता जगह-जगह 'लव जिहाद' को लेकर तीखी बयानबाजी कर रहे हैं तो ऐसे आपको कैसे नहीं पता कि लव जिहाद क्या होता है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री लालकिले की प्राचीर से सांप्रदायिक सद्भाव की अपील करते हैं ! उल्लेखनीय है कि सरकार के सौ दिन पूरे होने पर अपने मंत्रालय की उपलब्धियों पर आयोजित पत्रकार वार्ता में 'लव जिहाद' के बारे में पूछे जाने पर राजनाथ सिंह ने कहा था कि यह क्या होता है। गृहमंत्री को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने कहा है कि 'प्रिय राजनाथ सिंह जी, मैंने आपकी वह पत्रकार वार्ता देखी जिसमें आपके द्वारा लव जिहाद की जानकारी से इन्कार किया गया। मुझे यह विश्वास नहीं होता कि जबकि आपके गृह प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष कई दिनों से यह बयान दे रहे हैं और विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर इसे प्रचारित कर रहे हैं, ऐसे में आपको इसकी जानकारी नहीं है।'यही नही कांग्रेस नेता ने संघ के मुखपत्र माने-जाने वाले समाचारपत्रों को भी घेरे में लेते हुए कटाक्ष करते हुए लिखा है कि 'शायद आजकल आप ' पांचजन्य ' और ' ऑर्गनाइजर '  नहीं पढ़ रहे हैं , जिनके मुखपृष्ठ पर इसके बारे में लेख छपे हैं।' दिग्विजय ने प्रधानमंत्री की मंशा को पूरा करने के लिए गृह मंत्री से अपील की है कि वे राज्य सरकारों को सांप्रदायिकता फैलाने वाले तत्वों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दें एवं सांप्रदायिकता पर काबू पाएं।
Dr. Muhammad Ahmad

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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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