Aug 23, 2014

हिन्दू राष्ट्र के पैरोकार ?

लगता है कि अब संघ प्रमुख मोहन भागवत हमेशा चर्चा में रहना पसंद करने लगे हैं | उन्होंने गत 17 अगस्त को एक नए विवाद को जन्म दे दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और हिंदुत्व उसकी पहचान है। विहिप के स्वर्णजयंती समारोह के उद्घाटन कार्यक्रम में मुंबई में उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है..हिंदुत्व हमारे राष्ट्र की पहचान है और यह अन्य धर्मों को स्वयं में समाहित कर सकता है।इससे पहले पिछले सप्ताह उन्होंने कटक में कथित तौर पर कहा था कि सभी भारतीयों की सांस्कृतिक पहचान हिंदुत्व है ।
उन्होंने कहा था, ‘सभी भारतीयों की सांस्कृतिक पहचान हिंदुत्व है और देश के वर्तमान निवासी इसी महान संस्कृति की संतान हैं।उन्होंने सवाल किया था कि यदि इंगलैंड के लोग इंगलिश हैं, जर्मनी के लोग जर्मन हैं अमेरिका के लोग अमेरिकी हैं तो हिंदुस्तान के सभी लोग हिंदू के रूप में क्यों नहीं जाने जाते। विहिप की स्थापना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 29-30 अगस्त, 1964 को मुंबई में हुई थी। 
संघ प्रमुख ने विहिप के लक्ष्यों के बारे में कहा, ‘अगले पांच सालों में हमें देश में सभी हिंदुओं के बीच समानता लाने के लक्ष्य पर काम करना है। सभी हिंदुओं को एक ही स्थान पर पानी पीना चाहिए, एक ही स्थान पर प्रार्थना करना चाहिए, और देहावसान के पश्चात उनके पार्थिव शरीरों का एक ही स्थान पर दाह संस्कार किया जाना चाहिए।’ 
यह बात माननी होगी कि केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद हिंदुत्व संबंधी बयानों की बाढ़ आ गयी है | कुछ लोग तो भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में अपनी बात बलात मनवाने पर आमादा दीखते हैं | राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लोग इस दुष्कर्म में आगे हैं | जो लोग यथार्थ में जीना चाहते हैं और भ्रामक स्थितियों से बचना चाहते हैं , वे इस प्रकार के दुष्प्रयासों का सदा से विरोध करते आये हैं , यहाँ तक कि एक भाजपा विधायक ने इस बयानबाज़ी का विरोध किया है
गोवा में भारतीय जनता पार्टी के विधायक माइकल लोबो ने विगत 18 अगस्त को संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र कहा था। लोबो ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी ऐसे बयान का समर्थन नहीं किया है। मीडिया से बातचीत में लोबो ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने इस पर सहमति जताई है।'' ज़ाहिर है , लोबो का बयान राजनैतिक अधिक है , लेकिन संघ प्रमुख के उक्त बयान के विरुद्ध है
यह हमारे देश की जीवंत आत्मा ही है कि इसने कभी संकीर्ण विचारधारा को गवारा नहीं किया | बेबाक राय रखनेवाले हमेशा मौजूद रहे हैं | ताज़ा बयान पर कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने मोहन भागवत को हिटलर अनायास ही नहीं कह दिया । भागवत के विवादित बयान पर निशाना साधते हुए दिग्विजय सिंह ने टि्वटर पर लिखा है कि हम लोग एक ही हिटलर को जानते थे, लेकिन यहां दो हैं। अब भारत को भगवान ही बचाए | दिग्विजय सिंह ने अपने अन्य ट्वीट में भागवत से पूछा है कि जब हिन्दुत्व एक धार्मिक पहचान है, तो सनातन धर्म क्या है। 
दिग्विजय ने संघ के विचारधारा की तुलना तालिबान से करते हुए कहा है कि ऎसी सोच रखने वाले लोग देश की शांति को बिगाड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे सेकुलर देश धर्म को राजनीति से दूर रखना चाहिए और धर्म के नाम पर मासूम लोगों को मूर्ख नहीं बनाना चाहिए। सहज रूप अन्य राजनेताओं ने भी भागवत के बयान की आलोचना की है
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि जो लोग संघ और मोदी को अलग.अलग समझते हैं वे नहीं जानते कि दोनों समान गुण वाले हैं और मोदी संघ के विचारधारा की कठपुतली हैं।  समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि सामाजिक तनाव भड़काने के लिए वे इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने संघ पर नफरत और अलगाववाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। 


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मैं अपना क्या परिचय कराऊं ... आप इतना जान लीजिए कि कुछ लिखता रहता हूँ , इस संकल्प एवं आकांक्षा के साथ कि किंचित मेरे विचार समाजोपयोगी - मानवोपयोगी बन सकें | इस क्रम में '' साहित्य मन '' आपके समक्ष है , जो एक प्रयास है खट्टे - मीठे अनुभवों की आवयविक समग्रता का , वेदना - समवेदना , अनुभूतियों और अनुभवों को बाँटने का ... यह भी कह सकते हैं कि '' साहित्य मन '' आत्म - अन्वेषण की प्रक्रिया है , आत्मशोधन का पड़ाव है , जिसका उद्देश्य किसी पर भी आघात एवं आलोचनात्मक प्रहार करना तथा किसी को भी नीचा दिखाना नहीं है | साथ ही साहित्य - प्रवाह को अवरुद्ध करना भी नहीं है | मैं अपने बारे में यह बताता चलूं कि मैं लगभग 32 वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ | प्रतिदिन कुआँ खोदता और पानी पीता हूँ , जिस पर मुझे सायास गर्व है | --- सबको यथायोग्य अभिवादन के साथ ----- आपका अपना ही ------------ [ डॉ .] मुहम्मद अहमद [ 19 दिसंबर 2013]

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